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अटलांटिक महासागर में मिले Alien की दुनिया जाने के दर्जनों दरवाजे? रहस्यमय छेद से दुनिया की रेकी!

अटलांटिक महासागर में खोज के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने समुद्र तल में करीब डेढ़ मील तक फैले इन दर्जनों छेदों को देखा है और ये सभी छेद एक सीधी रेखा में बने हुए हैं।

वॉशिंगटन, अगस्त 21: जुलाई महीने में अटलांटिक महासागर में खोज करते हुए वैज्ञानिकों की टीम एक ऐसे स्थान पर पहुंची थी, जहां समुद्र के तल में करीब 3 किलोमीटर की गहराई पर दर्जनों छेद देखे गये थे और उन छेदों का रहस्य अभी भी बना हुआ है। सबसे आश्चर्य की बात ये है, कि जिसजगह पर वैज्ञानिकों की टीम पहुंची थी, उस जगह पर आज तक इंसान नहीं गये हैं और वैज्ञानिकों के कैमरे में समुद्र के तल में बने दर्जनों छेदों को कैप्चर भी किया है, और अभी तक ये राज बना ही हुआ है, कि समुद्र तल में बने ये बड़े बड़े छेद आखिर किसने बनाए हैं और उन छेदों का अटलांटिक महासागर से क्या कनेक्शन है। लेकिन, अब यूएफओ हंटर्स का दावा है कि समुद्र के तल पर देखे गए ये रहस्यमय छेद एलियंस द्वारा खोदे गए हैं।

एलियंस ने बनाए समुद्र में दर्जनों छेद

एलियंस ने बनाए समुद्र में दर्जनों छेद

अटलांटिक महासागर में खोज के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने समुद्र तल में करीब डेढ़ मील तक फैले इन दर्जनों छेदों को देखा है और ये सभी छेद एक सीधी रेखा में बने हुए हैं। लिहाजा ये छेद काफी आश्चर्यजनक हैं और समुद्र विज्ञानियों को पता नहीं है कि उन्हें किसने बनाया या वे कैसे आए? लेकिन, उड़न तश्तरी स्पॉटर्स StarGazers के इलियट एडे ने दावा किया है, कि "हमें लंबे समय से संदेह है कि एलियंस इन रास्तों का इस्तेमाल धरती पर आने और फिर वापस अपनी दुनिया में जाने के लिए करते हैं।'' उन्होंने दावा किया कि, एलियंस अपनी शर्तों पर पृथ्वी की खोज करने के तरीके के रूप में समुद्र का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "इन छेदों को किसी अन्य तरीके से समझाया नहीं जा सकता है। और अब इस दावे से इनकार करने के लिए वैज्ञानिकों के पास कोई और बहाने नहीं बचे हैं, क्योंकि वो अपनी आंखों के सामने इन अदृश्य छेदों को देख रहे हैं और लोगों ने अब सवाल पूछना शुरू कर दिया है, कि समुद्र में मिले ये रहस्यमयी छेद आखिर क्या हैं?''

'धरती पर पहुंच चुके हैं एलियंस'

'धरती पर पहुंच चुके हैं एलियंस'

यूएफओ: ए फंडामेंटल ट्रुथ के लेखक अन्ना व्हिट्टी ने पहले कहा था कि, यह संभावना है कि "एलियंस हमेशा से यहां रहे हैं" और सुरक्षा के लिए समुद्र के नीचे रह रहे हैं। अब उन्होंने कहा है कि, ''एलियंस यहां हैं और हमारे बीच रहते हैं।" उन्होंने दावा किया है कि, ऐसा करने से वे "हर कई हजार वर्षों में दुनिया को तबाह करने वाली आपदाओं से बचेंगे" जिसका अर्थ है, कि वे "अधिक संरक्षित" हैं और उनकी "टेक्नोलॉजी और बुद्धिमत्ता लगातार ऊपर की ओर जाना जारी रह सकती है।"

