Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Nepal: Gen-Z आंदोलन के पोस्टर बॉय बालेन शाह को अंतरिम पीएम की कुर्सी क्यों नहीं मिली? बड़ी वजहें जानिए

Nepal PM Race Balen Shah: नेपाल की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारी विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा और सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

लेकिन इससे पहले काठमांडू के मेयर बालेन शाह को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था। उन्हें Gen-Z आंदोलन का चेहरा बताया गया और युवा वर्ग का व्यापक समर्थन भी मिला। इसके बावजूद शाह इस दौड़ में पिछड़ गए और अंततः सुशीला कार्की को समर्थन देना पड़ा। इस रिपोर्ट में हम समझेंगे वे प्रमुख कारण, जिनकी वजह से बालेन शाह प्रधानमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए।

Nepal PM race Balen Shah

राजनीतिक अनुभव की कमी

सबसे बड़ी वजह राजनीतिक अनुभव की कमी मानी जा रही है। नेपाल की राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए केवल लोकप्रियता काफी नहीं होती। वहाँ के राजनीतिक दल और वरिष्ठ नेता, जो दशकों से सत्ता के गलियारों में रहे हैं, एक ऐसे व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने में हिचकिचाते हैं जिसके पास संसदीय कामकाज, कूटनीति और जटिल सरकारी प्रक्रियाओं का सीधा अनुभव न हो। Gen-Z आंदोलन के नेता ने भले ही युवाओं को एक साथ लाने और सड़कों पर आंदोलन करने में सफलता हासिल की हो, लेकिन सरकार चलाने और राजनीतिक गठबंधन बनाने के लिए आवश्यक कौशल उनके पास नहीं थे।

हिंसक प्रदर्शन के लिए भड़काने का आरोप

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और मौजूदा सत्ता पक्ष ने बालेन शाह(Balen Shah) पर हिंसक प्रदर्शनों को भड़काने और जनाक्रोश को हवा देने का गंभीर आरोप लगाया। इन आरोपों के बाद उनकी विश्वसनीयता को गहरा झटका लगा और उन्हें एक जिम्मेदार व परिपक्व नेता के बजाय भीड़ को उकसाने वाले चेहरे के तौर पर प्रस्तुत किया जाने लगा।

राजनीतिक सहमति का अभाव

बालेन शाह की लोकप्रियता मुख्य रूप से युवा वर्ग और Gen-Z आंदोलन तक सीमित रही। काठमांडू के मेयर के रूप में उन्होंने अलग पहचान बनाई, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में उन्हें अभी भी उभरते और प्रयोगात्मक चेहरे के रूप में देखा जाता है। नेपाल की राजनीति पर पारंपरिक और स्थापित दलों, जैसे नेपाली कांग्रेस और CPN (UML)-का गहरा वर्चस्व है। इन दलों के अपने हित और गठजोड़ हैं, और वे किसी बाहरी, चुनौतीपूर्ण चेहरे को सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं। Gen-Z आंदोलन के नेताओं की लगातार आलोचना ने इन दलों के बीच अविश्वास और बढ़ा दिया। नतीजतन, अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए राजनीतिक सहमति सुशीला कार्की जैसी संतुलित और व्यापक रूप से स्वीकार्य शख्सियत पर बनी, जबकि बालेन शाह इस दौड़ में पीछे रह गए।

ये भी पढे़ं: Balen Shah Love Story: GenZ के 'मसीहा’ रैपर बालेन शाह की पत्नी कौन? क्या कोई मॉडल? कैसे परवान चढ़ा इश्क?

बालेन शाह की एंटी-इंडिया छवि और नेपाल के लिए संभावित जोखिम

बालेन शाह (Balen Shah) की एंटी-इंडिया छवि और उनके भाषणों में अक्सर भारत समेत पड़ोसी देशों के खिलाफ तीखी टिप्पणियाँ उनके राजनीतिक नुकसान का एक बड़ा कारण हैं। नेपाल एक विकासशील देश है और कई जरूरी संसाधनों, आर्थिक सहायता और सुरक्षा मामलों में भारत सहित अन्य देशों पर निर्भर है। अगर बालेन शाह के हाथ में सत्ता आती, तो इन देशों के साथ संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है, जिससे नेपाल को गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सेना और अन्य परंपरागत राजनीतिक ताकतें इस संभावना को लेकर सतर्क हैं और उन्होंने सुशीला कार्की को अधिक संतुलित और भरोसेमंद विकल्प माना।

एकजुटता और रणनीति का अभाव

Gen-Z आंदोलन के पास एक स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा था, लेकिन सरकार बनाने और चलाने के लिए आवश्यक ठोस राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता की कमी थी। आंदोलन के सदस्य युवा और आदर्शवादी थे, लेकिन उनके बीच अलग-अलग विचार और प्राथमिकताएं थीं। एक अंतरिम प्रधानमंत्री को सभी पक्षों को साथ लेकर चलना पड़ता है, और इसके लिए एक मजबूत, संगठित राजनीतिक संगठन की आवश्यकता होती है। Gen-Z आंदोलन इस स्तर की संगठनात्मक मजबूती नहीं दिखा पाया।

ये भी पढ़ें: कौन हैं वो 5 'Nepo Kids'? जिनकी लग्जरी लाइफ देख कर Gen Z ने नेपाल में कर दिया तख्तापलट

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+