Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

BRI के जाल में छटपटाता नेपाल.. फिर भी बीजिंग जा रहे हैं प्रधानमंत्री प्रचंड, बीजिंग की बदतमीजी का देंगे जवाब?

Nepal-China News: नेपाल, जिसने पिछले कुछ सालों में चीन के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं, उसने साल 2017 में चीन के साथ BRI इनिशिएटिव पर साइन किए थे और वर्तमान में, चीन नेपाल का सबसे बड़ा ऋणदाता है। नई दिल्ली के बाद चीन, काठमांडू का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है।

बीजिंग ने नेपाल के साथ अपनी सक्रिय भागीदारी को बढ़ाया है, जैसा कि उसने भारत के अन्य दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ किया है, उसने बीआरआई के लॉन्च के बाद से मुख्य रूप से बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

nepal prime minister china visit

ऐसे समय में, जब काठमांडू, नेपाल के संविधान के नए चार्टर के संबंध में नई दिल्ली की चिंताओं के कारण नई दिल्ली से आर्थिक नाकेबंदी का सामना कर रहा था, जिस पर नेपाल ने कोई ध्यान नहीं दिया, उस वक्त बीजिंग 2016 की सीमा-पार पारगमन संधि के माध्यम से एक 'उदार' मित्र के रूप में उभरा। भूमि से घिरे हिमालयी राष्ट्र को तीसरे देश के व्यापार के लिए, चीनी क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई।

और अब, नेपाल के नए प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल "प्रचंड" सितंबर के अंत में बीजिंग जाने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में प्रधानमत्री बनने के बाद प्रचंड का ये दूसरा विदेशी दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने जून महीने में अपना पहला डिप्लोमेटिक दौरा भारत का किया था।

BRI के जाल में फंस चुका है नेपाल

जैसा की चीन के साथ समझौता करने वाले ज्यादातर देशों के साथ हुआ, नेपाल भी शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी बीआरआई के जाल में फंस गया है और अब बीआरआई के जाल में छटपटा रहा है।

काठमांडू शुरू में बीआरआई के तहत 35 परियोजनाओं पर सहमत हुआ था, लेकिन 2019 में, काठमांडू के अनुरोध पर, परियोजनाओं की संख्या घटाकर नौ कर दी गई। नौ परियोजनाओं को सूचीबद्ध करते समय, नेपाल ने यह स्पष्ट कर दिया, कि वह कम पुनर्भुगतान समयसीमा वाले उच्च-ब्याज वाले ऋणों के बजाय बीआरआई के तहत अनुदान या आसान ऋण को प्राथमिकता देगा।

हालांकि, 2017 के बाद से, कई समझौतों पर पहुंचने के बावजूद बीआरआई के तहत किसी भी परियोजना का नेपाल में कार्यान्वयन नहीं हुआ है।

इन परियोजनाओं के तहत, नेपाल ने चीन के साथ "रेलवे कनेक्टिविटी के लिए सहयोग" पर 2018 में समझौता ज्ञापन साइन किया था, जिसके तहत दक्षिणी तिब्बत को काठमांडू और केरुंग को जोड़ने वाली 170 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछानी थी।

ऐसी ही दूसरी बड़ी परियोजना, ट्रांस हिमालयन मल्टीडायमेंशनल कनेक्टिविटी इकोनॉमिक कॉरिडोर है। चीन ने 2022 में 118 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान देने का वादा किया।

2019 में, दोनों देशों ने व्यवहार्यता अध्ययन पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो सीमा पार रेलवे चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा, लेकिन ये भी शुरू नहीं हुआ। बीआरआई के तहत काठमांडू द्वारा प्रस्तावित एकमात्र परियोजना 2019 में मदन भंडारी विश्वविद्यालय का विकास है।

हालांकि, इस साल मई में दोनों देशों के बीच बीआरआई समझौते को दूसरी बार नवीनीकृत किए जाने के बावजूद, किसी ने भी इसका कार्यान्वयन नहीं देखा। 2022 में, दोनों देशों ने नेपाल की भागीदारी बढ़ाने और शासन, विधायिका और पर्यवेक्षी प्रथाओं पर जानकारी के आदान-प्रदान के लिए छह सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए।

nepal prime minister china visit

प्रचंड पर दबाव बनाने की चीन की कोशिश

पुष्प कमल दहल प्रचंड के प्रधान मंत्री पद संभालने के एक दिन बाद, चीन से छह सदस्यीय टेक्निकल टीम, व्यवहार्यता अध्ययन करने के लिए काठमांडू पहुंची थी, जिसमें चीन ने वित्तपोषण की लागत वहन करने पर सहमति व्यक्त की। हालांकि, दोनों देशों ने अभी तक रेलवे निर्माण के वित्तपोषण के तरीके पर फैसला नहीं लिया है।

