Mike Pompeo: क्वाड में मजबूरी में शामिल हुआ भारत, अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री बोले- आसान नहीं था मनाना
पोम्पिओ ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत ने इससे पहले कभी भी, किसी भी गठबंधन में शामिल हुए बिना अपना रास्ता खुद बनाया है और आज भी मोटे तौर पर ऐसा ही है, लेकिन चीन के आक्रामक रवैये के कारण भारत ने अपना राजनीतिक रुख बदला

File Image: PTI
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने अपने संस्मरण में भारत के क्वाड ग्रुप में शामिल होने की वजह का खुलासा किया है। अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के लिए पहचाने जाने वाले भारत को चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण अपने रणनीतिक रुख को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके दावे के मुताबिक इसके बाद ही भारत ने चार देशों के समूह क्वाड का हिस्सा बनना चुना।

क्वाड में हुई भारत की वाइल्ड कार्ड एंट्री
पोम्पियो ने भारत के क्वाड में शामिल होने को ‘वाइल्ड कार्ड' एंट्री बताया है। उन्होंने कहा कि भारत एक समाजवादी विचारधारा पर स्थापित राष्ट्र था जिसने शीत युद्ध के दौरान न तो अमेरिका और न ही सोवियत संघ के गुट में शामिल होना चुना। पोम्पिओ ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत ने इससे पहले कभी भी, किसी भी गठबंधन में शामिल हुए बिना अपना रास्ता खुद बनाया है और आज भी मोटे तौर पर ऐसा ही है, लेकिन चीन के आक्रामक रवैये के कारण भारत ने अपना राजनीतिक रुख बदला है।

2017 में क्वाड को मिला आकार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन पर सबसे आक्रामक सलाहकारों में से एक माइक पोम्पिओ ने मंगलवार को जारी अपने संस्मरण 'नेवर गिव एन इंच: फाइटिंग फॉर द अमेरिका आई लव' में बताया है कि आखिर कैसे वर्षों की दुविधा के बाद भारत को क्वाड ग्रुप में शामिल कराने में अमेरिका सफल रहा। आपको बता दें कि अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2017 में संसाधन संपन्न भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख का मुकाबला करने के लिए क्वाड गठबंधन स्थापित करने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को आकार दिया था।

4 वजहों से भारत-चीन के संबंध बिगड़े
अपनी पुस्तक में, पोम्पेओ ने उन प्रमुख घटनाओं का पता लगाया, जिनके कारण हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में गिरावट आई है। उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान के साथ चीन की बढ़ती निकटता, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पुश, हाल में ही दोनों देशों के बीच सीमा पर संघर्ष और टिकटॉक जैसे दर्जनों चीनी ऐप पर भारत की जवाबी पाबंदी से दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आई है। पोम्पिओ ने लिखा, "जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प में चीनी सैनिकों ने 20 भारतीय सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। उस खूनी झड़प के कारण भारतीय जनता में चीन के खिलाफ नफरत की भावना तेज हुए जिसके बाद सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया के तहत टिकटॉक और दर्जनों चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया''।

शिंजो आबे की भी खूब प्रशंसा की
पोम्पियो ने अपनी किताब में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को असाधारण साहस और दूरदृष्टि वाले वैश्विक नेता के रूप में वर्णित किया है। आपको बता दें कि शिंजो आबे को क्वाड का जनक माना जाता है। शिंजो आबे ने चीन को एक खतरे के रूप में देखने में अपनी दूरदर्शिता का प्रदर्शन किया और स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के विचार को भी गढ़ा। शिंजो आबे के प्रयास से क्वाड की 2007 में स्थापना हुई थी। उस वक्त भी चीन और रूस ने इसका विरोध किया था। हालांकि दस सालों तक क्वाड पर विशेष काम नहीं हुआ था। 2017 में इस पर चारों देशों ने काम करना शुरू किया। इसका उद्देश्य सामरिक रूप से अहम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच प्रमुख समुद्री मार्गों को किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक नई रणनीति विकसित करना था।












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