मिशन मून पर निकला NASA का आर्टेमिस-1, चंद्रमा की यात्रा पर भेजने का तीसरा प्रयास सफल रहा
आर्टेमिस-1 मिशन एस्ट्रोनाट्स को चांद पर भेजने की दिशा में पहला कदम है। यह मेन मिशन के लिए एक टेस्ट फ्लाइट है,
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 50 साल बाद चंद्रमा पर अपना मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। अर्टेमिस-1 (Artemis-1) मिशन नासा के मंगल मिशन के बाद सबसे बड़ा और अहम मिशन माना जा रहा है। बता दें कि, नासा इस रॉकेट के जरिए (Nasa launches Orion on maiden voyage to Moon) चंद्रमा पर ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) भेज रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्पेसशिप 42 दिनों में चंद्रमा की यात्रा करके वापस आएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये लान्चिंग फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से हुआ । नासा ने साल के शुरुआत में प्रक्षेपण की कोशिश की थी, लेकिन प्रयास विफल रहे। यह मिशन चालक रहित होगा। हालांकि चंद्रमा पर मानव-दल मिशन के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

नासा का मिशन चंद्रमा
ट्रॉपिकल तूफान निकोल ( tropical storm Nicole) के फ्लोरिडा (Florida) में भारी तबाही कुछ दिनों बाद, नासा ने चंद्रमा पर आर्टेमिस मिशन को लॉन्च करने के तीसरे प्रयास के लिए हरी झंडी दी थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी जिम फ्री ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि एक लॉन्च प्रयास जो 14 नवंबर के लिए निर्धारित किया गया था, अब 16 नवंबर को होगा। बता दें कि करीब 50 साल बाद अपने मून मिशन आर्टेमिस-1 (Artemis-1 Moon Mission) के जरिए इंसानों को चांद पर दोबारा भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, आर्टेमिस-1 एक मानवरहित मिशन है। नासा के मेगारॉकेट के जरिए ओरियन क्रू कैप्सूल (Orion crew capsule) को चांद तक भेजा जा रहा है।

मिशन को लेकर क्या बोले अधिकारी...
वहीं, मिशन की देखरेख करने वाले अधिकारियों ने इस हफ्ते की शुरूआत में तूफान निकोल से हुई तबाही के बाद अंतरिक्ष यान और रॉकेट की लॉन्चिंग पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की थी। आर्टेमिस मिशन मैनेजर माइक सैराफिन ने कहा था कि तूफान की वजह से स्पेसक्राफ्ट के एक पार्टी में हल्की खराबी आई थी। हालांकि, सब कुछ ठीक रहा और नासा का मिशन सफल रहा।
एस्ट्रोनाट्स को चांद पर भेजने की दिशा में पहला कदम
बता दें कि, आर्टेमिस-1 मिशन एस्ट्रोनाट्स को चांद पर भेजने की दिशा में पहला कदम है। यह मेन मिशन के लिए एक टेस्ट फ्लाइट है, जिसमें किसी एस्ट्रोनाट को नहीं भेजा जाएगा। यह मिशन चालक रहित होगा। आर्टेमिस-1 मिशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि, इस मिशन से वैज्ञानिकों को यह पता लग जाएगा कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चांद के आस-पास सही हालात हैं या नहीं। साथ ही एस्ट्रोनाट्स चांद पर जाने के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौट सकेंगे या नहीं।
लॉन्च के दो प्रयास टाल दिए गए
गौरतलब है कि तकनीकी समस्याओं के कारण इस गर्मी में लॉन्च के दो प्रयासों को टालना पड़ा था। पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने 30 अगस्त को एसएलएस रॉकेट के इंजनों में से एक के साथ तकनीकी खराबी के कारण पहली बार मिशन लॉन्च को रद्द कर दिया था। और दूसरी बार 3 सितंबर को तरल हाइड्रोजन रिसाव का पता चलने के बाद इसे रोक दिया गया था।
(Video & Photo credit: NASA, Twitter)












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