US के 'जिहाद कैपिटल' में लगे 'अमेरिका की मौत हो' के नारे.. इस्लामिस्टों ने बाइडेन को दी सबक सिखाने की चेतावनी
Muslim protestors chant 'death to America': प्रसिद्ध अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मिशिगन शहर को 'जिहाद कैपिटल' करार दिया है और इस शहर में 'अमेरिका मुर्दाबाद, इजराइल मुर्दाबाद' के नारे लगे हैं, जिसने अमेरिका की सरकार और अमेरिकी नागरिकों के पैरों तले जमीन छीन ली है।
अमेरिका की 'जिहाद राजधानी' करार दिए गए मिशिगन शहर में एक रैली के दौरान मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को 'अमेरिका की मौत' और 'इजराइल की मौत' के नारे लगाए हैं, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। और लोग कह रहे हैं, कि ये प्रदर्शनकारी उसी देश की 'मौत हो' के नारे लगा रहे हैं, जहां ये पूरी आजादी के साथ रहते हैं।

अमेरिका मुर्दाबाद के लगाए गये नारे
ये इस्लामिक प्रदर्शनकारी, फिलिस्तीन के समर्थन और इज़राइल का विरोध करने के लिए अल-कुद्स दिवस मौके पर रैली निकाल रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन, गाजा में इजरायली हवाई हमले में वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात सहायता कर्मियों के मारे जाने के एक हफ्ते किया गया था।
मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (MEMRI) की तरफ से शेयर किए गये वीडियो में देखा जा रहा है, तारेक बाज़ी नाम का एक स्थानीय कार्यकर्ता भाषण दे रहा है और भाषण के दौरान वहां मौजूद इस्लामिस्ट 'अमेरिका की मौत!' के नारे लगा रहे हैं।
इस दौरान वहां मौजूद प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे थे और वो कह रहे थे, कि "ये सिर्फ नरसंहार नहीं है बाइडेन, जो हम इसे जाने देंगे।"
इस दौरान प्रदर्शनकारी तारेक बाजी ने कहा, कि "इस पूरे सिस्टम को जाना होगा। कोई भी व्यवस्,था जो इस तरह के अत्याचार और ऐसी शैतानी होने देगी, और उसका समर्थन करेगी, वो व्यवस्था का अस्तित्व इस धरती पर रहने लायक नहीं है।" इसके बाद तारेक बाजी ने इजराइल के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया।
उसने भीड़ को उकसाते हुए पूछा, "क्या इजराइल को अस्तित्व में रहने का अधिकार है?" तो वहां मौजूद लोगों ने 'डेथ टू इजराइल' के नारे लगाने शुरू कर दिया।
इसके बाद बाजी ने कहा, कि "लोग अमेरिका के इतने खिलाफ इसलिए हो गये हैं, क्योंकि अमेरिका, इजराइल का समर्थन कर रहा है।" उसने गाजा में चल रहे युद्ध के बारे में बोलते हुए कहा, कि "इजराइली हमले में अभी तक 31 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।"
मिशिगन को कहा जाता है 'जिहाद की राजधानी'
मिशिगन के डियरबॉर्न शहर को एक बार वाल स्ट्रीट जर्नल के ओपिनियन आर्टिकिल में 'जिहाद की राजधानी' करार दिया गया था। इस साल की शुरुआत में इस शहर ने तब ध्यान आकर्षित किया था, जब MEMRI के कार्यकारी निदेशक स्टीवन स्टालिन्स्की ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख में इसे 'अमेरिका की जिहाद राजधानी' करार दिया था।
स्टालिनिस्की ने लिखा, कि "जब हमास ने इजराइल पर 7 अक्टूबर को हमला किया था, तो इस शहर में रहने वाले इस्लामिस्टों ने खुशियां मनानी शुरू कर दी थी। इन्होंने हमास के समर्थन में रैलियां निकालनी शुरू कर दी थी और वो उस भयानक घटना का जश्न मना रहे थे।"
उन्होंने आरोप लगाया, कि मजहबी नेताओं ने इजरायली लोगों को खत्म करने का आह्वान किया गया था। लेकिन, अब जब इजराइल ने गाजा पट्टी को श्मशान में तब्दील कर दिया, तो अब ये अमेरिका के खिलाफ भी जहर उगल रहे हैं।
स्टालिनिस्की का दावा है, कि "ये शहर धीरे धीरे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है और उन्होंने इस शहर को नफरत का केन्द्र भी करार दिया है।"
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, डियरबॉर्न शहर में करीब 54 प्रतिशत अरब देशों के मुसलमान रहते हैं, जो इसे अमेरिका में मध्य पूर्वी लोगों के लिए सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक बनाता है। और यही वजह है, कि यहां इजराइल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी होती रहती है। सबसे दिलचस्प ये है, कि अमेरिका ने ही इन लोगों को शरण दी है, खाना दिया है, बोलने की आजादी दी है और अब ये उसी अमेरिका की मौत की कामना कर रहे हैं।
यह शहर, अमेरिका में प्रति व्यक्ति सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी का घर है और साथ ही उत्तरी अमेरिका की सबसे बड़ी मस्जिद भी यहीं है।












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