NOAA ने समुद्र में खोजे हैं छेद

NOAA ने समुद्र में खोजे हैं छेद

अमेरिका के नैशनल ओसेनिक एंड एट्मस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन यानि NOAA ने इन रहस्यमय छेदों की खोज की है। NOAA ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इन छेदों को लेकर कई तस्वीरें डाली हैं और लोगों से इन छेदों के बारे में मदद मांगी थी। देखने में ये सभी छेद एक सीधी लाइन में बने हुए लग रहे हैं और वैज्ञानिक इसलिए हैरान हैं, कि आखिर समुद्र में करीब तीन किलोमीटर अंदर इन्हें किसने बनाया है और इन छेदों को बनाने का मकसद क्या है? अमेरिकी वैज्ञानिकों ने समुद्र के अंदर ये खोज 23 जुलाई को की है और तस्वीरों को देखने पर पता चलता है, कि ये सभी डॉट्स लगभग सीधी रेखाओं ... या ट्रेल्स ... या डिज़ाइन में जुड़े हुए हैं।

छेदों का राज अब तक है अनसुलझा

छेदों का राज अब तक है अनसुलझा

एनओएए महासागर अन्वेषण अभी तक सुनिश्चित नहीं है, कि इसे कैसे समझा जाए। एनओएए ओशन एक्सप्लोरेशन ने जुलाई महीने में बताया था कि, "हमने तलछट में छेद के इन सबलाइनियर सेटों में से कई को देखा। इन छेदों को पहले इस क्षेत्र से सूचित किया गया है, लेकिन उनकी उत्पत्ति एक रहस्य बनी हुई है।" उन्होंने कहा कि,"प्रारंभिक तौर पर ऐसा लग रहा है, कि इन छेदों को इंसानों के द्वारा बनाया गया है और छिद्रों के चारों ओर तलछट के छोटे-छोटे ढेर को देखने पर ऐसा लगता है, कि इन्हें खुदाई करके बनाया गया है'। लेकिन, वैज्ञानिकों को आश्चर्य इसलिए है, कि कोई साधारण इंसान ऐसा कर नहीं सकता है, और अब तक कोई और देश इस क्षेत्र में पहुंचा नहीं है, तो फिर उन्हें किसने बनाया है, ये एक बड़ा सवाल है। अज़ोरेस के उत्तर में एक पानी के नीचे ज्वालामुखी के शिखर पर जाने के दौरान 23 जुलाई का गोताखोरो की टीम ने समु्द्र में 1.7 मील की गहराई तक पहुंच गई थी और इन खोजों को सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड करने के लिए उन्होंने दूर से संचालित कैमरे का उपयोग किया था।

वॉयज टू द रिज 2022 अभियान

वॉयज टू द रिज 2022 अभियान

यह खोज वॉयज टू द रिज 2022 अभियान के हिस्से के रूप में की गई थी, जो "चार्ली-गिब्स फ्रैक्चर ज़ोन, मिड-अटलांटिक रिज और अज़ोरेस पठार के खराब समझे जाने वाले गहरे पानी के क्षेत्रों" की खोज और मैपिंग कर रही है। एनओएए ओशन एक्सप्लोरेशन का कहना है कि, मिड-अटलांटिक रिज उत्तर से दक्षिण तक 10,000 मील तक फैला है,और इसे "दुनिया की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला और पृथ्वी पर सबसे प्रमुख भूवैज्ञानिक विशेषताओं में से एक" माना जाता है।

NOAA की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

NOAA की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

NOAA की रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'ये क्षेत्र ऐसे हैं, जिनकी अभी तक खोज नहीं की गई है और इस तरफ अभी तक लोग नहीं आए हैं। यहां पर टेक्टोनिक का प्रसार एक्टिव रहा है और इस जगह पर लगातार भूकंप आते रहते हैं।'NOAA की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि, "हाइड्रोथर्मल वेंट की वजह से इन छेदों का निर्माण होना संभल है, क्योंकि, मैग्मा गर्मी उगलता है और फिर हो सकता है, कि इससे समुद्र के अंदर छेद बन गये होंगे। ये वेंट विविध केमोसिंथेटिक समुदायों का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इन साइटों पर जीवन के बारे में बहुत कम जाना जाता है'। हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर मैग्मा से ये छेद बने हैं, तो फिर वो एक सीधी रेखा में क्यों हैं और मैग्मा से बनने वाले छेद अलग तरह के होते हैं। यूएस नेशनल मरीन फिशरीज सर्विस के समुद्री वैज्ञानिकों ने साल 2004 में एक गोता लगाने के दौरान समुद्र तल में विचित्र खोखलेपन को भी देखा था, लेकिन उस राज को भी अब तक सुलझाया नहीं जा सका है।

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