50 सालों के बाद बंद हो रहा न्यूयॉर्क का भारतीय बुटिक स्टोर, दुकान और वफादार ग्राहकों की भावुक कहानी
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दुकानदार और उसके वफादार ग्राहकों की ये कहानी भावुक करने वाली है और अब सरोज गोयल अपने पति की याद को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
न्यूयॉर्क, जनवरी 11: न्यूयॉर्क की हृदयस्थली माने जाने वाले ईस्ट विलेज के केन्द्र में पिछले 50 सालों से चलने वाला भारतीय बुटिक की दुकान पर अब ताला लगने जा रहा है। दिन रात जागने वाले न्यूयॉर्क शहर में इस छोटी सी भारतीय दुकान के रंग को देखकर हर पैर कुछ पलों के लिए ठिठक जाते थे और न्यूयॉर्क के लोगों के लिए ये दुकान उनके दिल का एक हिस्सा बन गया था। लेकिन, अब ये बुटिक की दुकान बंद हो रही है और पचास सालों के बाद इस दुकान का शटर गिरने जा रहा है।

31 जनवरी को बंद हो रही है दुकान
न्यूयॉर्क टाइम्स में इस दुकान को लेकर खास रिपोर्ट छापी गई है और लिखा गया है कि, इस दुकान के अंदर चलने का मतलब है, मानो रंग और कपड़े के एम्पोरियम में चलना। इस दुकान की अलमारियां हाथ से कढ़ाई वाले कपड़े और साड़ियों से भरी हुई हैं और रैक भारतीय डिजाइन के कुर्ते और सलवार सूट के साथ कसकर भरे हुए हैं, और यहां तक कि छत भी जटिल टेपेस्ट्री में ढकी हुई है। लेकिन, ये सब अब सिर्फ 31 जनवरी तक ही दिखने वाला है और नये साल के पहले महीने के आखिरी दिन ये दुकान हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।

50 सालों के बाद दुकान पर ताला
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टर अन्ना पी. कंभमपति लिखती हैं कि, पचास सालों से ये दुकान न्यूयॉर्क के ईस्ट विलेज मार्केट की एक अलग पहचान बना हुआ है और उनके लिए ये दुकान बेहद मायने रखता है। वो बताती हैं कि, जब भी वो इस दुकान में आईं, उन्हें गहरा प्यार मिला और उन्हें हमेशा नई कहानियां इस दुकान से मिलीं। उन्हें इस दुकान में बड़े प्यार से चाय पिलाया जाता था और उनके लिए ये दुकान ऐसा लगता है, मानो न्यूयॉर्क जैसे व्यस्त शहर में एक अभयारण्य हो। वहीं, एक कस्टमर कहते हैं, कि इस शहर में इस भारतीय बुटिक की दुकान के होने का मतलब है, मानो न्यूयॉर्क शहर की रगों में जिंदगी का खून अब भी बह रहा है।

दुकान को बनाने खर्च हो गये कई साल
दुकान चलाने वाली 72 साल की हो चुकी सरोज गोयल बताती हैं, न्यूयॉर्क के लोगों के दिल में जो खूबसूरती बसी हुई है, उसे संवारने में सालों खर्च हो गये हैं। इस दुकान की हर साड़ी में स्पेशल डिजाइन हाथों से किए गये हैं, हर दुपट्टे में स्पेशल कारीगरी है और उन्हें करीब सौ साल पुराने चांदी के धागों से बुना गया है। वहीं, प्राचीन रेडियो, कैमरे और बच्चों के खिलौनों के लिए दुकान में एक अलग कमरा है।

पति के साथ खोला था दुकान
सरोज गोयल ने अपने पति पुरुषोत्तम गोयल के साथ मिलकर न्यूयॉर्क में दुकान खोलने का विचार किया है और फिर दिल्ली से न्यूयॉर्क चले गये। साल 1977 में उन्होंने न्यूयॉर्क हर में अपना बुटीक का दुकान खोला, जिसमें भारतीय परंपरा का बसाव था। मैनहट्टन में स्थिति सरोज गोयल की ये दुकान जल्द ही दक्षिण एशिया का एक टुकड़ा बन गई। दशकों तक, गोयल दंपति ने भारत और न्यूयॉर्क की यात्रा की और दुकान में कलेक्शन बढ़या और भारत की उन अनूठी परंपराओं को अपने दुकान में बसाया, जो अमेरिका के लोगों के लिए पूरी तरह से मनमोहक था। सरोज गोयल बताती हैं, कि ''मेरे पति इन सभी चीजों को लेने के लिए गांव-गांव चले। उनका स्वाद बहुत ही अनोखा था''।

2019 में पति का हो गया निधन
सितंबर 2019 में सरोज गोयल के पति पुरुषोत्तम गोयल की मृत्यु हो गई और उनके जीवन में आया ये एक ऐसा तूफान था, जो आज भी सरोज गोयल को हर दिन पीड़ा देता है। स्टोर में अब उनके जीवन के कई स्मृति चिन्ह हैं। आंखों में आंसू लिए अपने पति का निशानियों को दिखाती हुई सरोज गोयल न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टर से बताती हैं, कि ''मेरे पति ने मुझे इस कमरे में बहुत हंसाया। पूरे दिन हर दिन, हम इस दुकान में 50 साल तक साथ रहे''। सरोज गोयल के पति पुरुषोत्तम गोयल की तस्वीर दुकान की दीवार पर लटकी हुई है और चेकआउट काउंटर पर ग्राहकों से हस्तलिखित श्रद्धांजलि से भरी एक पुस्तक है।

