'बुजुर्गों को आश्रम जाकर आराम करना चाहिए', अन्ना हजारे पर अभिजीत दीपके के बयान पर मचा बवाल

महाराष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक हलचल में इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर एक तीखा बयान दिया है। छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत में जब अभिजीत दीपके से पूछा गया कि क्या वे आंदोलन में अन्ना हजारे को शामिल करेंगे, तो उन्होंने बुजुर्गों को आंदोलनों से दूर रहने की नसीहत दे डाली।

अभिजीत दीपके का मानना है कि जिन लोगों की उम्र साठ से सत्तर साल से अधिक हो चुकी है, उन्हें अब खुद ही सभी सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से संन्यास ले लेना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर अन्ना हजारे का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे बुजुर्गों को अब आश्रम जाकर विश्राम करना चाहिए, न कि युवाओं के भविष्य के फैसलों में दखल देना चाहिए।

Abhijeet Deepke

युवा नेता दीपके ने जोर दिया कि देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य खुद उन्हें ही तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में आंदोलन का नेतृत्व और उसकी दिशा तय करने का अधिकार सिर्फ उन युवाओं को है जो जमीनी हकीकत का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, जिन लोगों की सक्रिय पारी खत्म हो चुकी है, उन्हें युवाओं के संघर्षों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

बुजुर्ग नेतृत्व बनाम युवा संघर्ष पर छिड़ी बहस

अन्ना हजारे भारतीय सामाजिक आंदोलनों के इतिहास में एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने सूचना के अधिकार से लेकर लोकपाल आंदोलन तक देश की राजनीति को गहराई से बदला है। ऐसे में एक नवोदित युवा संगठन के प्रमुख द्वारा उनके खिलाफ इस तरह की सख्त टिप्पणी करना कई लोगों को हैरान कर रहा है। आलोचकों का मानना है कि युवा जोश के साथ बुजुर्गों के अनुभव का मेल आंदोलनों को सफल बनाता है।

हालांकि, दीपके की दलील है कि वर्तमान समय की चुनौतियां और समस्याएं पुरानी पीढ़ियों की समस्याओं से बिल्कुल अलग हैं। आज का युवा डिजिटल युग में अपनी लड़ाई तकनीक, सोशल मीडिया और नए तरीकों से लड़ रहा है। ऐसे में युवाओं का मानना है कि उनके भविष्य का फैसला करने का अधिकार केवल उन्हीं के पास सुरक्षित रहना चाहिए और बुजुर्गों को सिर्फ मार्गदर्शन तक सीमित रहना चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी' की कैसे हुई शुरूआत?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी नाम की इस डिजिटल मुहिम की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं की तुलना उपहास के रूप में 'कॉकरोच' से की थी। न्यायाधीश के इसी बयान के विरोध में युवाओं ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक रूप से इस पार्टी का गठन किया था।

CJP ने युवाओं का मुद्दा उठाया

सोशल मीडिया पर शुरू हुए इस कैंपेन को देश के बेरोजगार युवाओं और छात्रों का जबरदस्त समर्थन मिला। विशेष रूप से हाल ही में हुई नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों और बेरोजगारी के खिलाफ इस डिजिटल हैंडल ने युवाओं की आवाज को उठाया। इसके चलते महज कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर इसके फॉलोअर्स की संख्या कई स्थापित राष्ट्रीय दलों से भी अधिक हो गई।

देखते ही देखते यह डिजिटल अभियान केवल वर्चुअल दुनिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक वास्तविक जमीनी आंदोलन का रूप ले लिया। देश भर के युवाओं ने खुद को इस नई डिजिटल क्रांति से जोड़ा और व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी। इसी पृष्ठभूमि में जब अन्ना हजारे जैसे स्थापित चेहरों के मार्गदर्शन पर सवाल पूछा गया, तो दीपके ने पुरानी पीढ़ी के नेतृत्व को खारिज कर दिया।

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