भारतीय RuPay को लॉन्च करेंगे चीन के गुलाम मुइज्जू.. क्या भारत के साथ संबंध सुधार रहा मालदीव?
Maldives to launch India's RuPay: मालदीव ने जल्द ही भारत की RuPay सर्विस को शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, इसके लिए अभी तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चीन के गुलाम माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाली सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा है, कि यह कदम "मालदीवियन रूफिया को बढ़ावा देगा।"
मुइज्जू सरकार ने ये फैसला, भारत और मालदीव के बीच तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बीच लिया है। वहीं, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि इस साल जनवरी के बाद लगातार खराब होते संबंध को सुधारने के लिए दोनों देशों की तरफ से कोशिशें की जा रही हैं और इसी कोशिश के तहत इस महीने मालदीव के विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया था।

RuPay क्यों लॉन्च करना चाहता है मालदीव?
ऐसी रिपोर्ट्स हैं, कि भारत औऱ मालदीव के बीच रिश्ते, पटरी पर लौटते नजर आ रहे हैं।
मालदीव के आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने हाल ही में अपने देश में भारत के RuPay की शुरुआत के बारे में बात की है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बात तब सामने आई है, जब वह चर्चा कर रहे थे, कि कैसे भारत और चीन द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्रा का उपयोग करने पर सहमत हुए हैं।
इस सप्ताह सरकारी पीएसएम न्यूज से बात करते हुए, सईद ने कहा, कि "भारत की रुपे सेवा के लॉन्च होने से मालदीवियन रूफिया (एमवीआर) को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।"
आपको बता दें, कि RuPay भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा शुरू किया गया एक वैश्विक कार्ड भुगतान नेटवर्क है। पीटीआई के मुताबिक, सईद ने कहा, कि मालदीव के भीतर रुपये में लेनदेन के लिए कार्ड का औपचारिक रूप से उपयोग किया जाएगा।
दोनों देशों के रिश्तों में नरमी तब दिखी थी, जब मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर ने 8-10 मई को भारत का दौरा किया था। उनकी आधिकारिक यात्रा के दौरान, भारत ने मालदीव सरकार को महत्वपूर्ण बजटीय सहायता प्रदान करते हुए, भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से 50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल को एक और वर्ष के लिए रोलओवर करने की घोषणा की।
उस दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर का आभार व्यक्त करते हुए, मूसा जमीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, कि "मैं मालदीव को 50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल के रोलओवर के साथ महत्वपूर्ण बजटीय सहायता देने के लिए डॉ. एस. जयशंकर और भारत सरकार को धन्यवाद देता हूं। यह सद्भावना का सच्चा संकेत है, जो मालदीव और भारत के बीच दीर्घकालिक मित्रता का प्रतीक है।"
मालदीव के विदेश मंत्री ने कर्ज के रोलओवर के लिए भारत से अनुरोध किया था, जिसके लिए भारत तैयार हो गया।
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने जमीर की नई दिल्ली यात्रा के दौरान कहा, कि मालदीव के साथ भारत के संबंध "पारस्परिक हितों" और "पारस्परिक संवेदनशीलता" पर निर्भर हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था, कि "दुनिया आज एक अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में, जैसा कि हमने Covid, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक कठिनाइयों के दौरान देखा, पड़ोसियों के साथ घनिष्ठ साझेदारी बहुत मूल्यवान है... यह हमारे सामान्य हित में है कि हम इस बात पर एक समझ पर पहुंचें, कि हम अपने संबंधों को कैसे बेहतर तरीके से आगे ले जाएं।"
