नासा को चाहिए आइडिया चांद पर कैसे लगेगा परमाणु संयंत्र
वॉशिंगटन, 23 नवंबर। नासा और अमेरिकी परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने चंद्रमा की सतह पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए सुझाव मांगे हैं. अंतरिक्ष एजेंसी नासा इडाहो स्थित अमेरिकी ऊर्जा विभाग के संघीय प्रयोगशाला के साथ साझेदारी में चंद्रमा पर एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है. इस दशक के अंत तक दोनों मिलकर चांद पर सूर्य-स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत स्थापित करना चाहती है.

देश की शीर्ष संघीय परमाणु अनुसंधान प्रयोगशाला में फिशन सरफेस पावर प्रोजेक्ट के प्रमुख सेबास्टियन कॉर्बिसिएरो ने एक बयान में कहा, ''इस परियोजना का उद्देश्य चंद्रमा पर एक विश्वसनीय, उच्च-शक्ति प्रणाली प्रदान करना है जो इंसान के अंतरिक्ष खोज में एक महत्वपूर्ण अगला कदम है. और इसे हासिल करना हमारी मुट्ठी में है.''
अगर चंद्रमा की सतह पर परमाणु रिएक्टर लगाने की योजना सफल होती है तो मंगल के लिए भी इसी तरह की योजना तैयार की जाएगी. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इंसान को लंबे समय तक वहां रहने में सक्षम बनाना है. नासा का मानना है कि पर्यावरणीय परिस्थितियों की चिंता किए बिना चंद्रमा या मंगल पर बिजली संयंत्र होने चाहिए ताकि मनुष्य इन ग्रहों पर लंबे समय तक रह सकें.
नासा के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मिशन निदेशालय के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर जिम राउटेर ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि फिशन सतह बिजली प्रणालियों से चंद्रमा और मंगल के लिए बिजली वास्तुकला के लिए हमारी योजनाओं को बहुत लाभ होगा और यहां तक कि पृथ्वी पर उपयोग के लिए नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा.''
यह परमाणु ऊर्जा संयंत्र जमीन पर बनने के बाद तैयार अवस्था में चंद्रमा पर भेजा जाएगा. परमाणु रिएक्टर यूरेनियम ईंधन पर निर्भर करेगा, जबकि थर्मल प्रबंधन प्रणाली रिएक्टर को ठंडा रखने में मदद करेगी. न्यूक्लियर पावर प्लांट अगले दस साल तक चांद की सतह पर 40 किलोवाट बिजली पैदा कर पाएगा.
कुछ अन्य मांगों में यह शामिल है कि यह मानव सहायता के बिना खुद को बंद और चालू करने में सक्षम हो. इसके अलावा नासा ने चंद्रमा पर उतरने वाले अंतरिक्ष यान से बिजली संयंत्र को अलग करने और मोबाइल सिस्टम की तरह काम करने और चंद्रमा पर विभिन्न स्थानों पर आसानी से जाने की क्षमता जैसी सुविधाओं का प्रस्ताव रखा है.
नासा के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिजली संयंत्र चार मीटर के सिलेंडर के अंदर फिट हो सकता है और इसकी लंबाई छह मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. जबकि इसका वजन 6,000 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए. ये डिजाइन और प्रस्ताव अगले साल 19 फरवरी तक नासा को भेजे जा सकते हैं.
इडाहो नेशनल लेबोरेटरी पहले भी नासा की कई परियोजनाओं का हिस्सा रही है. प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने मंगल पर नासा के रोवर परसिवरेंस पर रेडियोआइसोटोप ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने में मदद की थी.
एए/सीके (एपी, रॉयटर्स)
Source: DW
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