आर्थिक संकट में फंसा भारत का एक और खास दोस्त, हजारों लोग कर रहे हिंसक प्रदर्शन, लुभाने पहुंचा चीन
बांग्लादेश की 416 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था पिछले कई सालों से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन बढ़ती ऊर्जा और खाद्य कीमतों ने इसके आयात बिल को बढ़ा दिया है।
ढाका, अगस्त 07: श्रीलंका के विनाशकारी संकट के बाद भारत के एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश की हालत बुरी तरह से खराब हो गई है और पेट्रोल की कीमत में करीब 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और शेख हसीना सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बांग्लादेश के कई शहरों में भयानक प्रदर्शन चल रहे हैं और रास्ते जाम कर दिए गये हैं। 1971 में मिली आजादी के बाद से ये पहला मौका है, जब सरकार ने एक बार में ईंधन की कीमतों में इतना बड़ा इजाफा किया है।

बांग्लादेश में भारी विरोध प्रदर्शन
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पूरे दक्षिण एशियाई देश में पेट्रोल पंपों को घेर लिया है और ईंधन की कीमत में अभूतपूर्व वृद्धि को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं, शेख हसीना सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में उछाल देखा गया है और पेट्रोल की कीमत में अचानक कमी आने की वजह से आर्थिक मंदी की आशंका भी बढ़ गई है। वहीं, बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बुरी तरह से गिर रहा है और देश के आर्थिक संकट में जाने का खतरा मंडरा रहा है। जिससे बचने के लिए सरकार ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि कर देश की अर्थव्यवस्था से सब्सिडी बोझ को कम कर दिया है, सरकार को उम्मीद है, कि इस कदम से हालात सुधरेंगे। हालांकि, इससे महंगाई पर और दबाव पड़ेगा, जो पहले से ही 7 फीसदी से ऊपर चल रही है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

सबसे तेज चल रही थी अर्थव्यवस्था
बांग्लादेश की 416 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था पिछले कई सालों से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन बढ़ती ऊर्जा और खाद्य कीमतों ने इसके आयात बिल को बढ़ा दिया है, जिससे सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित वैश्विक एजेंसियों से ऋण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तक पेट्रोल की कीमतें 51.2 प्रतिशत बढ़कर 130 टका (लगभग 108 रुपये) प्रति लीटर हो गई हैं, जबकि 95-ऑक्टेन गैसोलीन 51.7 प्रतिशत बढ़कर 135 टका (लगभग 113 टका) हो गया है, और देश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि, डीजल और मिट्टी के तेल में 42.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

देश में बढ़ गई है काफी महंगाई
पिछले नौ महीनों से बांग्लादेश की मुद्रास्फीति दर 6 प्रतिशत से ऊपर चल रही है, और जुलाई में 7.48% पर पहुंच गई है, इसका खामियाजा मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए भुगतना पड़ रहा है। निजी क्षेत्र के कर्मचारी मिजानुर रहमान ने रॉयटर्स को बताया कि, "हम पहले से ही अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब जब सरकार ने ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं, तो हम कैसे बचे रहेंगे?" ईंधन की कीमतों के अलावा, बढ़ती मुद्रास्फीति भी चावल, दाल, तेल, नमक, साथ ही कपड़ों और अन्य दैनिक जरूरतों जैसे रसोई के स्टेपल की कीमतों में वृद्धि के लिए बाध्य है।
तेजी से घट रहा विदेशी मुद्रा भंडार
बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से घट रहा है। सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं, जिसमें लक्जरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाना और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) सहित ईंधन आयात पर प्रतिबंध लगाना और डीजल से चलने वाले बिजली संयंत्रों को बंद करना शामिल है, वहीं बांग्लादेश में ऊर्जा बचाने के लिए बार-बार बिजली की कटौती का सहारा लिया जा रहा है। राज्य के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री नसरुल हामिद ने रॉयटर्स के हवाले से कहा कि, "नई कीमतें हर किसी को बर्दाश्त नहीं होंगी। लेकिन हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था। लोगों को धैर्य रखना होगा।" उन्होंने कहा कि, राज्य द्वारा संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को जुलाई से छह महीनों में तेल की बिक्री पर 8 बिलियन टका (85 मिलियन डॉलर) से अधिक का नुकसान हुआ है। मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक कीमतों में गिरावट के बाद कीमतों को समायोजित किया जाएगा।












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