Nikhil Gupta: खालिस्तानी पन्नून की हत्या की साजिश रचने के आरोपी निखिल गुप्ता का प्रत्यर्पण, भेजे गये अमेरिका
Nikhil Gupta: न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश रचने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित कर अमेरिका भेज दिया गया है।
52 साल के निखिल गुप्ता चेक गणराज्य में अमेरिका के कहने पर गिरफ्तार किया गया था और उनके वकीलों का दावा है, कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA की एक टीम ने चेक गणराज्य से उन्हें उस वक्त गिरफ्तार किया था, जब वो चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में एयरपोर्ट से फ्लाइट लेने वाले थे। निखिल गुप्ता के प्रत्यर्पण की खबर की पुष्टि अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ प्रिजन की वेबसाइट ने की है।

निखिल गुप्ता पर अमेरिकी फेडरल प्रॉसीक्यूटर ने एक भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर अमेरिकी धरती पर खालिस्तान समर्थक आतंकवादी को मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। वह जून 2023 में भारत से प्राग गये थे, जहां चेक अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले मई में यूरोपीय नेशन की एक अदालत ने अमेरिका प्रत्यर्पित नहीं करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद चेक रिपब्लिक के जस्टिस मिनिस्टर के लिए उन्हें प्रत्यर्पित करने की हरी झंडी देने का रास्ता साफ हो गया था।
निखिल गुप्ता को फिलहाल कहां रखा गया है?
फेडरल ब्यूरो ऑफ प्रिजन की वेबसाइट पर कैदियों को लेकर सर्च करने से पता चला है, कि निखिल गुप्ता को फिलहाल ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जो एक संघीय प्रशासनिक हिरासत केंद्र है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। निखिल गुप्ता के अमेरिका स्थित वकील जेफरी चैब्रोवे ने भी फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।
भारत-US डिप्लोमेटिक संबंध पर असर
अमेरिका और कनाडा, दोनों ही देशों में खालिस्तान समर्थकों को भारी समर्थन दिया जा रहा है और माना जा रहा है, भारत को अस्थिर रखने के लिए इन दोनों ही देशों की खुफिया एजेंसियां आतंकवादियों को पनाह देती है। पिछले साल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जून महीने में भारत में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद वापस लौटने के बाद कनाडाई संसद में भारत सरकार पर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था, जिसने भारत और कनाडा संबंध को काफी खराब कर दिया है।
वहीं, बाद में अमेरिका ने भी गुरपतवंत सिंह पन्नून, जो सिख फॉर जस्टिस (SFI) का प्रमुख है, उसकी हत्या की साजिश रचने के लिए भारत सरकार के एक अधिकारी पर आरोप लगाए और कहा, कि भारत सरकार के अधिकारी ने चेक गणराज्य में मौजूद निखिल गुप्ता को पन्नून की हत्या करने के लिए कहा था। और निखिल गुप्ता ने पन्नून की हत्या के लिए न्यूयॉर्क के एक एजेंट को एक लाख डॉलर की सुपारी दी थी, लेकिन वो एजेंट सीआईए का अंडरकवर एजेंट था।
हालांकि, शुरू से ही भारत सरकार ने इस साजिशों में शामिल होने से इनकार किया है।
जबकि, इस महीने की शुरुआत में, पन्नू ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, कि "निखिल गुप्ता सिर्फ एक पैदल सैनिक है।"
आरोप लगने के फौरन बाद, भारत सरकार ने पन्नू के खिलाफ साजिश से खुद को अलग कर लिया और कहा, कि ऐसी साजिशें सरकार की नीति के खिलाफ हैं। भारत ने यह भी कहा, कि अमेरिका ने जो चिंताएं जताई हैं, भारत औपचारिक तौर पर उनकी जांच करेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका लगातार इस मामले को लेकर भारत पर दबाव बना रहा है। खालिस्तान मामले का असर दोनों देशों की संबंधों पर भी काफी हद तक पड़ा है और पिछले साल जून महीने तक जहां दोनों देशों के उच्च अधिकारियों के बीच लगातार बैठकें हो रही थीं, वो कम हो गई हैं।
पिछले महीने भी वाशिंगटन ने इस बात पर जोर दिया, कि वह कथित साजिशों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भारत के कदमों से संतुष्ट है, लेकिन उसने यह भी कहा, कि अभी भी कई कदम उठाए जाने की जरूरत है।












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