श्रीलंका को देखकर भी नहीं सुधरा नेपाल, चीन से लेगा विशालकाय कर्ज, नेपाली अर्थशास्त्री ने दी चेतावनी
चीन के विदेश मंत्री आज शाम नेपाल के तीन दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं, जहां नेपाल और चीन के बीच बीआरआई प्रोजेक्ट पर अहम समझौते होने वाले हैं, जिसकें नेपाल को चीन भारी संख्या में लोन देगा।
काठमांडू, मार्च 25: चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत का दौरा खत्म करने के बाद नेपाल के दौरे पर जाने वाले हैं, जहां वो नेपाल को भारी संख्या में कर्ज देने का ऐलान करने वाले हैं, जिसको लेकर नेपाल के एक अर्थशास्त्री, जो श्रीलंका में नेपाल के राजदूत रह चुके हैं, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि, बीजिंग से कर्ज लेकर हिमालयी देश श्रीलंका बनने की तरफ कदम बढ़ा देगा।

नेपाल दौरे पर जाएंगे चीनी एफएम
चीन के विदेश मंत्री वांग यी की काठमांडू यात्रा से पहले नेपाल के एक अर्थशास्त्री ने कहा है कि, हिमालयी राष्ट्र को बीजिंग से कर्ज स्वीकार करते समय "बेहद सतर्क" होना चाहिए। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, चीनी विदेश मंत्री वांग यी आज शाम तीन बजे (स्थानीय समयानुसार) काठमांडू पहुंचेंगे। वांगी यी आज से शुरू हो रहे नेपाल की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान नेपाल के साथ 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई)' पर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। काठमांडू पोस्ट के अनुसार चीनी विदेश मंत्री की तैयारियों से परिचित अधिकारियों ने कहा कि, वांग यी की यात्रा के दौरान नेपाल को तकनीकी और आर्थिक सहायता से संबंधित 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।

नेपाली अर्थशास्त्री ने दी चेतावनी
नेपाल के बड़े अर्थशास्त्री बिश्वंभर प्यकुरयाल ने खबरूब को बताया कि, "अर्थव्यवस्था के मामले में नेपाल श्रीलंका के स्तर तक नहीं पहुंचा है"। उन्होंने कहा कि, आर्थिक रूप से सुरक्षित होने के लिए हमें विकास परियोजना शुरू करने के लिए ऋण मांगने से पहले दो बार सोचना चाहिए। श्रीलंका में नेपाली राजदूत के रूप में भी काम कर चुके प्यारेकुरयाल ने कहा कि, कई देशों ने बड़े पैमाने की परियोजनाओं को शुरू करने के लिए चीन का समर्थन लिया है। उन्होंने आगे श्रीलंका के बंदरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन समय बढ़ाने और ऋण पर ब्याज दरों को कम करने में कंजूस लगता है। प्यारेकुरयाल ने कहा कि, नेपाल चीन को अपना माल निर्यात नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि पिछले सात से आठ महीनों में चीन के साथ निर्यात वृद्धि नकारात्मक रही है। लिहाजा, नेपाल अगर कर्ज लेने के लिए हाथ बढ़ाता है, तो उसे सौ बार सोचने की जरूरत है।

चेतावनी मानेगी नेपाल सरकार?
नेपाल में इस वक्त कांग्रेस (नेपाली कांग्रेस) की सरकार है, जिसे वामपंथी पार्टियों का समर्थन हासिल है, जो चीन की गोदी में बैठने के लिए पिछले कई सालों से व्याकुल है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली तो चीन के आगे लेट ही गये थे थे, लिहाजा इस बात की उम्मीद ना के बराबर है, कि नेपाल, चीन से कर्ज नहीं लेगा। वहीं, अर्थशास्त्री बिश्वंभर प्यकुरयाल ने कहा कि, नेपाल को यथासंभव विदेशी सहायता ही लेनी चाहिए, वो भी पूरी तरह से सोचकर। उन्होंने कहा कि, हमें उन देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर करके विदेशी सहायता लाने में सक्षम होना चाहिए, जहां नेपाल की प्राथमिकता और विदेशी सहायता उपलब्ध है। पयाकुरयाल ने चीन द्वारा सीमा को अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने के कारण निर्यात बंद है, जिससे नेपाल को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा व्पाइंट्स को खोलने के मुद्दे से राजनीतिक रूप से निपटा जाना चाहिए। प्यकुरयाल ने कहा कि चीन की भी कुछ शर्तें हैं, लेकिन क्या वो शर्तें हमारे देश के हित में हैं, ये देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन को स्पष्ट रूप से समझना होगा कि नेपाल क्या चाहता है।

श्रीलंका से भी नहीं सुधरा नेपाल
हंबनटोटा बंदरगाह पर कब्जा चीन की ऋण-जाल कूटनीति का खतरनाक उदाहरण यह है कि, श्रीलंका उस चीनी ऋण पर भुगतान करने में असमर्थ हो गया जो उसने हंबनटोटा बंदरगाह विकास परियोजना के लिए लिया था और बाद में श्रीलंकाई हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन ने आधिपत्य जमा लिया। इसके साथ ही श्रीलंका ने चीन से विकास के नाम पर 5 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है और चीन ने कर्ज चुकाने में मोहलत देने से इनकार कर दिया है, जिससे श्रीलंका में भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है और श्रीलंका के लोग भारत भागकर आ रहे हैं।












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