मुस्लिम महिला ने बताई आपबीती, हज के दौरान काबा में हुआ यौन दुर्व्यवहार

नई दिल्ली। सऊदी अरब के मक्का में काबा में दुनियाभर के मुसलमान हज के लिए जाते हैं, इस जगह को इस्लाम में एक खास मुकाम हासिल है। काबा में हर साल हज के लिए लाखों लोग जानते हैं और कई तरह की कहानियां अपने साथ लेकर आते हैं लेकिन एक महिला ने एक अलग ही वाकये का जिक्र किया है, जो उसके साथ काबा में हुआ। सबिका खान नाम की महिला ने फेसबुक पर हैशटेग मीटू के साथ काबा में हुए दुर्व्यवहार की कहानी साझा की है। सबिका ने बताया है कि वो इसलिए डर रही थी कि कहीं ये लोगों की भावनाओं को आहत ना करे लेकिन वो अपनी बात रख रही हैं।

'तीसरे तवाफ के दौरान एक हाथ मेरी कमर पर था'

'तीसरे तवाफ के दौरान एक हाथ मेरी कमर पर था'

सबिका लिखती हैं- 'हम इसा की नमाज अदा करने के बाद काबा का तवाफ कर रहे थे तो मेरे साथ वो हुआ जो मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था। तीसरे तवाफ के दौरान मैंने पाया कि एक हाथ मेरी कमर पर था। मैंने ये मानकर इसे पूरी तरह से अनदेखा कर दिया कि ये गलती से हो सकता है लेकिन जब ये दोबारा और तीसरी बार हुआ तो इसने मुझे परेशान कर दिया, मैं पूरी तरह से सन्न थी कि आखिर ये हो क्या रहा है लेकिन हद तब हो गई जब वो हाथ मेरे कमर से नीचे जाने लगा।'

हद तब हुई, जब हाथ मेरे कमरे के नीचे पहुंचा

हद तब हुई, जब हाथ मेरे कमरे के नीचे पहुंचा

सबिका लिखती हैं- 'मैं भीड़ होने की वजह से इसे इग्नोर करती रही कि एक हाथ मेरी कमर पर है लेकिन हद तब हो गई जब मेरी बट पर गलत तरह से मुझे छुआ गया। भीड़ बहुत ज्यादा थी मैंने मुड़ने की कोशिश की लेकिन मैं मुड़ नहीं सकी, मैं चाहती थी कि चिल्लाऊं लेकिन भीड़ मुझे धकेल रही थी। मैंने सोचा कि इस हाथ को पकड़ लूं और उसे खुद से दूर कर दूं, मैं धीमा होकर, जितना मुड सकती थी मुड़ी लेकिन कुछ देख ना सकी कि आखिर वो कौन था। मैं यमीनी कॉर्नर के पास रुक गई।'

मेरी आंखों में आंसू थे

मेरी आंखों में आंसू थे

सबिका आगे कहती हैं- 'मैं रुक गई, मैं नहीं देख पाई कि वो कौन था. मैं खुद को बिल्कुल अकेली महसूस कर रही थी। मैंने महसूस किया कि मैं इसके बारे में बोल भी नहीं सकती हूं क्योंकि मुझे लगा कि कोई मेरा यकीन नहीं करेगा। मैं होटल के रूम में लौटी और अपनी अम्मी को ये सब बताया क्योंकि वही मेरा यकीन कर सकती थीं। उन्होंने ये सुना तो परेशान हो गईं और फिर मुझे अकेले भीड़ में नहीं जाने दिया।' सबिका कहती हैं कि ये कहना अपने आप में दिल तोड़ने वाला है कि धार्मिक स्थान भी सुरक्षित नहीं है, इन जगहों पर ऐसा एक-दो बार नहीं बार-बार होता है। (तस्वीरें- सबिका की फोसबुक पोस्ट से ली गई हैं)

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