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Netanyahu Church Controversy: मस्जिदों के बाद नेतन्याहू के रडार पर चर्च? पदारियों की एंट्री बैन से घिरा इजरायल

Netanyahu Church Controversy: इजरायल ईरान युद्ध के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेनत्याहू पर ईसाई विरोधी होने के आरोप लग रहा हैं, और ये तब हो रहा है जब ईरान के खिलाफ युद्ध में उनकी मदद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं जो खुद एक ईसाई हैं। इस मामले के सामने आने के बाद नेतन्याहू स्थानीय और वैश्विक दोनों ईसाई समुदायों के निशाने पर चढ़ते दिख रही हैं। क्या है पूरा मामला, समझते हैं।

यरुशलम के लैटिन पैट्रिआर्क Pierbattista Pizzaballa और इतालवी पादरी Francesco Ilpo को रविवार के दिन Church of the Holy Sepulchre में एंट्री करने से इजरायली पुलिस ने रोक दिया। दोनों पाम संडे मास मनाने के लिए चर्च जा रहे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर वापस लौटना पड़ा। यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ

Netanyahu Church Controversy

दुनिया भर में हुई नेतन्याहू की लानत-मलानत

इस घटना की दुनिया भर के नेताओं ने कड़ी आलोचना की और इसे "धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन" बताया। यह सदियों में पहली बार बताया जा रहा है कि ईसाई धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक में पाम संडे मास नहीं हो सका। माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां Jesus Christ को सूली पर चढ़ाया गया था। इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

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विवाद बढ़ा तो नेतन्याहू ने लिया यू-टर्न

सोमवार (30 मार्च) को इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने घोषणा की कि कार्डिनल पिज़्ज़ाबल्ला को चर्च में पूरी तरह और जल्द से जल्द पहुंच दी जाएगी। यह फैसला तब आया जब पहले उन्हें अंदर जाने से रोका गया था।

तो फिर रोका क्यों गया था?

इजरायली पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया। उनका कहना था कि इसमें कोई गलत भावना नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, यरुशलम का पुराना शहर ऐसा इलाका है जहां बड़ी आपातकालीन गाड़ियों की आवाजाही मुश्किल होती है, खासकर किसी बड़ी घटना के दौरान। ऐसे में अगर ईरान का हमला हुआ तो मदद करना मुश्किल होगा।

ईरान से जंग के कारण लगी रोक

इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यरुशलम के कई पवित्र स्थलों को बंद कर दिया गया है। बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाई गई है और किसी भी सभा में अधिकतम 50 लोगों की सीमा तय की गई है।

पाम संडे जुलूस पहले ही रद्द

लैटिन पैट्रिआर्कट ने पाम संडे की पारंपरिक शोभायात्रा पहले ही रद्द कर दी थी। आमतौर पर इस जुलूस में दुनिया भर से हजारों लोग शामिल होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार सीमित संख्या में लोगों के साथ छोटे समारोह अन्य चर्चों में आयोजित किए गए।

पाम संडे का क्या महत्व?

पाम संडे से ईसाई धर्म का पवित्र सप्ताह यानी होली वीक शुरू होता है, जो ईस्टर पर खत्म होता है। यह दिन Jesus Christ के यरूशलेम में अंतिम प्रवेश की याद दिलाता है, जिसके कुछ दिन बाद गुड फ्राइडे और फिर ईस्टर मनाया जाता है। इस मामले पर लैटिन पैट्रिआर्कट ने कहा कि कार्डिनल और पादरी को किसी जुलूस का हिस्सा नहीं, बल्कि निजी तौर पर चर्च में जाने से रोका गया। बयान में इस फैसले को बहुत ही गलत और जल्दबाजी में लिया गया गलत फैसला बताया।

चर्च ने मांगी थी इजाजत

पैट्रिआर्कट के प्रवक्ता फरीद जुबरान ने बताया कि चर्च ने पहले ही छोटे निजी मास के लिए इजाजत मांगी थी। उनका कहना था कि युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसे निजी कार्यक्रम पहले भी होते रहे हैं।

नेतन्याहू का बयान

Benjamin Netanyahu ने कहा कि तेहरान ने यरुशलम के धार्मिक स्थलों को पहले भी निशाना बनाया है। उन्होंने दावा किया कि एक हमले में मिसाइल के टुकड़े चर्च के पास गिरे थे, इसलिए सुरक्षा चिंता बढ़ी हुई थी। इस वजह से हमें ऐसा फैसला लेना पड़ा।

सोशल मीडिया पर देनी पड़ी सफाई

नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा कि सुरक्षा कारणों से कार्डिनल को मास आयोजित करने से रोकने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों को तुरंत इजाजत देने के निर्देश दिए।

अमेरिकी राजदूत की प्रतिक्रिया

इज़राइल में अमेरिकी राजदूत Mike Huckabee ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया। उनका कहना था कि यह समूह 50 लोगों की सीमा से कम था, फिर भी उन्हें रोका गया।

भड़के जॉर्जिया मेलोनी और इमेनुएल मैक्रों

यूरोपीय संघ की राजनयिक Kaja Kallas ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि यरुशलम में सभी धर्मों के लोगों को बिना किसी बाधा के पूजा करने की आजादी मिलनी चाहिए। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इसे दुनियाभर के लोगों के खिलाफ अपराध बताया। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि यह पवित्र स्थलों की परंपराओं का उल्लंघन है। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया और धार्मिक अधिकारों के सम्मान की मांग की।

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दूसरी जगह हुई प्रार्थना

कार्डिनल पिज़्ज़ाबल्ला ने बाद में सेंट सेवियर मठ में मास आयोजित की। इसके बाद उन्होंने माउंट ऑफ ओलिव्स पर डोमिनस फ्लेविट श्राइन में शांति के लिए प्रार्थना भी की। अपनी प्रार्थना में पिज़्ज़ाबल्ला ने कहा कि इस बार पाम संडे बिना जुलूस और बिना परंपरागत उत्सव के मनाया गया। उन्होंने कहा, यरुशलम आज भी आशा और दुख दोनों का प्रतीक है। युद्ध कभी भी उम्मीद को खत्म नहीं कर सकता।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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