Mauritius: अयोध्या की ही तरह जश्न, राम के लिए छुट्टी का ऐलान.. भारत के 'भाई' मॉरीशस को कितना जानते हैं आप?
India Mauritius Relation: अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन समारोह है और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले दुनियाभर के हिंदुओं में आनंद समाया हुआ है। इस मौके पर अमेरिका, ब्रिटेन समेत हर उस देश में, जहां हिंदुओं की आबादी ज्यादा है, वहां भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
इस बीच मॉरीशस की सरकार ने ऐलान किया है, कि 22 जनवरी को सभी हिंदू सरकारी कर्मचारियों को 2 घंटे की स्पेशल छुट्टी दी जाएगी, ताकि वो राम मंदिर का उद्घाटन देख सकें। इसके अलावा भी मॉरीशस में अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ खुद भी कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।

लिहाजा, मॉरीशस के बारे में जानने की लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। लोग जानना चाहते हैं, कि आखिर मॉरीशस के भारत के साथ संबंध कैसे हैं, मॉरीशस में हिंदुओं की स्थिति कैसी है और मॉरीशस, किस तरह से भारत के साथ जुड़ा हुआ है।
मॉरीशस को जानिए
मॉरीशन रिपब्लिक, अफ्रीकी महाद्वीप के तट के दक्षिणपूर्व में करीब 900 किलोमीटर की दूरी पर हिंद महासागर में और मेडागास्कर के पूर्व में स्थित एक द्वीप देश है, जिसके भारत के साथ काफी मजबूत संबंध हैं। दोनों देश कितने करीब हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं, कि मॉरीशस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, यानि एनएसए भारतीय अधिकारी विवेक जौहरी हैं।
मॉरीशस में हिंदुओं की आबादी सबसे ज्यादा है और दुनिया में मॉरीशस द्वीप के अलावा, इस गणराज्य मे, सेंट ब्रेंडन, रॉड्रीगज़ और अगालेगा द्वीप भी शामिल हैं।
दक्षिणपश्चिम में 200 किलोमीटर पर स्थित फ्रांसीसी रीयूनियन द्वीप और 570 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित रॉड्रीगज़ द्वीप के साथ मॉरीशस मस्कारेने द्वीप समूह का हिस्सा है।
मारीशस की संस्कृति, मिश्रित संस्कृति है और इसकी सबसे बड़ी वजह पहले मॉरीशन का फ्रांस के अधीन होना और फिर बाद में ब्रिटेन के अधीन होना है। मॉरीशस द्वीप, विलुप्त हो चुके डोडो पक्षी के अंतिम और एकमात्र घर के रूप में भी विख्यात है।

मॉरीशस में हिंदू धर्म
मॉरीशस में हिंदू धर्म तब आया, जब भारतीयों को गिरमिटिया मजदूर के रूप में औपनिवेशिक फ्रांसीसी और बाद में मॉरीशस और हिंद महासागर के पड़ोसी द्वीपों में ब्रिटिश बागानों में बहुत बड़ी संख्या में लाया गया।
भारतीय प्रवासी मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आए, जबकि भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से भी प्रवासी मॉरीशस पहुंचे।
मॉरीशस में हिंदू धर्म सबसे बड़ा धर्म है। साल 2011 में हिंदुओं की आबादी, देश की कुल आबादी का करीब 48.5% था, लिहाजा मॉरीशस अफ्रीका का एकमात्र देश है, जहां हिंदू धर्म सबसे ज्यादा प्रचलित धर्म है और प्रतिशत के हिसाब से, नेपाल और भारत के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
जब मॉरीशस को ब्रिटिश साम्राज्य से आजादी मिली, तब तक इसकी ज्यादातर आबादी भारतीय विरासत से थी। ब्रिटिश लेखर पैट्रिक आइसेनलोहर के अनुसार, मॉरीशस की कुल आबादी का लगभग 70% भारतीय मूल का है। जो लोग खुद को हिंदू के रूप में पहचानते हैं, वे कुल आबादी का लगभग 48% है, जबकि बाकी की आबादी मुस्लिम भारतीयों की है।
मॉरीशस की भाषा
मॉरीशस के हिंदू, हिंदी भाषा के अलावा भोजपुरी और क्रियोल बोलते हैं। वहीं, राजनीतिक रूप से सक्रिय हिंदुओं ने मॉरीशस में हिंदी भाषा को सहेजकर रखने की कोशिश की है और हिंदी भाषा को पैतृक भाषा कहा जाता है, हालांकि अधिकांश हिंदू मुख्य रूप से अपने दैनिक जीवन में क्रियोल का उपयोग करते हैं। क्रियोल, भारतीयों और अफ्रीकियों की एक समन्वित भाषा है, जो धीरे धीरे द्वीप पर विकसित हुई है।
मॉरीशस सरकार द्वारा नियंत्रित चैनल मॉरीशस ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन पर कई भोजपुरी भाषा के टेलीविजन कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। मॉरीशस में जो हिंदू व्यापक रूप से भोजपुरी का उपयोग करते हैं, उनमें ला निकोलियर के पास का ग्रामीण दक्षिण और उत्तर-मध्य क्षेत्र शामिल है।ये बस्तियां मुख्य रूप से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी क्षेत्रों से आए हिंदुओं की हैं, और उनकी भाषा मूल भोजपुरी का एक संशोधित रूप है।












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