नेपाल के उच्च सदन से भी पास हुआ भारत के क्षेत्रों को अपना बताने वाला विवादित नक्शा, एक भी वोट नहीं पड़ा खिलाफ

नई दिल्ली। भारत की कुछ जमीन को अपने देश में दिखाने वाला नेपाल का विवादित नक्शा वहां की संसद के उच्च सदन से भी पास हो गया है। गुरुवार को सर्मवसम्मति से नेपाल की संसद के उच्‍च सदन ने नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। सभी पार्टियों ने एकमत से नक्शे के पक्ष में वोट किया। वोटिंग के दौरान सभी 57 वोट पक्ष में पड़े, खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा। नेपाल की प्रतिनिधि सभा पहले ही नक्शे को पास कर चुकी है।

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    भारत ने हमारे क्षेत्र पर कब्जा किया है

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    नेपाल ने इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर के भारतीय इलाके को अपना बताया है। कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री शिवमाया थुम्भांगफे ने देश के नक्शे में बदलाव के लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए इसे पेश किया था। जिसे उच्च सदन ने पास कर दिया। ससंद में सत्‍ताधारी नेपाल कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी के संसदीय दल के नेता दीनानाथ शर्मा ने कहा कि भारत ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर अवैध रूप से कब्‍जा क‍िया है और उसे नेपाली जमीन को लौटा देना चाहिए।

    प्रतिनिधि सभा से भी मिल चुकी है मंजूरी

    प्रतिनिधि सभा से भी मिल चुकी है मंजूरी

    नेपाल की संसद के उच्च सदन से पहले प्रतिनिधि सभा 13 जून को नए नक्शे को लेकर लाए गए संविधान संशोधन मंजूरी दे चुकी है। संशोधन को ससंद से मंजूरी मिलने के बाद नेपाल के नए इस नक्शे को संवैधानिक तौर पर वैधता मिल गई है। बता दें कि भारत की ओर से 8 मई को उत्तराखंड के लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था। इसको लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी और नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। जिसमें भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी शामिल किया गया है। जिसके बाद ये मामला बढ़ता ही जा रहा है और अब इस नक्शे को संसद से भी पास कर दिया गया है

    भारत ने जताई है आपत्ति

    भारत ने जताई है आपत्ति

    नेपाल के नए नक्शे को लेकर भारत ने नाखुशी जाहिर की है। 13 जून को जब नेपाली संसद की प्रतिनिधि सभी ने नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी थी तो भारत ने कहा था कि इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि जो बातें नेपाल कह रहा है, उनका कोई आधार नहीं है। ना ही इन दावों का कोई एतिहासिक साक्ष्य है।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था, नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने नेपाल के नक्शे को बदलने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक पारित किया है। इसमें भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया है। हमने इस मामले पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है। नेपाल के दावे ऐतिहासिक तथ्यों या सबूतों पर आधारित नहीं है और इनका कोई मतलब नहीं निकलता है। इसके साथ-साथ ये सीमा मुद्दे को लेकर हाल के समय में जो बातचीत दोनों देशों में हो रही थी, उसका भी उल्लंघन है।

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