चीन से डरे NATO देश ने सुरक्षा के लिए भारत से लगाई मदद की गुहार, क्या अमेरिका से उठ गया भरोसा?
NATO Member Wants India's Help: चीन ने पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है और चीन से डरे कई देश सुरक्षा के लिए अलग अलग देशों की 'शरण' में जा रहे हैं। वहीं, अब एक नाटो सदस्य ने भारत से चीन के खिलाफ सुरक्षा की गुहार लगाई है।
NATO के एक छोटे बाल्टिक सदस्य देश, जिसका नाम एस्टोनिया है, और जिसकी आबादी सिर्फ दस लाख से कुछ ज्यादा है, उसने भारत जैसे IT पावरहाउस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, ताकि उसे चीन से सुरक्षा मिल सके।

एस्टोनिया लगातार चीनी हैकर्स के निशाने पर रहा है और हैकिंग की समस्या का मुकाबला करने के लिए उसने भारत से मदद मांगी है। और रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और एस्टोनिया चीन से साइबर खतरों का मुकाबला करने के लिए एकजुट हुए हैं और साइबर सुरक्षा के लिए नजदीकी संबंध बनाने पर सहमत हुए हैं।
इस साल, एस्टोनिया की राजधानी टालिन ने NATO के सबसे बड़े साइबर सिक्योरिटी एक्सरसाइज'लॉक्ड शील्ड्स' की मेज़बानी की है, जो एक डिजिटल युद्ध का मैदान है, जहां युद्धग्रस्त यूक्रेन सहित 40 से ज़्यादा देशों के प्रतिभागी अपनी रक्षात्मक रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए जुटे थे।
जिसमें पहली बार एक भारतीय दल ने हिस्सा लिया और यह एक ऐसा कदम है, जो लगातार विकसित हो रहे साइबर खतरों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है। लॉक्ड शील्ड्स का कॉर्डिनेशन एस्टोनिया स्थित नाटो कोऑपरेटिव साइबर डिफेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस करता है।
चीनी साइबर हमलों से परेशान है एस्टोनिया
एस्टोनिया, एक ऐसा देश है, जो बार बार साइबर हमलों का सामना करता है, और उसने अब चीनी हैकरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। देश के रक्षा मंत्री हनो पेवकुर ने चीनी सरकार पर साइबर हमला करने के लिए प्रोफेशनल्स को काम कर रखने तक का आरोप लगाया है। और उन्होंने भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा, "इस बुराई से लड़ने के लिए तैयार हर देश का एस्टोनिया में स्वागत है।"
एस्टोनिया में साल 2022 में, इसकी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-EE) को साइबर घटनाओं की 27,115 रिपोर्ट मिलीं थी, जिनमें से 2,672 को हाई रिस्क इंपेक्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया।
क्लाउडफ्लेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर खतरों में इस उछाल ने एस्टोनिया को एप्लीकेशन लेयर डेनियल-ऑफ-सर्विस हमलों के लिए वैश्विक स्तर पर सातवें स्थान पर पहुंचा दिया है। एस्टोनिया सरकार के अलग अलग सरकारी वेबसाइट को बार बार हैक किया गया और उससे जानकारियां चुराई गईं। इसके अलावा, एस्टोनिया के स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और मीडिया कंपनियों तक पर साइबर हमले हुए और भारी संख्या में डेटा की चोरी की गई।
जिसके बाद अब एस्टोनिया ने भारत से मदद मांगी है।
एस्टोनिया के आर्थिक मामलों और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री टिट रीसालो ने आईटी क्षेत्र में भारत की क्षमता को स्वीकार करते हुए कहा, "भारत को एस्टोनिया से ज्यादा चीनी साइबर अपराधों और उसके इरादों के बारे में पता है।" उन्होंने साइबर सुरक्षा में घनिष्ठ सहयोग के जरिए भारत के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर जोर दिया, ताकि भारत की मदद से वो चीनी हैकर्स से खुद का सुरक्षा कर सके।
टिट रीसालो ने कहा, कि "भारत एक आईटी महाशक्ति है, और एस्टोनिया को साइबर सुरक्षा के मामले में शीर्ष देशों में से एक माना जाता है।"
दुनिया के लिए चीन बहुत बड़ा खतरा बन चुका है और साल 2015 में चीनी हैकर्स ने यूएस ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट हैक (2015) को हैक कर लिया था और अमेरिका के करीब 2 करोड़ 15 लाख कर्मचारियों के रिकॉर्ड को चुरा लिया था।
चीनी हैकर्स से कैसे लड़ रहा है भारत?
भारत के एडवांस साइबर और IT इंडस्ट्री का लोहा मानते हुए, अमेरिका के नेतृत्व वाले NATO ने चीनी साइबर खतरों का मुकाबला करने के लिए दक्षिण भारत के साथ मजबूत सहयोग की मांग की है। साइबर सुरक्षा नाटो के सहयोग के संभावित क्षेत्रों की लिस्ट में आतंकवाद-रोधी, मिसाइल रक्षा और एंटी-पायरेसी ऑपरेशन के साथ-साथ सबसे ऊपर है।
चीनी हैकर्स अलग अलग देशों की डेटा चोरी का इस्तेमाल जासूसी करने के लिए कर रहे हैं और भारत ने चीनी हैकरों के खिलाफ सुरक्षा का जाल तैयार किया है, और इसीलिए नाटो भी भारत से मदद मांग रहा है।
थिंक टैंक ORF में सुरक्षा, रणनीति और प्रौद्योगिकी केंद्र के उप निदेशक और वरिष्ठ फेलो समीर पाटिल ने यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "NATO और भारत, दोनों को बढ़ते रैनसमवेयर हमलों और साइबर अपराधों से खतरा है। इसलिए, भारत और नाटो के लिए सहयोग का एक आशाजनक क्षेत्र साइबर सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत और जायजा लेना होगा, जिसमें खतरे के आकलन और साइबर रक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।"
हालांकि, भारत ने पिछले साल नाटो में शामिल होने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन नाटो देश अब चीनी साइबर खतरों का मुकाबला करने में भारत की मदद चाहते हैं।
दूसरी तरफ, एस्टोनिया और भारत पहले से ही साइबर सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग कर रहे हैं, और दोनों देश न केवल सरकार-से-सरकार के आधार पर बल्कि निजी क्षेत्रों के बीच भी ऐसा करना जारी रख सकते हैं। एस्टोनिया में CR14 जैसे संगठन हैं, जो इस प्रयास में अमूल्य साबित हो सकते हैं।
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