यूरोप में प्राकृतिक गैस संकट गहराया, क्या रूस है ज़िम्मेदार?

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कुछ देशों को छोड़ कर समूचा यूरोप प्राकृतिक गैस के एक बड़े संकट से गुज़र रहा है. अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए यूरोपीय देश अक्षय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और सबसे अधिक प्राकृतिक गैस पर निर्भर करते हैं. और यह प्राकृतिक गैस का भंडारण अपने 10 साल के सबसे न्यूनतम स्तर पर है. आगे सर्दियों के दिन हैं और गैस की मांग निश्चित तौर पर और अधिक बढ़ने वाली है. लेकिन फिलहाल सप्लाई नहीं बढ़ने से वहां लगातार इसकी कीमतें बढ़ रही हैं.

यूरोप के देशों में गैस की लगातार बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए यूरोपीय कमीशन अपने सदस्य देशों के लिए उपायों की रूपरेखा तैयार कर रहा है. लेकिन इस दरम्यान रूस पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वो इस स्थिति का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहा है.

यूरोप में प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े स्पालयर्स में से एक ने रूस पर जानबूझकर आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया है. तो अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने हाल ही में इस बात पर चिंता जताई थी कि रूस ऊर्जा को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है.

व्लादिमीर पुतिन
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राजनीति से प्रेरित दावे हैंः व्लादिमीर पुतिन

इन सब के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस के बारे में झूठी अफ़वाहें फ़ैलाई जा रही हैं. उन्होंने कहा, "रूस पर इस तरह के दावे पूरी तरह से बकवास और राजनीति से प्रेरित हैं."

यूरोप के मौजूदा संकट पर पुतिन ने रूस के एनर्जी फोरम से कहा, "कड़ाके की ठंड के बाद यूरोपीय लोगों ने भंडारण सुविधाओं में पर्याप्त मात्रा में गैस स्टोर नहीं किया था."

उन्होंने कहा, "ऊर्जा बाज़ार को स्थिर बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक उपाय करना बेहद महत्वपूर्ण है."

हाल के दिनों में रूस पर गैस के संकट को बढ़ाने में योगदान देने का आरोप लगा है. ये कहा गया कि उसने आपूर्ति में कमी की है जिसके कारण गैस की कीमतें बढ़ी हैं.

पुतिन ने कहा कि "रूस के सबसे बड़े गैस सप्लायर गज़प्रॉम अपने मौजूदा अनुबंधों के तहत यूरोप को अपने अधिकतम स्तर पर गैस की आपूर्ति कर रहा है और मांग के अनुसार यह और अधिक गैस देने को तैयार है."

उन्होंने कहा, "हम सप्लाई उतनी बढ़ाएंगे जितना हमारे साथी हमसे कहेंगे. हम किसी को मना नहीं करेंगे."

कादरी सिम्सन
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यूरोपीय कमीशन क्या कर रहा है?

यूरोपीय ऊर्जा आयोग की प्रमुख कादरी सिम्सन कहती हैं कि ऊर्जा की बढ़ती वैश्विक कीमतें यूरोपीय संघ के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं.

वे कहती हैं, "हम महामारी से उबर कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने में लगे हैं, ऐसे में हमें कमज़ोर देशों और यूरोपीय कंपनियों को संरक्षण देना ज़रूरी है."

साथ ही वे बताती हैं कि इसके लिए यूरोपीय आयोग ईयू के देशों के हितों को देखते हुए प्राकृतिक गैस को संयुक्त रूप से ख़रीदने पर भी गौर करेगा.

हालांकि वे यह भी स्पष्ट करती हैं कि इस रणनीति के तहत भंडारण के लिए सामूहिक रूप से गैस की ख़रीदारी में यूरोपीय देशों की भागीदारी कोविड-19 के टीकों की ख़रीद की तरह ही स्वैच्छिक होंगी.

इस विचार के प्रस्ताव को उन सरकारों को भेजा गया है जो यूरोपीय संघ का अधिक हस्तक्षेप चाहते हैं, जैसे कि स्पेन.

नॉर्ड स्ट्रीम 2
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यूरोपकी स्थिति के पीछे क्या रूस है वजह?

तो यूरोप में प्रकृतिक गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के लिए रूस कितना ज़िम्मेदार है? आख़िर यूरोप में रूस से कितनी गैस आती है?

