Greenland में बर्फ के नीचे दबा है दुर्लभ खजाना, निकालने के लिए दुनिया के अरबपतियों में लगी रेस
अरबपतियों के इस क्लब ने खनिज अन्वेषण का काम करने वाली कंपनी ‘कोबाल्ड मेटल्स’, जिसका हेड ऑफिस कैलिफोर्निया में है, उसका वित्तीय तौर पर समर्थन करना शुरू कर दिया है और कंपनी के एक प्रतिनिधि ने सीएनएन से इसकी पुष्टि भी की है
ग्रीनलैंड, अगस्त 09: दुनिया के कुछ सबसे अमीर व्यक्ति ग्रीनलैंड के पश्चिमी तट पर एक खजाने की तलाश में शामिल हो गये हैं और हेलीकॉप्टर और ट्रांसमीटर के सहारे खजाने की काफी जोर-शोर से तलाश की जा रही है। इन अमीर कारोबारियों में दो सबसे बड़े नाम हैं, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और इस वक्त जब ग्लोबल वॉर्मिंग ने ग्रीनलैंड में भारी मात्रा में बर्फ को पिघलाना शुरू कर दिया है, तो इन दोनों कारोबारियों की प्रोफेशनल टीमें खजाने की तलाश में दिन-रात एक कर जुट गई हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ ग्रीनलैंड में बर्फ पिघल रहा है और दूसरी तरफ अरबपति कारोबारियों, निवेशकों और खनन कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर बनकर सामने आ गया है। ऐसा माना जा रहा है, कि ग्रीनलैंड में ग्रीन एनर्जी को बनाने के लिए महत्वपूर्ण खनिज छिपे हुए हैं और उन्हें ही निकालने के लिए अरबपतियों में होड़ लग गई है।

अरबपतियों में खजाना खोजने की होड़
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जेफ बेजोस, माइकल ब्लूमबर्ग और बिल गेट्स सहित कई अरबपतियों का एक ग्रुप का मानना है, कि ग्रीनलैंड के डिस्को द्वीप और नुसुआक प्रायद्वीप पर पहाड़ियों और घाटियों की सतह के नीचे सैकड़ों लाखों इलेक्ट्रिक वाहनों को बिजली देने के लिए पर्याप्त मात्रा में महत्वपूर्ण खनिज दबे हुए हैं। कोबोल्ड मेटल्स के सीईओ कर्ट हाउस ने सीएनएन को बताया कि, "हम एक डिपॉजिट की तलाश कर रहे हैं, जो दुनिया में पहली या दूसरी सबसे बड़ी निकल और कोबाल्ट का भंडार होगा।" दरअसल, आर्कटिक की बर्फ धीरे धीरे पिघल कर गायब हो रही है और समुद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, जो जमीन और समुद्र के बीच एक अलग तरह का विभाजन पैदा कर रहा है। सीएनएन के मुताबिक, ग्रीनलैंड जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए ग्राउंड ज़ीरो है, लेकिन यह संकट के समाधान के लिए आवश्यक धातुओं की सोर्सिंग के लिए ग्राउंड ज़ीरो भी बन सकता है।

