मालदीव: सुप्रीम कोर्ट ने भारत से मांगी मदद, राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने आर्मी को किया हाई अलर्ट
माले। मालदीव में सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच जबरदस्त बवाल देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक बंदियों को रिहा करने आदेश को मानने से इनकार करने के बाद बड़ी सड़कों पर लाखों लोगों ने संसद का घेराव कर लिया है। इस बीच राष्ट्रपति यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और जजों को बर्खास्त करने मन बना रहे हैं। वहीं, मालदीव सुप्रीम कोर्ट ने भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों से मदद मांगी है। मालदीव सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद ने भारत को इस विवाद में दखल देने को कहा है।

न्यायिक प्रशासन के चीफ हसन सईद ने कहा है कि उनके घर पर रिश्वतखोरी के आरोपों पर छापे मारे गए हैं और न्यायाधीशों को धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम भारत को मालदीव में कठोर उपाय सुझाने और कानूनी नियम लागू करने के लिए मदद करें। वहीं, सरकार ने पुलिस और सेना को आदेश दिया है कि वे राष्ट्रपति की गिरफ्तारी या उन पर महाभियोग चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दें।
मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आतंकवाद के सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करते हुए सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लंदन में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे नशीद और उनके समर्थकों की रिहाई की उम्मीद बढ़ी है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद से ही मालदीप की राजनीति में तूफान चरम पर है। कोर्ट के फैसला सुनाने के बाद से ही नशीद के समर्थक नारेबाजी करने लगे और राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की तत्काल इस्तीफे की मांग करने लगे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। रविवार को नशीद और दूसरे बंदियों का रिहाई से सरकार के इंकार के बाद लोग फिर सड़कों पर हैं।












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