Earthquake: तुर्की की तबाही के बाद अगला भूकंप कब और कहां आएगा ? वैज्ञानिकों ने नया मॉडल बनाया

अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भूकंप का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक नया मॉडल विकसित किया है। इसकी सहायता से यह पता लग सकता है कि अगल भूकंप कब और कहां आ सकता है।

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भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना अभी तक विज्ञान के लिए भी मुश्किल रहा है। यही वजह है कि इस प्राकृतिक आपदा में हताहतों की संख्या कम नहीं हो पा रही है। जबकि, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की समय-पूर्व और सटीक भविष्यवाणी होने की वजह से जानमाल की हानि को काफी हद तक कम किया जाने लगा है। लेकिन, राहत की बात ये है कि तुर्की-सीरिया में आए भूकंप के बाद अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसके आधार पर दावा किया गया है कि अगला भूकंप कब और कहां होगा, इसका ज्यादा सटीक और वैज्ञानिक अनुमान लगाना संभव हो सकता है।

भूकंप की भविष्यवाणी वाला नया वैज्ञानिक मॉडल विकसित

भूकंप की भविष्यवाणी वाला नया वैज्ञानिक मॉडल विकसित

अल-जजीरा की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की और सीरिया में पिछले हफ्ते आए विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या 37,000 को पार कर चुकी है। 7.7 और 7.6 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप ने दोनों देशों के कई इलाकों को खंडहर में तब्दील कर दिया है। दोनों देशों का हाल देखने के बाद दुनिया भर में यह चिंता बढ़ गई है कि अगला नंबर किसका आएगा। भूकंप की भविष्यवाणी हमेशा से लगभग नामुमकिन रही है। लेकिन, Expat Guide Turkey की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भूकंप का पूर्वानुमान लगाने वाले एक नया मॉडल विकसित किया है।

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को मिली सफलता

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को मिली सफलता

इस मॉडल को विकसित करने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक नया मॉडल पुराने तरीकों के मुकाबले ज्यादा सटीक अनुमान लगा सकता है कि अगला बड़ा भूकंप कब और कहां आ सकता है। इस विधि में अतीत में आए भूकंपों के क्रम और समय को भी ध्यान में रखा जाता है, न कि सिर्फ पहले आ चुके भूकंपों के औसत समय पर विचार किया जाता है। भूकंप का पूर्वानुमान लगाने का यह नया मॉडल अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञानियों और सांख्यिकीविदों की टीम ने तैयार किया है। यह विधि ये भी बताता है कि भूकंप के क्लस्टर में आने की संभावना क्यों रहती है।

पहले की विधियों से ज्यादा सटीक अनुमान का दावा

पहले की विधियों से ज्यादा सटीक अनुमान का दावा

वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के नीचे जो फॉल्ट मौजूद हैं उनकी 'लॉन्ग-टर्म मेमोरी' होती है। मतलब फॉल्ट लाइन की वजह से जमीन के अंदर जो ऊर्जा जमा होती है या तनाव बनता है, वह एक भूकंप से बाहर नहीं निकल पाता। जो भी तनाव या खिंचाव बचा रह जाता है, वह एक भयानक भूकंप के बाद अन्य भूकंप लगा सकता है। पहले यह माना जाता था कि फॉल्ट पर बड़े भूकंप अपेक्षाकृत निरंतर होते हैं और अगला भूकंप भी पहले दू भूकंपों के समय पर ही आएगा। लेकिन, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप उम्मीद से पहले या बाद में भी आ सकता है और उन्होंने जो मॉडल विकसित किया है, वह पहले के विधियों से ज्यादा सटीक अनुमान जाहिर कर सकता है।

किस आधार पर तैयार किया नया मॉडल ?

किस आधार पर तैयार किया नया मॉडल ?

पृथ्वी और ग्रह विज्ञान के प्रोफेसर सेथ स्टीन ने कहा, 'पिछले भूकंप के औसत या अंतिम वाले के बाद बीते समय पर ध्यान देने के बजाए भूकंपों के पूरे इतिहास पर विचार करना यह भविष्यवाणी करने में बहुत मददगार होगा कि भविष्य में भूकंप कब आएंगे, उदाहरण के लिए एक टीम कब खेलेगी।' उनके मुताबिक यह समझने की कोशिश हो रही है कि कैसे उसके पास जीतने का मौका है। वे बोले, 'आप सिर्फ उनका आखिरी खेल और उनके लंबे समय का औसत मत देखिए। उनके हालिया मैंचों पर भी गौर फरमाइए। अब हम भूकंप के लिए भी ऐसा ही कर सकते हैं।'

शोध में इन वैज्ञानिक विधियों का भी लिया गया सहारा

शोध में इन वैज्ञानिक विधियों का भी लिया गया सहारा

दूसरी तरफ शोधकर्ताओं की टीम ने प्लेट बाउंडरी प्रॉसेस और स्थलमंडल (lithosphere) के अंदर की विकृति की जांच पर भी फोकस किया है। इसके लिए कई तरह की तकनीक शामिल किए गए हैं, जैसे कि भूकंप विज्ञान (seismology),समुद्री भूभौतिकी (marine geophysics) और अंतरिक्ष आधारित भूगणित (geodesy)। (geodesy ऐसा विज्ञान है जो ज्यामिति, गुरुत्वाकर्षण और स्थानिक दिशा (spatial orientation) को मापता है)

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    भविष्य में भूकंप की भविष्यवाणी में मदद की उम्मीद

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    इस स्टडी के को-ऑथर जेम्स एस नीली पहले ही कह चुके हैं, 'बड़े भूकंप हर घंटे नहीं होते। कई बार हम देखते हैं कुछ बड़े भूकंप अपेक्षाकृत कम अंतराल पर होते हैं और फिर वर्षों तक कुछ नहीं होता। पारंपरिक मॉडल फॉल्ट लाइन पर इसका हिसाब नहीं रख पाते।' लेकिन, नए मॉडल से वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भूकंप के पूर्वानुमान का पूरी परिदृश्य ही आने वाले दिनों में बदल सकता है।

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