तो इसका जवाब है, लगभग 50 फ़ीसद. जी हां, यूरोप को लगभग 50 फ़ीसद प्राकृतिक गैस रूस से मिलता है. बाकी 50 फ़ीसद का अधिकांश हिस्सा नॉर्वे और अल्जीरिया से आता है. रूस से यूरोप तक कई पाइपलाइनों के ज़रिए ये गैस पहुंचता है- जैसे नॉर्ड स्ट्रीम, द यमल-यूरोप और द ब्रदरहुड.

इन पाइपलाइनों के ज़रिए रूस से आने वाले गैस को क्षेत्रीय भंडारण केंद्रों में इकट्ठा किया जाता है, जहां से उसे इस महाद्वीप के विभिन्न देशों को वितरित किया जाता है.

कोरोना महामारी के दौरान, यूरोप में गैस की मांग में कमी आई लिहाज़ा रूस में भी इसके निर्यात में गिरावट आ गई.

लेकिन बाद में गैस की मांग बढ़ने के बावजूद रूस से इसके सप्लाई में, ख़ासकर यूक्रेन और बेलारूस पाइपलाइन से होने वाली सप्लाई में, इस साल गिरावट जारी है.

प्राकृतिक गैस
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सप्लाई में कमी से पूरे यूरोप में गैस का स्टॉक ख़त्म हो गया और इसकी वजह से कीमतें लगातार बढ़ने लगीं.

यूरोप में गैस भंडारण फिलहाल अपनी क्षमता के 75 फ़ीसद स्तर पर है. जो कि गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर यूरोप के आंकड़ों के मुताबिक़ अपने 10 साल के सबसे न्यूनतम स्तर पर है.

हालांकि ब्रिटेन में गैस का भंडारण फिलहाल अपनी पूरी क्षमता पर है लेकिन यह अपनी ज़रूरत के केवल 5 फ़ीसद हिस्सा ही रूस से आयात करता है. यानी रूस पर इसकी निर्भरता अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में बहुत कम है.

यूरोप में रूस से सप्लाई में कमी की एक वजह यह भी है कि उसका अपना भंडारण भी इस वक़्त गिरा हुआ है.

द इकोनॉमिस्ट के इंटेलिजेंस यूनिट में यूरोप के विश्लेषक एडेलिन वैन हौटे कहते हैं, "फिलहाल रूस के घरेलू गैस बाज़ार में भी तंगी है. वहां गैस का उत्पादन अपने चरम पर है लेकिन वहां सर्दियां आ रही हैं तो वो एक हद तक ही गैस निर्यात कर सकता है."

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10 साल में आई सबसे बड़ी गिरावट की और भी वजहें

रूस से सप्लाई तो कम है ही लेकिन यूरोप में गैस भंडारण की स्थिति को प्रभावित करने वाले कई अन्य कारक भी मौजूद हैं. जैसे-

  • 2021 की शुरुआत में ठंड का अधिक पड़ना वहां के स्टॉक को घटाने का कारक रहा.
  • कीमतें बढ़ने लगीं तो व्यापारियों ने इसे बाद में बेचने के लिए ख़रीदना बंद कर दिया.
  • रखरखाव (मेंटेनन्स) जैसे मसलों की वजह से नॉर्वे से सीमित मात्रा में आपूर्ति.
  • पवन ऊर्जा जैसे अन्य स्रोतों में आई कमी.
  • दुनिया के अन्य हिस्से में गैस की बढ़ती मांग.

आख़िर गैस की मांग में इतना उछाल क्यों है?

कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनिया भर में उत्पादन या तो बंद पड़ा था या फिर धीमा हो गया था. लेकिन वैक्सीन के आने के बाद अर्थव्यवस्थाओं में एक बार फिर तेज़ी देखी जा रही है और इसकी वजह से कारखानों के उत्पादन बढ़ा है. लिहाज़ा उन्हें अधिक ऊर्जा की ज़रूरत है जो इसकी बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.

हाल के दशकों में एशिया और मध्यपूर्व के देशों में गैस की मांग तेज़ी बढ़ी है. इससे एलएनजी (लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस) के बाज़ार पर असर पड़ा है, जो कि पूरे यूरोप के आयात का लगभग एक चौथाई हिस्सा है.

यूरोप में जब एलएनजी की मांग बढ़ती है तो इसके सप्लायर अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए इसकी आपूर्ति एशिया की ओर मोड़ देते हैं.

इसके अलावा रूस अपने गैस निर्यात को चीन में भी विस्तार दे रहा है इसी के मद्देनज़र जून के महीने में उसने देश के सुदूर पूर्व में एक गैस संयंत्र (गैस प्रोसेसिंग प्लांट) का उद्घाटन किया जिसे कथित तौर पर दुनिया का सबसे बड़ा गैस संयंत्र बताया जा रहा है.

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