back-channel diplomacy: भारत-पाकिस्तान के बीच बैक चैनल से हो रही बातचीत? PAK ने दिया ये जवाब
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे वक्त से विवाद चल रहा है। चार साल पहले पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच सभी तरह के संबंध तनावपूर्ण हो गए।

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भारत-पाकिस्तान के बीच हालात में सुधार की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। फरवरी 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद से दोनों देशों के संबंध खराब चल रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान में जोर-शोर से इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार भारत के साथ पर्दे के पीछे बातचीत कर रही है। लेकिन पाकिस्तान ने गुरुवार को यह स्पष्ट कर दिया कि वह पर्दे के पीछे से भारत से कोई बातचीत नहीं कर रहा है।
पर्दे के पीछे नहीं हो रही बातचीत
पाकिस्तान के विदेश विभाग की प्रवक्ता मुमताज जाहरा बलूच ने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच, पर्दे के पीछे से कोई बातचीत नहीं हो रही है। मुमताज जहरा बलोच ने कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान और भारत के बीच कोई बैकचैनल नहीं है। बलूच ने कहा कि पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद फरवरी 2019 में भारतीय वायुसेना के विमानों ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर बम गिराए थे, जिसके बाद दोनों देशों के संबंध ज्यादा तनावपूर्ण हो गए।
सिंधु जल संधि के उल्लंघन का लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में विदेश विभाग की प्रवक्ता मुमताज बलूच ने भारत पर यह आरोप लगाया कि भारत की किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाएं दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि का उल्लंघन हैं। बलूच ने कहा कि पाकिस्तान का मानना है कि इन परियोजनाओं को सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन कर विकसित किया गया था। प्रवक्ता ने कहा कि इन मामलों में पाकिस्तान की ओर से कुशलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया गया है, हमें यकीन है कि हमारे पास एक ठोस मामला है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले सीनेट में विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बारी खार ने भी कहा था कि पर्दे के पीछे भारत-पाकिस्तान की कोई बातचीत नहीं चल रही है।
एस जयशंकर ने आईना दिखाया
आपको बता दें कि भारत लगातार कहता रहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसियों वाला संबंध चाहता है, लेकिन ऐसे संबंधों के लिए इस्लामाबाद पहले आतंकवाद और अशांति मुक्त वातावरण तैयार करे। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत ने गंभीर आर्थिक संकट में श्रीलंका की मदद की है, लेकिन पाकिस्तान से हमारे संबंध बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ आज हमारा ऐसा कोई संबंध नहीं है कि हम सीधे उस प्रक्रिया में शामिल हो सकें। यह हमारे पड़ोसी देश पर निर्भर है कि वे इससे उबरने के लिए कोई रास्ता निकालें।












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