दुर्लभ खनिजों की होगी खोज
अरबपतियों के इस क्लब ने खनिज अन्वेषण का काम करने वाली कंपनी 'कोबाल्ड मेटल्स', जिसका हेड ऑफिस कैलिफोर्निया में है, उसका वित्तीय तौर पर समर्थन करना शुरू कर दिया है और कंपनी के एक प्रतिनिधि ने सीएनएन से इसकी पुष्टि भी की है। हालांकि, जेफ बेजोस, ब्लूमबर्ग और बिल गेट्स ने सीएनएन की इस स्टोरी को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ग्रीनलैंड में दुर्लभ और कीमती धातुओं को खोजने के लिए कोबोल्ड ने ब्लूजे माइनिंग के साथ भागीदारी की है। आपको बता दें कि, इस वक्त जब दुनिया इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रही है, तो ऊर्जा को स्टोर करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जो बैट्री बनाए जाते हैं, उसमें बड़े पैमाने पर इन्हीं दुर्लभ खनिज धातुओं का इस्तेमाल होता है, लिहाजा ये अरबपति कारोबारी इस रेस में पीछा नहीं रहना चाहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्लभ धातुओं को खोजने के लिए तीस भूवैज्ञानिक की एक टीम, भूभौतिकीविदों की टीम, रसोइया, पायलट और इंजीनियरों की टीम उस स्थान पर डेरा डाले हुए हैं, जहां कोबोल्ड और ब्लुजे दफन खजाने की खोज कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों की टीम कर रही है तलाश
खोजकर्ताओं की टीम ग्रीनलैंड के उपसतह पर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र को मापने और नीचे चट्टान की परतों को मैप करने के लिए मिट्टी के नमूने इकट्ठा कर रही है। वहीं, उड़ने वाले ड्रोन और ट्रांसमीटरों के साथ हेलीकॉप्टर भी खोज के इस काम में लगे हुए हैं। वे डेटा का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अगली गर्मियों में कहाँ ड्रिल करना है। ब्लूजे माइनिंग के सीईओ बो मोलर स्टेंसगार्ड ने सीएनएन को बताया कि, "ग्रीनलैंड में जलवायु परिवर्तन के परिणामों और प्रभावों को देखना एक चिंता का विषय है। लेकिन, आम तौर पर, जलवायु परिवर्तन ने समग्र रूप से ग्रीनलैंड में अन्वेषण और खनन को आसान और अधिक सुलभ बना दिया है।" स्टेंसगार्ड ने कहा कि, क्योंकि जलवायु परिवर्तन समुद्र में लंबे समय तक बर्फ-मुक्त अवधि बना रहा है, टीमें भारी उपकरणों में जहाज करने और धातुओं को वैश्विक बाजार में अधिक आसानी से बाहर भेजने में सक्षम हैं।

तेजी से पिघलता जा रहा है ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड के चारों ओर समुद्री बर्फ पिघलने से खनन उद्योग के लिए उपकरण और सामग्री बाहर भेजना आसान हो गया है। पिघलती हुई बर्फ उस भूमि को उजागर कर रही है जो सदियों और सहस्राब्दियों तक बर्फ के नीचे दबी रही है, लेकिन अब खनिज अन्वेषण के लिए एक संभावित स्थल बन सकती है। यूनाइटेड स्टेट्स आर्कटिक रिसर्च कमिशन के अध्यक्ष माइक स्फ्रागा ने सीएनएन को बताया, "जैसा कि ये रुझान भविष्य में अच्छी तरह से जारी हैं, कोई सवाल नहीं है कि अधिक जमीन का दिखना शुरू हो जाएगा और इस भूमि में काफी दुर्लभ खनिज छिपा हुआ हो सकता है'। वहीं, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार ग्रीनलैंड कोयला, तांबा, सोना, दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों और जस्ता के लिए एक उम्दा स्थान हो सकता है। ग्रीनलैंड की सरकार और एजेंसी के अनुसार, जिन जगहों से बर्फ पूरी तरह से पिघल गये हैं और जमीन दिखने लगी है, वहां की मिट्टी को रिसर्च के लिए भेजा गया है और पता लगाया जा रहा है, कि क्या वहां पर कोई खनिज भी मौजूद है?

क्या पर्यावरण को पहुंचाएंगे नुकसान?
वहीं, Sfraga ने कहा कि, खनिज खोजने के उत्सुक उद्योगपति को पर्यावरण की भी परवाह है, जो ग्रीनलैंड की संस्कृति और आजीविका का केंद्र है। उन्होंने कहा कि, "ग्रीनलैंड की सरकार खनिजों की एक विस्तृत श्रृंखला के खनन को शामिल करने के लिए अपने प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार, टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकास का समर्थन करती है।" वहीं, स्टेंसगार्ड ने उल्लेख किया कि, ये महत्वपूर्ण खनिज "इन चुनौतियों का सामना करने के लिए समाधान का हिस्सा प्रदान करेंगे" जो कि जलवायु संकट को बढ़ा रहा है, जैसे जैविक ईंधन।

बढ़ रहा है समुद्र का जलस्तर
वहीं, ग्रीनलैंड से गायब होती बर्फ, जो समुद्र के जलस्तर को बढ़ा रही है, आर्कटिक का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सीएनएन को बताया कि, "आर्कटिक समुद्री बर्फ के लिए बड़ी चिंता यह है कि यह पिछले कई दशकों में गायब हो रहा है, जिसके 20 से 30 वर्षों में संभावित रूप से गायब होने की भविष्यवाणी की गई है।" वहीं, कई वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है, कि जिस दिन यहां का बर्फ गायब हो गया, उस दिन समुद्र किनारे बसे कई विकसित शहर पानी में पूरी तरह से डूब जाएंगे।












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