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ज्यादातर अमेरिकी चाहते हैं, विदेशों में कम दखल करे सरकारः सर्वे

वॉशिंगटन, 29 सितंबर। एक ताजा सर्वे के मुताबिक अमेरिका में लोग अब अपने सैनिकों को विदेश भेजने से आजिज आ चुके हैं और चाहते हैं कि विदेशों में समस्याओं से निपटने में कूटनीति का सहारा लिया जाए.

यूरेशिया ग्रुप फाउंडेशन ने यह सर्वे किया है जिसके मुताबिक 58.3 प्रतिशत लोग मानते हैं कि अमेरिका को जलवायु परिवर्तन, मानवाधिकार और माइग्रेशन जैसे मुद्दों पर ज्यादा काम करना चाहिए. 27 अगस्त से 1 सितंबर के बीच किए गए इस सर्वे में में 21.6 फीसदी लोगों ने कहा अमेरिका को दूसरे देशों में कम दखलअंदाजी करनी चाहिए. 20.1 फीसदी लोगों की कोई राय नहीं थी.

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सर्वेक्षण में 2,168 लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें से 42.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अमेरिका को यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में कमी करनी चाहिए और दूसरे देशों की रक्षा की अपनी प्रतिबद्धताओं को घटानी चाहिए. ये लोग चाहते हैं कि अमेरिका को धीरे-धीरे क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने सहयोगियों को सौंप देनी चाहिए.

अफगानिस्तान का असर

बुधवार को जारी किए गए इस सर्वे में 32 प्रतिशत लोगों ने विदेशों में सेना बढ़ाने या कम से कम मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की बात कही है. 25.5 प्रतिशत लोगों की इस बारे में कोई राय नहीं थी.

अमेरिका में अफगानिस्तान में 20 साल चले युद्ध के नतीजों पर लगातार बहस हो रही है. 30 अगस्त को अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था लेकिन उससे पहले ही देश पर उस तालिबान ने कब्जा कर लिया, जिसे बीस साल पहले अमेरिका ने हमला कर सत्ता से हटाया था. सर्वे करने वाली संस्था का मानना है कि नतीजों पर इस युद्ध के नतीजों का प्रभाव पड़ा होगा.

यूरेशिया ग्रुप फाउंडेशन के सीनियर फेलो मार्क हाना कहते हैं कि पिछले दो साल में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जो चाहते हैं कि अमेरिका की विदेश नीति घरेलू लोकतंत्र की मजबूती पर केंद्रित होनी चाहिए ना कि विदेशों में लोकतंत्र स्थापित करने पर.

हाना कहते हैं, "हमने अपना डेटा तब जमा किया था जबकि अमेरिका अफगानिस्तान से निकल रहा था और सैन्य दखल के जरिए किसी देश को बनाने व वहां लोकतंत्र स्थापित करने में मिली नाकामी स्पष्ट नजर आ रही थी."

सर्वे के कुछ और नतीजे

सर्वेक्षण में सामने आईं कुछ और बातें हैः

40.3 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि अमेरिका का मौजूदा सैन्य खर्च जस का तस बना रहे. 38.6 प्रतिशत लोग इसमें कमी के हक में हैं जबकि 16.4 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि यह खर्च बढ़ाया जाए.

62.6 प्रतिशत लोगों ने ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर वार्ता को फिर से शुरू करने का पक्ष लिया. ये लोग चाहते हैं कि एक ऐसा समझौता किया जाए जो ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोके. 37.4 प्रतिशत लोग बातचीत के विरोधी हैं और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाकर उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकने के हिमायती हैं.

42.2 प्रतिशत लोग कहते हैं कि अगर चीन ताईवान पर हमला करता है तो अमेरिका को उसकी रक्षा करनी चाहिए. 16.2 प्रतिशत लोग इसके पक्ष में नहीं हैं जबकि 41.6 प्रतिशत लोग इस बारे में कोई राय नहीं बना सके.

यूरेशिया ग्रूप फाउंडेशन ने यह सर्वे ऑनलाइन भागीदारी के जरिए कराया था. इस फाउंडेशन के संस्थापक राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर हैं जिनका यूरेशिया ग्रूप राजनीतिक खतरों के संबंध में सरकारों और नेताओं को परामर्श देने का काम करता है.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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