Aung San Suu Kyi: जेल में बंद म्यांमार की नेता आंग सान सू की को माफी, मगर जेल से नहीं होंगी रिहा, ये है वजह
म्यांमार की आयरन लेडी कही जाने वाली आंग सान सू की को 5 मामलों में माफी मिली है। म्यांमार की अपदस्थ नेता को जेल में नजरबंद किए जाने के कुछ दिनों बाद, राज्य मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है।
अब आंग सान सू की उन 7 हजार लोगों में से हैं जिन्हें सेना की तरफ से माफी दी गई है। हालांकि, सेना आंग सान सू की को पूरी तरह रिहा न कर उन्हें हाउस अरेस्ट में ही रखा जाएगा।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सू की को 19 अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। इनमें से उन्हें 5 मामलों में माफी मिली है। यानी कि उनकी कुल 33 साल की सजा में से 6 सालों की सजा माफ कर दी गई है।
इसके साथ ही म्यांमार के पूर्व राष्ट्रपति विन मिंट को भी 2 मामलों में माफी दी गई है। इसके बाद उनकी सजा कम होकर 12 साल से साल रह गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार की राजधानी नॉयपिड में बुद्ध की विशाल प्रतिमा के उद्घाटन के मौके पर जुंटा सरकार ने 7800 कैदियों को माफी देने का ऐलान किया।
फरवरी 2021 में लोकतांत्रित सरकार का तख्तापलट करने के बाद म्यांमार की सेना जुंटा ने देश के तमाम नेताओं को जेल में बंद कर दिया था। दिसंबर में सू की को और सात साल की जेल की सजा सुनाई है, जिससे उनकी कुल जेल की अवधि बढ़कर अब 33 साल हो गई थी।
आपको बता दें कि, म्यांमार में साल 2020 में आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें आंग सान सू की की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी और उसके साथ ही देश में सैन्य शासन का अंत हो गया था।
हालांकि सेना के खिलाफ ये संघर्ष लंबा नहीं चल सका और पिछले साल एक फरवरी को सेना ने लोकतांत्रिक सत्ता का तख्तापलट कर दिया। वहीं, आंग सान सू की समेत उनकी 'नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी' के तमाम बड़े नेताओं को सेना ने हिरासत में ले लिया था।
इस बीच म्यांमार के सैन्य शासन ने देश में लागू आपातकाल की सीमा को और 6 महीने बढ़ाने का फैसला किया है। एक फरवरी 2021 को सेना ने तख्तापलट कर देश में एक साल के लिए आपातकाल लागू किया था। बाद में इस आपातकाल को बढाया गया और अब चौथी बार फिर से छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
एक बार फिर से आपातकाल की अवधि बढ़ाए जाने पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 'अमेरिका बर्मा के सैन्य शासन द्वारा आपातकाल बढ़ाए जाने को लेकर चिंता में है। सैन्य शासन ने देश को हिंसा और अस्थिरता में धकेल दिया है।'












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