अमेरिका से 21 सितंबर को चीन जाएंगे नेपाल के प्रधानमंत्री, जबरदस्ती कर्ज देने पर अड़ा है ड्रैगन, समझिए चाल
Nepal PM China Visit: नेपाल के प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड शनिवार को अमेरिका के लिए रवाना हो गए, जहां से वह चीन के लिए उड़ान भरेंगे। नेपाल के प्रधानमंत्री का चीन दौरा उस वक्त हो रहा है, जब अटकले हैं, कि अमेरिका ने नेपाल को 500 मिलियन डॉलर का अनुदान देने का फैसला किया है, जिससे बीजिंग काफी नाराज है।
बीजिंग को डर है, कि अमेरिका के अनुदानों की वजह से नेपाल कहीं उसके बीआरआई एग्रीमेंट पर साइन करने से इनकार ना कर दे। वहीं, अमेरिका में प्रधानमंत्री प्रचंड, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र में हिस्सा लेंगे। उनका 21 सितंबर को यूएनजीए को संबोधित करने का कार्यक्रम है।
न्यूयॉर्क में प्रचंड का यूएनजीए से इतर संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य शिखर सम्मेलन को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है।

चीन जाएंगे नेपाल के प्रधानमंत्री
दिल्ली की अपनी यात्रा के साढ़े चार महीने बाद पीएम प्रचंड 21 सितंबर को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बीजिंग जाएंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले प्रचंड भारत आए थे और अब चीन जा रहे हैं। हालांकि, दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले किए, जिससे बताता है, कि उनकी सरकार चीन की जगह भारत के साथ एक बार फिर से बेहतर संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन चीन नेपाल को किसी भी हाल में भारत के खेमे में फिर से जाने नहीं देना चाहता है।
नेपाल सरकार के मन में चीन के प्रति "विश्वास में कमी" का कारण मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन नेपाल कॉम्पैक्ट को बताया जा रहा है, जो बिजली और सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए अमेरिका से 500 मिलियन डॉलर का अनुदान है, जिसे पिछले 27 फरवरी को नेपाल संसद ने समर्थन दिया था।
चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए, नेपाली कांग्रेस ने इसका समर्थन किया था, जिसे संसद में नेपाली कांग्रेस का भी समर्थन मिला था।
एमसीसी नेपाल कॉम्पैक्ट ने पिछले महीने निष्पादन चरण में प्रवेश किया, जिसमें 315 किलोमीटर 400 केवी ट्रांसमिशन परियोजना को पूरा करने के लिए पांच साल का लक्ष्य रखा गया है।
एमसीसी का समर्थन एकमात्र ऐसा झटका नहीं है, जो चीन-नेपाल कूटनीति को हाल ही में झेलना पड़ा है। बल्कि, नेपाल ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत चीनी परियोजनाओं के प्रति स्पष्ट अनिच्छा दिखाई है। 6 साल पहले नेपाल ने चीन के साथ बीआरआई इनिशिएटिव पर साइन किए थे, लेकिन 6 सालों के बाद नेपाल ने बीआरआई के 19 प्रोजेक्ट्स में एक भी प्रोजेक्ट को शुरू नहीं किया है।
इसके पीछे, नेपाल के मन में श्रीलंका, पाकिस्तान और अफ्रीकी देशों की दुर्दशा का डर है।
प्रधानमंत्री प्रचंड साफ शब्दों में कह चुके हैं, कि वो भारी भरकम कर्ज नहीं लेंगे। इसकी जगह वो आसान ऋण लेने के साथ साथ प्रोजेक्ट्स के लिए अनुदान चाहेंगे, जबकि चीन चाहता है, कि नेपाल, उससे कर्ज लेकर प्रोजेक्ट शुरू करे।
वहीं, नेपाल के राजनीतिक एक्सपर्ट्स और अर्थव्यवस्था विशेषज्ञों का कहना है, कि जब वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलमेंटल बैंक से नेपाल को इतनी आसानी से ऋण मिल सकता है, तो फिर चीन से कर्ज लेने की क्या जरूरत है?

चीन को झटका दे सकता है नेपाल
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की हिमालय से गुजरने वाली और तिब्बत को नेपाल से जोड़ने वाली मेगा रेलवे परियोजना पिछड़ सकती है, क्योंकि नेपाल इस प्रोजेक्ट के लिए ऋण लेने से इनकार कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग दौरे के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मिलेंगे।
द संडे एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंडे को अंतिम रूप देने में शामिल एक वरिष्ठ राजनयिक ने बताया, कि "हमारी चुनौती चीन को यह समझाने में है, कि हम अपने पड़ोसियों के साथ अपनी दोस्ती के लिए प्रतिबद्ध हैं और एमसीसी केवल एक विकासात्मक परियोजना है, जिसका कोई रणनीतिक या सुरक्षा महत्व नहीं है।"
प्रधान मंत्री कार्यालय ने कहा कि नेपाल पोखरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के दौरान उधार लिए गए 215 मिलियन डॉलर के ऋण की माफी के अलावा दोनों पक्षों को जोड़ने वाली कुछ पनबिजली परियोजनाओं और सड़कों को विकसित करने में नेपाल, चीन की मदद मांगेगा, जो औपचारिक उद्घाटन के नौ महीने बाद भी निष्क्रिय है।
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