किम जोंग उन: उत्तर कोरिया ने दिए टैक्टिकल परमाणु हथियारों के सबूत, क्या है इरादा

North Korea ने इन दिनों जितने मिसाइल लॉन्च किए हैं, उनका हिसाब-किताब रखना बेहद मुश्किल है.ख़ासतौर पर बीते एक पखवाड़े में ये हमने देखा है कि उत्तर कोरिया लगभग हर रोज़ एक हथियार दाग रहा है.

किम जोंग उन
Rodong Sinmun
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उत्तर कोरिया ने इन दिनों जितने मिसाइल लॉन्च किए हैं, उनका हिसाब-किताब रखना बेहद मुश्किल है.ख़ासतौर पर बीते एक पखवाड़े में ये हमने देखा है कि उत्तर कोरिया लगभग हर रोज़ एक हथियार दाग रहा है. सुदूर और एकांत इलाकों में हो रहे ये परीक्षण अब पहले की तरह सुर्ख़ियों में नहीं आते, लेकिन अगर हम सभी मिसाइल टेस्ट पर नज़र डालें तो इसके कई मायने निकलते हैं.उत्तर कोरिया कहता है कि वो इन परीक्षणों से अमेरिका और दक्षिण कोरिया को सबसे बड़े मिलिट्री ड्रिल करने की सज़ा दे रहा है. ये दोनों सहयोगी देश उत्तर कोरिया की ओर से हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई का अभ्यास कर रहे हैं. उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को ये पसंद नहीं आया.इस बार उत्तर कोरिया ने पलटवार का कुछ अलग तरीका अपनाया है. हालांकि, पहले भी उत्तर कोरिया ने इस तरह के सैन्य अभ्यासों का जवाब छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलें और कुछ गोले दाग कर दिया है. इस बार, बीते दो सप्ताह के भीतर उत्तर कोरिया ने अपनी सबसे ताकतवर इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (आईसीबीएम) दागी हैं, जो वास्तव में अमेरिका तक पहुंच सकती हैं.

उत्तर कोरिया
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तीन देश उत्तर कोरिया के निशाने पर

उत्तर कोरिया ने एक पनडुब्बी से मिसाइलें छोड़ीं, जो भूमिगत भंडार सा लगता है और इसकी सेना ने दक्षिण कोरिया के हवाई क्षेत्र में एक कृत्रिम परमाणु हमले का भी अभ्यास किया है. और किम जोंग उन ने एक पानी के अंदर चलने वाले नए ड्रोन को लॉंच किया. उनका दावा है कि ये ड्रोन पानी के अंदर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, जिससे बड़ी 'रेडियोधर्मी सूनामी' आ सकती है और दुश्मन देशों के युद्धपोत नष्ट हो सकते हैं.सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के साथ जुड़ीं विश्लेषक एलेन किम ने इसे "उत्तर कोरियाई फ़ैशन शो के जैसा बताया." उनका इशारा एक मिसाइल परीक्षण के दौरान किम जोंग उन की बेटी की मौजूदगी की ओर था.हालांकि, किम सहित कई अन्य विश्लेषक इस बार उत्तर कोरिया की ओर से लॉन्च की जा रहे हथियारों की विविधता देखकर परेशान हैं. उत्तर कोरिया ने इस बार नए और पहले से अधिक विकसित हथियारों की खेप सबके सामने दिखाई है. समुद्र और ज़मीन दोनों ही रास्तों से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान इन हथियारों की जद में हैं.किम कहती हैं, "इससे पहले हमें नहीं पता था कि उत्तर कोरिया पनडुब्बी से मिसाइल दाग सकता है या ज़मीन के नीचे से मिसाइलें छोड़ सकता है. उसके हथियारों को ट्रैक करना और मार गिराना दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है."ये उत्तर कोरिया की ओर से परमाणु हमले के ख़तरे को बढ़ाता है.

पानी के अंदर परमाणु हथियार ले जाने वाला ड्रोन

हम पनडुब्बी से छोड़ी गई क्रूज़ मिसाइल का ही उदाहरण ले लेते हैं. दक्षिण कोरिया के ऐसन इंस्टिट्यूट में हथियार विशेषज्ञ यांग उक के लिए ये मिसाइलें सबसे अधिक चिंता देने वाली हैं.

