SCO समिट के बाद चीन दौरे पर क्यों पहुंचे उत्तर कोरिया के तानाशाह Kim Jong Un? शी जिनपिंग और पुतिन संग दिखेंगे
Kim Jong Un China Visit: उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन इस वक्त चीन के दौरे पर हैं। बीजिंग में होने वाली "विक्ट्री डे" परेड में वो शिरकत करने पहुंचे हैं। ये मौका खास इसलिए है क्योंकि 1959 के बाद पहली बार कोई उत्तर कोरियाई नेता चीन की इस बड़ी सैन्य परेड में शामिल हो रहा है।
किम जोंग उन की ये यात्रा चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों को और मज़बूत करने वाली मानी जा रही है। साथ ही, पहली बार उन्हें इतने बड़े बहुपक्षीय मंच पर देखा जाएगा, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई दूसरे देशों के नेता भी मौजूद रहेंगे।

किम जोंग उन का ये दौरा बेहद अहम
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन एक बार फिर अपनी मशहूर बुलेटप्रूफ ट्रेन से चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं। इस दौरे को कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। एक तरफ ये विज़िट चीन और उत्तर कोरिया की दोस्ती को और मज़बूत होने का संकेत देता है, वहीं दूसरी तरफ ये साफ मैसेज भी देती है कि किम जोंग उन अब सिर्फ अपने देश तक सीमित नहीं रहना चाहते। वो दुनिया की बड़ी राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दिखाना चाहते हैं।
खासकर ऐसे वक्त में, जब रूस-यूक्रेन जंग चल रही है और एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है, किम का ये कदम नई अंतरराष्ट्रीय समीकरणों का इशारा करता है। यानी बीजिंग की "विक्ट्री डे" परेड सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आने वाले वक्त की राजनीति और रणनीति की झलक भी है।
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बीजिंग से प्योंगयांग तक... रिश्ते नए मुकाम पर
उत्तर कोरिया के इतिहास में ये पल काफी अहम है, क्योंकि पिछली बार साल 1959 में किम इल सुंग के वक्त कोई उत्तर कोरियाई नेता बीजिंग की सैन्य परेड में शामिल हुआ था। किम जोंग उन की ये यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और गहरी करने वाला कदम मानी जा रही है। 2015 की "विक्ट्री डे" परेड में उत्तर कोरिया ने सिर्फ अपने सीनियर लीडर चोए र्योंग-हे को भेजा था, लेकिन इस बार खुद किम की मौजूदगी साफ दिखाती है कि चीन और उत्तर कोरिया अपने राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं।
हाल ही में दो बार पुतिन से की थी मुलाकात
किम जोंग उन बहुत कम ही विदेश यात्राएं करते हैं। हाल के सालों में उन्होंने सिर्फ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दो बार मुलाकात की है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद उनके कूटनीतिक रिश्तों की बड़ी मिसाल मानी गई। बीजिंग का ये दौरा भी खास है, क्योंकि 2019 के बाद वो पहली बार चीन पहुंचे हैं। उस समय उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों की 70वीं सालगिरह पर बीजिंग का दौरा किया था।
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