पुरुषोत्तम गोयल ने बसाई थी दुकान
न्यूयॉर्क जैसे शहर में दुकान को स्थायित्व देना आसान काम नहीं है और यही बातें उन्हें याद करते हुए लोगों ने भी लिखी है। एक व्यक्ति ने लिखा है, ''उनके निधन से दुनिया थोड़ी कम अच्छी है।" दूसरा व्यक्ति ने लिखा है "आपकी उपस्थिति शारीरिक रूप से छूट गई है, लेकिन आपकी आत्मा इस जगह के चारों ओर है।" खैर, पति का साथ तो छूट गया, लेकिन अब अकेले अपने कंधे पर इस दुकान को चलाना सरोज गोयल के लिए काफी मुश्किल होता चला गया और सरोज गोयल के सामने सबसे बड़ा सवाल ये आ गया, कि स्टोर को कैसे चालू रखा जाए? क्योंकि, दुकान की तमाम बाहरी जिम्मेदारियों को पति ने संभाल रखा था और उनके जाते ही मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले साल सरोज गोयल ने जिस मकान में उनका स्टोर है, उसके मालिक को दुकान के किराए पर बात करने के लिए बुलाया, लेकिन वो नहीं आया।

एक साथ मांगा गया है किराया
सरोज गोयल का स्टोर जिस बिल्डिंग में है, उसमें कई दुकाने है और उसका मालिक एक हाउसिंग सोसाइटी कूपर स्क्वायर है और फरवरी 2020 में उसका कोई प्रतिनिधि सरोज गोयल से मिलने नहीं आया, लेकिन अब उसका एक अघोषित प्रतिनिधि दुकान पर आ गया और सभी बचे हुए किराए की एकमुश्त भुगतान की मांग की है। सरोज गोयल का कहना है कि, एक तो उनके पति चले गये और दुकान पर गहरा असर पड़ गया, दूसरी तरफ कोरोना महामारी ने तो हर चीज चौपट कर दिया है, ऐसे में दुकान में पिछले कई महीनों से कुछ भी बिक्री नहीं हुई है और किराया देना उनके लिए नामुमकिन हो गया है। सरोज गोयल बताती हैं, कि पिछले साल फरवरी में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हो गया और फिर चार महीने बाद कूपर स्क्वायर ने उनके ऊपर 2 लाख 65 हजार डॉलर से ज्यादा का मुकदमा कर दिया है।

कूपर स्क्वायर ने क्या कहा?
कूपर स्क्वायर का कहना है कि, गोयल स्टोर की ये स्थिति देखकर उसे भी काफी दुख है और उसे काफी दुख है कि दुकान को बंद करने की नौबत आ गई है, लेकिन उन्हें भी कॉरपोरेटिव सोसाइटी की वित्तीय स्थिति को संभालना है''। कूपर स्क्वायर ने कहा कि, गोयल स्टोर उसके सबसे ज्यादा कीमती जगह पर है और दुकान काफी क्षेत्र में है, लिहाजा रियायत बरतना संभन नहीं है''। कूपर स्क्वायर से मदद नहीं मिलने के बाद गोयल स्टोर की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी और इसी बीच @newyorknico नाम के एक ग्राहक ने गोयल स्टोरी की कहानी को इंस्टाग्राम पर शेयर किया और उन्होंने लोंगो से मदद की अपील की और फिर इंस्टाग्राम पर सरोज गोयल के लिए समर्थन बढ़ता चला गया और कई लोगों ने इस्टाग्राम पर सरोज गोयल की मदद करने की अपील शुरू कर दी।

कूपर स्क्वायर के साथ हुआ समझौता
इंस्टाग्राम पर लोगों का भारी समर्थन मिलने के बाद कई लोग सरोज गोयल के समर्थन में आ गये और फिर जिस कूपर स्क्वायर ने उनके ऊपर 2 लाख 65 हजार डॉलर का मुकदना ठोंक रहा था, उसे लोगों ने मुकदमा वापस लेने और समझौता करने के लिए मजबूर कर दिया। और समझौते के तहत ये तय किया गया कि, 2 लाख 65 हजार डॉलर की जगह कूपर स्क्वायर को एक लाख 30 हजार डॉलर दिए जाएंगे और 31 जनवरी को दुकान बंद कर दिया जाएगा।

लोगों ने जुटाए 50 हजार डॉलर फंड
इसके साथ ही लोगों ने GoFundMe नाम से एक कैंपेन चलाई और 50 हजार डॉलर सरोज गोयल की मदद करने के लिए जुटा लिए। ये फंड देने वाले ज्यादातर वो लोग हैं, जो इस दुकान से कभी ना कभी खरीदारी कर चुके हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दुकानदार और उसके वफादार ग्राहकों की ये कहानी भावुक करने वाली है। अब सरोज गोयल का ध्यान 31 जनवरी तक दुकान का ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने की तरफ है। वहीं, कुछ लोगों की मदद से सरोज गोयल ने एक ऑनलाइन स्टोर बनाया है, ताकि वो अपने पति की याद को जिंदा रख सकें।
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