जयशंकर के साथ अपनी बैठक पर टिप्पणी करते हुए, मालदीव के विदेश मंत्री जमीर ने कहा था, कि "हमने आपसी सम्मान और समझ द्वारा साझा की गई द्विपक्षीय साझेदारी के अपने लंबे इतिहास पर विचार किया।"
पिछले साल मोहम्मद मुइज्जू के मालदीव राष्ट्रपति चुनाव जीतने और सत्ता में आने के बाद ये पहली बार था, जब सरकार का कोई बड़ा मंत्री भारत की यात्रा कर रहा हो।
वहीं, इस साल अप्रैल में, भारत ने मालदीव को चीनी, गेहूं, चावल और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं के सीमित निर्यात की अनुमति दी थी।
रॉयटर्स के अनुसार, भारत सरकार ने पिछले महीने एक अधिसूचना में कहा था, कि एक अप्रैल से शुरू होने वाले 2024-2025 वित्तीय वर्ष में मालदीव को इन वस्तुओं के निर्यात को "निर्यात पर किसी भी मौजूदा या भविष्य के प्रतिबंध/निषेध से छूट दी जाएगी।"
नई दिल्ली और माले के बीच बढ़ते तनाव के बीच, चीन की अपनी पांच दिवसीय यात्रा से लौटने के बाद, राष्ट्रपति मुइज्जू ने 13 जनवरी को कहा था, कि मालदीव "एक छोटा द्वीप राष्ट्र हो सकता है, लेकिन यह दूसरों को देश को धमकाने की इजाजत नहीं देता।"
हालांकि, अब मोहम्मद मुइज्जू के रूख में नरमी आ चुकी है।
26 जनवरी को भारत के 75वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए, राष्ट्रपति मुइज्जू ने दोनों देशों के बीच "आपसी सम्मान और रिश्तेदारी की गहरी भावना" पर बनी "सदियों पुरानी दोस्ती" को याद किया था।
वहीं, पिछले साल नवंबर में कार्यभार संभालने के बाद इस साल दिए गये अपने पहले इंटरव्यू में मुइज्जू ने मार्च में कहा था, कि "भारत मालदीव का सबसे करीबी सहयोगी बना रहेगा, और इसको लेकर कोई सवाल ही नहीं है।" उन्होंने आगे कहा था, कि "चर्चा और विचार-विमर्श के माध्यम से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। मेरा यही मानना है।"
भारत से ज्यादा दूर क्यों नहीं जा सकता मालदीव?
भारत हमेशा से संकट के समय मालदीव के लिए 'फर्स्ट रिस्पाउंडर' यानि 'मदद के लिए सबसे पहुंचने वाला देश रहा है।' वहीं, मालदीव की विकास परियोजनाओं से लेकर वित्तीय सहायता पैकेज तक, द्वीप राष्ट्र में नई दिल्ली की बड़ी हिस्सेदारी है।
बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने चालू वित्त वर्ष में मालदीव के लिए 400 करोड़ रुपये का अनुदान निर्धारित किया है। यह वित्तीय वर्ष 2024 के लिए मालदीव के बजट का 1.5 प्रतिशत है।
दोनों देशों के बीच व्यापार भी मजबूत है, भारत 2023 में मालदीव का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरेगा। नवंबर 2022 में, नई दिल्ली ने द्वीपसमूह के सामने आने वाली वित्तीय चुनौतियों को कम करने में मदद के लिए बजटीय सहायता के रूप में 100 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की थी।
जबकि, राष्ट्रपति मुइज्जू के नेतृत्व में मालदीव भारत से दूर जा रहा है और चीन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक मदद की बोझ तले दबकर वह अपने दीर्घकालिक साझेदार नई दिल्ली को पूरी तरह से नहीं छोड़ सकता है। दोनों देशों को एक दूसरे की जरूरत है।
हालांकि, मुइज्जू अभी भी नई दिल्ली पर मालदीव की निर्भरता कम करने पर अड़े हुए हैं।
ऑब्जर्वर रिसर्च से जुड़ी एक स्वतंत्र रिसर्चर विनिता रेवी ने कहा, कि "हालांकि राष्ट्रपति मुइज्जू भारत के साथ मालदीव के द्विपक्षीय समीकरण में सामान्य स्थिति की वापसी का संकेत दे रहे हैं, लेकिन उनके अभियान की बयानबाजी की तुलना में, भारत पर अपने देश की निर्भरता को कम करने का उनका बड़ा लक्ष्य अभी भी कायम है।"












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