इस साल के अंत में, हाल ही में उद्घाटन किया गया पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर चीन ने एकतरफा दावा किया, कि इसका निर्माण बीआरआई के तहत किया गया है, जिसकी वजह से काठमांडू मं विवाद और भ्रम दोनों पैदा हुआ।

नेपाल के विदेश मंत्री एनपी सऊद ने स्पष्ट किया, कि बीआरआई के तहत परियोजना कार्यान्वयन अभी भी विचाराधीन है, और अभी तक एक भी परियोजना लागू नहीं की गई है। यह हवाई अड्डा नेपाल के BRI पर हस्ताक्षरकर्ता बनने से एक साल पहले, 2016 में चीन के EXIM बैंक द्वारा प्रदान किए गए 215 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सॉफ्ट लोन पर आधारित है।

इसी तरह, जून महीने में, नेपाल में चीनी राजदूत चेन सॉन्ग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, कि वीचैट पे क्रॉस-बॉर्डर भुगतान सेवा का उद्घाटन, वित्तीय कनेक्टिविटी और सीमा पार के पांच पहलुओं में से, एक की दिशा में एक नया कदम होगा। काठमांडू द्वारा बार-बार दोहराए जाने के बावजूद, कि अभी तक किसी भी परियोजना का कार्यान्वयन नहीं हुआ है, चीन ने इसे भी बीआरआई से लिंक करने की कोशिश की।

कुल मिलाकर.. स्थिति ये है कि बार बार प्रोजेक्ट्स को बीआरआई का बताकर, चीन नेपाल की सरकार पर प्रेशर बना रहा है, जबकि नेपाल का कहना है, कि बीआरआई प्रोजेक्ट सिर्फ और सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर ही है।

इसके साथ ही, नेपाल या तो सॉफ्ट लोन पसंद करता है, या फिर अनुदान हासिल करना चाहता है और कॉमर्शियल लोन से बचता रहता है, वहीं, नेपाल के एक्सपर्ट्स का बार बार कहना होता है, जब लोन देने के लिए वर्ल्ड बैंक और एशियाई डेवलपमेंटल बैंक हैं, तो फिर चीन से कर्ज लेने की क्या जरूरत है।

गड्ढ़े में गिरने से बचेगा नेपाल?

नेपाल ने घोषणा की है, कि बीआरआई परियोजनाएं, स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धी बोली के लिए खुली होंगी, जो बीआरआई के बहाने क्षेत्र में बीजिंग के गलत इरादों और दुस्साहस पर काठमांडू के संदेह और सावधानी को दर्शाता है।

बीआरआई के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर चीन ने अभी भी नेपाल के सामने कर्ज देने की शर्तों और प्रोजेक्ट डिटेल्स को लेकर अस्पष्टता बनाए रखी है।

नेपाल की सावधानी चीन के साथ उसके बढ़ते व्यापार घाटे के कारण भी है। पिछले वित्तीय वर्ष के अनुसार, चीन से आयात घटकर अब 1.84 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि निर्यात भी गिरकर 5.39 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें नेपाल के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बीजिंग का योगदान 14 प्रतिशत था। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में बीजिंग के साथ व्यापार घाटा 145.26 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया।

नए नेपाली प्रधान मंत्री ने व्यापार घाटे को कम करने के लिए, बीजिंग से चीनी बाजारों तक "आसान और अधिक उदार" पहुंच बनाने के लिए कहा। उन्होंने आगे कहा, कि "चीन से एफडीआई की प्रतिबद्धता और वास्तविक निवेश में स्पष्ट अंतर" के लिए व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता है।

भारत के खिलाफ नेपाल को भड़काता चीन

नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद से चीन ने काठमांडू की राजनीति में अपनी सक्रियता काफी ज्यादा बढ़ा दी है। सरकार-से-सरकार और पार्टी-दर-पार्टी स्तर के संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से, चीन के अधिकारियों ने नेपाल की कई उच्च-स्तरीय यात्राएं की हैं।

बीजिंग ने सितंबर में प्रचंड की आगामी बीजिंग यात्रा के लिए एजेंडा तय करने के इरादे से, मुख्य रूप से भारत के साथ काठमांडू के बढ़ते संबंधों के बारे में नई चिंताएं व्यक्त कीं हैं।

नेपाली विदेश मंत्री सऊद ने काठमांडू की विदेश नीति को स्पष्ट किया - कि सरकार "मित्र देशों, विशेष रूप से पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है" लेकिन, चीन लगातार नेपाल को भारत के खिलाफ भड़का रहा है, जिसमें पिछले दिनों नेपाल में चीनी राजदूत का वो बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कहा था, कि "भारत जैसा पड़ोसी होना नेपाल का दुर्भाग्य है।"

लिहाजा, अब देखना दिलचस्प होगा, कि नेपाल, चीन के बीआरआई के जाल से निकलने की कोशिश करता है, या उसमें और फंसता चला जाता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+