वो कहते हैं कि पानी के अंदर मिसाइलें लॉन्च करने का मतलब है कि अब मिसाइल दागने से पहले इसका पता लगना मुश्किल होगा. क्रूज़ मिसाइलें लॉन्च करने के बाद कम ऊंचाई पर उड़ती हैं और बेहतर मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम के ज़रिए इन्हें हवा में मार गिराया जा सकता है.

किम जोंग उन को हमेशा ये डर रहा है कि अमेरिका उनके देश पर पहले हमला करेगा और हथियारों का जखीरा इस्तेमाल करने का मौका मिले, उससे पहले ही उसे नष्ट कर देगा.

ऐसा माना जा रहा है कि किम जोंग उन इस सिलसिलेवार परीक्षणों से ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अब उत्तर कोरिया के पास भी जवाब देने और यहां तक कि पहले हमला करने की ताकत है. लेकिन ज़मीन के नीचे या पानी के अंदर छिपाए हथियारों को नष्ट करना मुश्किल है.

दूसरे शब्दों में वो ये कह रहे हैं कि, "हम पर हमला करने के बारे में मत सोचना."

हालांकि, ये एहतियात बरतना चाहिए कि किम जोंग उन अक्सर अपने देश की सैन्य क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते आए हैं.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल परमाणु हमले से जुड़ा है. उत्तर कोरिया दावा करता है कि उसने हाल में जितनी भी मिसाइलों का परीक्षण किया है, वो परमाणु हथियार लाने ले जाने में सक्षम हैं.

हालांकि, इनमें से अधिकतर मिसाइलें बेहद छोटे और हल्के परमाणु हथियार ही ले जा सकती हैं. उत्तर कोरिया को अभी ये साबित करना है कि वो ऐसी मिसाइलें बना सकता है. और जब तक वो इनमें से एक का भी परीक्षण न कर ले, तब तक सब दावे धुंधले हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया समुदाय ऐसे परीक्षण के इंतज़ार में है.एक बार उत्तर कोरिया बड़े पैमाने पर छोटे छोटे हथियार बनाने लगा, तो उसकी ओर से हमले का ख़तरा वास्तविक हो जाएगा.

उत्तर कोरिया
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घातक हथियार बनाने की ओर

कुछ लोगों का तर्क है कि उत्तरी कोरिया को बातचीत की मेज पर लाने और आगे परमाणु परीक्षण को रोकने के लिए अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय जगत को और गहराई से काम करना चाहिए.

पिछले चार साल से दोनों पक्षों में बातचीत बंद है. हालांकि प्योंगयांग ने भी बातचीत को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई है. असल में वो उस वक्त का इंतज़ार कर रहा है जब उसे सबसे अधिक फायदा होने की संभावना लगेगी.

चूंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया पर कार्रवाई करने से चीन और रूस के इनकार किए जाने के कारण, उत्तर कोरिया बिना किसी भय के हथियार विकसित करना जारी रख सकता है.

उसे अभी रोकना क्यों ज़रूरी है? उसके पास जितना अधिक मारक हथियार होगा, उसका हाथ उतना ही मजबूत होगा.

वॉरहेड की प्रतिकृति के अलावा अभी ये साबित करना बाकी है कि अंतरमहाद्विपीय उड़ान में असली वॉरहेड कितना सफल रहता है.

मौजूदा समय में, उत्तर कोरिया अपनी लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण आकाश में छोड़ कर करता है. वो अत्यधिक सटीक आईसीबीएम भी विकसित करना चाहता है, जिसे लॉंच से पहले ईंधन फ़ायर करने की ज़रूरत नहीं होती और बहुत थोड़े समय की चेतावनी पर उसे दागा जा सकता है.

यांग उके का मानना है कि किम जोंग उन अपने देश में भी विपरीत हालात से गुजर रहे हैं. देश की अर्थव्यवस्था गिर रही है और जनता में भुखमरी के हालात हैं.

यांग कहते हैं, "परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ाना ही उनके तरकश में एकमात्र तीर बचा हुआ है."

इसलिए उत्तर कोरिया आगे और विविध और घातक श्रेणी के हथियारों को विकसित करना जारी रखेगा.

एलेन किम के लिए एक बात निश्चित हैः "अभी और टेस्ट होंगे."

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