Nimisha Priya: ब्लड मनी पर नहीं बनी बात, राष्ट्रपति से भी माफी नहीं, केरल की निमिषा को यमन में फांसी मिलना तय?
Nimisha Priya death sentence: साल 2024 के आखिरी दिन केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया की रिहाई की सारी उम्मीदें खत्म होती दिख रही हैं, क्योंकि यमन के राष्ट्रपति रशद अल-अलीमी ने सोमवार को उनकी मौत की सजा को मंजूरी दे दी है, जिन्हें एक यमन के नागरिक की हत्या का दोषी ठहराया गया था।
यमनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा प्रिया की सजा पर एक महीने के भीतर अमल किया जाएगा।

क्या निमिषा प्रिया को बचाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं? (Yemen president approve Nimisha Priya's death sentence)
निमिषा प्रिया को लेकर यमन के राष्ट्रपति की तरफ से आया ये फैसला, उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि 36 वर्षीय निमिषा को मौत की सजा से बचाने के लिए लगातार काफी कोशिशें की गईं थीं। निमिषा की मां प्रेमा कुमारी पिछले कई सालों से अपनी बेटी को बचाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थीं।
इस साल की शुरुआत में प्रेमा कुमारी यमन की राजधानी सना पहुंची थीं और मौत की सजा माफ करवाने और पीड़ित परिवार से ब्लड मनी के लिए बातचीत करने के लिए वहीं रुकी हुई हैं। उन्हें यमन में रहने वाले एनआरआई सामाजिक कार्यकर्ताओं से बनी सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल की तरफ से सहायता प्रदान की गई थी।
लेकिन, इस साल सितंबर में पीड़िता के परिवार के साथ 'ब्लड मनी' पर पहुंचने की सारी कोशिशें उस वक्त खत्म हो गई, जब भारतीय दूतावास की तरफ से नियुक्त वकील ने निमिषा को बचाने के लिए और ज्यादा फंड की मांग की थी, जिसका कुछ हिस्सा एक्शन काउंसिल की तरफ से जुटाया गया था।
नेनमारा के विधायक के बाबू ने कहा, कि "हमने निमिशा प्रिया की जान बचाने के लिए अथक प्रयास किया, लेकिन हमारे प्रयास नाकाम गए। हम 40,000 डॉलर (करीब 34,20,000 रुपये) इकट्ठा करने में कामयाब रहे और उसे बचाने के लिए और भी ज्यादा फंड जुटाने के लिए तैयार थे। एक्शन काउंसिल के साथ-साथ मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस कोशिश में हाथ मिलाया।"
उन्होंने कहा कि वह निमिषा प्रिया के रिश्तेदारों से बात नहीं कर पाए हैं, क्योंकि अभी उनकी मां यमन में हैं।
उन्होंने TNIE को बताया, कि "हमने उम्मीद बनाए रखी है और हर संभव कोशिश करने के लिए तैयार थे। हालांकि, जैसा कि हम जानते हैं, सरकार और दूतावास की भागीदारी के बावजूद, फांसी से जुड़े फैसले अक्सर कुछ जातीय समूहों से प्रभावित होते हैं।"
निमिषा प्रिया को यमन में क्यों मिली फांसी की सजा?
