आतंकियों और क्रिमिनल्स के बीच पॉपुलर खतरनाक ड्रग्स
लंदन। कुछ दिनों पहले खबरें आई थीं कि सीरिया में आईएसआईएस आतंकी बड़ी मात्रा में न सिर्फ ड्रग्स की ट्रैफिकिंग कर रहे हैं बल्कि वह खुद भी इनका प्रयोग कर रहे हैं।
सीरिया के अलावा भारत में जनवरी की शुरुआत में हुए पठानकोट आतंकी हमले के बाद हुई जांच में यह बात सामने आई कि आतंकियों ने ड्रग्स ली थी ताकि वे दर्द सह सकें और लंबे समय तक मुकाबला कर सकें।
वर्ष 2012 में अमेरिकी सेना की ओर से आई एक रिपोर्ट में यह बात कही गई थी इराक में आतंकी बड़े पैमान पर ड्रग्स का सेवन करते हैं। वे ड्रग्स की स्मगलिंग से पैसा तो कमा ही रहे हैं साथ ही साथ वे खुद भी इसका सेवन करते हैं।
सीरिया से लेकर पठानकोट तक आतंकी कर रहे ड्रग्स का प्रयोग
इसके बाद उन 10 प्रकार की ड्रग्स की एक लिस्ट तैयार की गई जिनका सेवन न सिर्फ आतंकी बल्कि अपराधियों के बीच काफी तेजी से बढ़ रहा है।
आगे की स्लाइड्स पर नजर डालिए और जानिए उन टॉप 10 सबसे खतरनाक ड्रग्स के बारे में जिनका प्रयोग अपराधी और आतंकी इस समय कर रहे हैं।

अमेरिका का दावा
अमेरिका और ब्रिटेन ने वर्ष 2012 में रिपोर्ट में कहा था इराक में छिपे हुए आतंकी तेजी से इसका प्रयोग कर रहे हैं। इराक के बसरा शहर में इसे 'पिंकीज' नाम दिया गया था और यह टैबलेट के तौर पर ली जा रही थी। इस ड्रग्स का प्रयोग जर्मन सैनिक वर्ल्ड वॉर टू के समय करते थे। इस ड्रग्स को वर्ष 1887 में पहली बार डेवलप किया गया था।

सीरिया में आईएसआईएस की फेवरिट
टाइम्स लंदन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पेरिस आतंकी हमलों के बाद पता लगा था कि आतंकियों ने एमफेटामाइन ड्रग्स का प्रयोग किया था। इसी रिपोर्ट में कहा गया था कि जॉर्डन के अधिकारियों ने सीरिया में एमफेटामाइन ड्रग्स की 16,768,684 टैबलेट्स को पिछले वर्ष जब्त किया था।

पठानकोट आतंकी हमले में प्रयोग
पठानकोट आतंकी हमले में आतंकियों ने 50 घंटे तक अगर दर्द को सहकर भी सिक्योरिटी फोर्सेज का सामना किया तो उसकी वजह थी मैफिनैमिक एसिड। जांचकर्ताओं को भी इस बात के सुराग मिले कि आतंकियों ने इस ड्रग्स का प्रयोग सुरक्षा एजेंसियों के साथ लड़ाई के समय किया।

अपराधियों और आतंकियों की पंसद
पेरिस आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड अ ब्देलाहमीद अबाउद जब अपने मिशन पर था तो उसने बड़ी मात्रा में कैनबीस का प्रयोग किया था। डेली मेल का दावा है कि कहीं न कहीं आईएसआईएस के बाकी आतंकी भी उसकी तरह इसी ड्रग्स का प्रयोग बड़ी मात्रा में करते हैं।

अफगानिस्तान में बड़ी मात्रा में पैदावार
पाकिस्तान से सटे अफगानिस्तान में बड़ी मात्रा में अफीम की खेती होती है। आतंकी संगठन न सिर्फ खुद इसका प्रयोग करते हैं बल्कि बड़ी मात्रा में इसे बाहर भेजकर मोटी रकम भी कमाते हैं।

एक ग्राम से 20 लोगों की मौत
इस ड्रग्स का प्रयोग साउथ अमेरिका के अपराधी काफी ज्यादा करते हैं। इसका नशा काफी ज्यादा होता है और इसलिए अपराधी इसका प्रयोग तेजी से करते हैं। यह ड्रग्स इतनी खतरनाक होती है कि एक ग्राम डोज 20 लोगों की जान ले सकती है। सीआईए के मुताबिक वर्ष 1993 में शीत युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर इसका प्रयोग किया गया था।

दुनिया की सबसे पुरानी ड्रग्स
भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर के बीच आतंकी अफीम और हीरोईन की बड़ी मात्रा में तस्करी कर रहे हैं। इस तस्करी की वजह से उन्हें न सिर्फ बड़ी कीमत मिलती है बल्कि वह पठानकोट जैसे आतंकी हमलों की साजिश को अंजाम देने में भी सफल हो जाते हैं।

अमेरिकी कांग्रेस का दावा
वर्ष 2004 में एक अमेरिकी कांग्रेस ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट में अमेरिकी कांग्रेस का दावा था कि अल कायदा और दूसरे आतंकी संगठन के आतंकी इस समय दूसरी प्रकार की ड्रग्स के साथ क्रैक कोकिन का प्रयोग तेजी से कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया था इस तरह की ड्रग्स के प्रयोग के बाद आतंकी खुद को तनावमुक्त महसूस करते हैं।

रूस का सीक्रेट
इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रोकाडिल रूस का एक ऐसी सीक्रेट एडीक्शन जिसके बारे में लोगों को कम मालूम है। रूस में करीब एक मिलियन लोग इसका प्रयोग करते हैं। यह बाकी ड्रग्स के मुकाबले सस्ती है और इसलिए धीरे-धीरे इसकी बिक्री बढ़ रही है। इसे हीरोईन के मुकाबले काफी खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसे घर पर ही तैयार किया जा सकता है।












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