केरल के पलक्कड़ जिले के कोलेंगोडे की रहने वाली नर्स निमिशा प्रिया अपने दिहाड़ी मजदूर माता-पिता की मदद के लिए 2008 में यमन चली गई थी। उन्होंने यमन के कुछ अस्पतालों में काम किया और अपना खुद का क्लिनिक शुरू करने की योजना बनाई थी। 2017 में, उनका अपने स्थानीय साथी तलाल अब्दो महदी से झगड़ा हो गया था। उनके परिवार ने कहा, कि तलाल अब्दो ने फंड में धांधली की थी, जिसका निमिषा ने विरोध किया था।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि तलाल अब्दो महदी ने निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर रखा था और पासपोर्ट वापस पाने के लिए निमिषा ने कथित तौर पर उसे बेहोश करने वाली दवा का इंजेक्शन लगाया। लेकिन, दवा की ज्यादा मात्रा के कारण उसकी मौत हो गई।
फिर निमिषा को यमन से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया गया था और 2018 में दोषी ठहराया गया था। उन्हें 2020 में सना की एक ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। यमन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में उनकी अपील को खारिज कर दिया था, और उनके पास फांसी की सजा से बचने के लिए आखिरी विकल्प 'ब्लड मनी' था।
ब्लड मनी अरब देशों में प्रचलित है, जिसके तहत पीड़ित परिवार धनराशि लेकर सजा पाए गये आरोपी को माफी दे देता है। इसे कोर्ट से मान्यता है और अगर ब्लड मनी पर बात बन जाती, तो निमिषा को माफ कर दिया जाता। लेकिन, बात नहीं बन पाई।
पति लौट आए भारत, निमिषा यमन में ही रहीं
निमिशा के परिवार को उम्मीद थी कि वे पीड़ित परिवार को ब्लड मनी देकर निमिषा को माफ करने के लिए राजी कर पाएंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाया। निमिषा के पति टॉमी थॉमस 2014 में देश में गृहयुद्ध के बाद अपनी 11 वर्षीय बेटी के साथ यमन से लौट आए थे, लेकिन निमिषा वहीं रह गई थी।
साल 2011 में निमिषा की टॉमी थॉमस से शादी हुई थी और वो शादी करने के लिए केरल लौटी थीं। शादी के बाद दोनों यमन आ गये। टॉमी थॉमस एक इलेक्ट्रीशियन के सहायत के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें काफी कम वेतन दिया जाता था। दिसंबर 2012 में निमिषा ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसके बाद परिवार चलाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ रहा था, जिससे आजिज आकर, और यमन में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद टॉमी थॉमस वापस भारत लौट आए, जहां अब वो ऑटो चलाते हैं।
यमन में खुद का क्लिनिक खोलना चाहती थी निमिषा
निमिषा ने 2014 में अपनी कम तनख्वाह वाली नौकरी छोड़कर अपना खुद का क्लिनिक खोलने का फैसला किया। लेकिन यमन के कानून के मुताबिक, उन्हें अपने पार्टनर के तौर पर स्थानीय व्यक्ति को रखना अनिवार्य था और यहीं से महदी की भूमिका सामने आई। वह पास में ही एक कपड़ा स्टोर चलाता था और उसकी पत्नी ने उसी क्लिनिक में बच्चे को जन्म दिया था, जहां निमिषा काम करती थी। जनवरी 2015 में, जब निमिषा अपनी बेटी के बपतिस्मा के लिए घर आई, तो महदी भी छुट्टी मनाने के लिए उसके साथ आया था।
निमिषा और उनके पति ने दोस्तों और परिवार से पैसे करीब 50 लाख रुपये जुटाए और एक महीने बाद निमिषा अपना क्लिनिक शुरू करने के लिए यमन लौट आईं। उन्होंने कागजी कार्रवाई भी शुरू कर दी, ताकि उनके पति और बेटी यमन में उनके साथ शामिल हो सकें, लेकिन मार्च में वहां गृहयुद्ध छिड़ गया और वे यात्रा नहीं कर सके। अगले दो महीनों में, भारत ने यमन से 4,600 नागरिकों और लगभग 1,000 विदेशी नागरिकों को निकाला। निमिषा उन कुछ सैकड़ों लोगों में से थीं, जो वापस नहीं लौटीं।
उनके पति थॉमस ने बीबीसी से कहा, कि "हमने क्लिनिक में इतना पैसा लगाया था, और वह यूं ही उठकर नहीं जा सकती थीं।"
निमिषा की मौत की सजा पर भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से यमनी राष्ट्रपति की तरफ से निमिषा का माफीनामा खारिज होने के बाद बयान आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, कि "हमें यमन में निमिषा प्रिया की सजा के बारे में जानकारी है। हम समझते हैं, कि प्रिया का परिवार प्रासंगिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। सरकार इस मामले में हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।"












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