Maldives: सिर्फ 45 दिनों तक सामान खरीदने की क्षमता, खजाना खत्म, भारत आ रहे मालदीव के राष्ट्रपति को क्या चाहिए?
Maldives President Mohammad Muizzu's visit to India marks a crucial attempt to secure an economic bailout as the nation faces severe financial challenges and dwindling foreign reserves.
Maldives President India Visit: पर्यटन के लिए स्वर्ग माने जाने वाले मालदीव में भारतीय पर्यटकों के बहिष्कार ने देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया और अब इस उम्मीद के साथ देश के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू आज भारत आ रहे हैं, कि दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य हो जाए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव के राष्ट्रपति के भारत दौरे का असल मकसद एक बेलऑउट पैकेज हासिल करना है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके, क्योंकि देश के खरीदने की क्षमता अब सिर्फ 45 दिनों के लिए ही बची है।

मोहम्मद मुइज्जू की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब द्वीपसमूह राष्ट्रीय ऋण को चुकाने में डिफॉल्ट होने की तरफ बढ़ रहा है और ऐसी आशंका है, कि अगर भारत से बेलऑउट पैकेज ना मिले, तो वो डिफॉल्ट हो सकता है और आर्थिक संकट में फंस सकता है। पिछले साल मालदीव में सत्ता में आने के बाद मुइज्जू की यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है।
दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद मुइज्जू ने अपना चुनावी कैम्पेन 'इंडिया ऑउट' के नारे के साथ चलाया था और उनकी जीत के बाद उन्होंने और उनके मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कई विवादित बयान दिए, जिससे दोनों देशों के बीच के संबंधों को काफी नुकसान पहुंचा। सत्ता में आने के बाद उन्होंने मालदीव में तैनात भारतीय सैनिकों को देश से बाहर कर दिया, हालांकि धीरे धीरे उन्हें भारत की ताकत का अहसास हुआ और उन्होंने संबंधों को सुधारने की पहल शुरू कर दी, जिसमें इस साल प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण में दिल्ली का दौरा शामिल था।
मालदीव पर मंडरा रहा आर्थिक संकट कितना बड़ा है?
मालदीव के सामने आर्थिक संकट मुंह खोले खड़ा है, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार का बहुत जल्द खत्म होना शामिल है, उसने मालदीव की भारत पर निर्भरता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। सितंबर महीना खत्म होने के बाद मालदीव के पास सिर्फ 440 मिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था, जिससे वो सिर्फ 45 दिनों तक ही विदेशों से आयात कर सकता है।
इस भयावह वित्तीय स्थिति ने अटकलों को जन्म दिया है, कि भारत में मोहम्मद मुइज्जू के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी भंडार को मजबूत करने के लिए वित्तीय बचाव पैकेज हासिल करना हो सकता है।
भारत की यात्रा से पहले मोहम्मद मुइज्जू ने दूसरे देशों से भी मालदीव के लिए समर्थन मांहा था, जिसमें तुर्की और चीन जैसे देश शामिल हैं। भारत आने से पहले उन्होंने चीन का दौरा किया था और इस साल जनवरी में उनकी बीजिंग यात्रा को भारत के प्रति कूटनीतिक अपमान के रूप में देखा गया। ऐसा इसलिए, क्योंकि अभी तक मालदीव में बनने वाला हर राष्ट्रपति अपने पहले विदेशी दौरे के लिए भारत को चुनता रहा है, लेकिन मोहम्मद मुइज्जू ने इस परंपरा को तोड़ दिया।
लेकिन, इन चुनौतियों के बावजूद, मोहम्मद मुइज्जू की भारत की यात्रा, मालदीव की विदेश नीति में संभावित मोड़ का संकेत देती है, जो अपनी आर्थिक चुनौतियों से निपटने की तत्काल आवश्यकता से प्रेरित है।
मालदीव के विश्लेषक और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय में लेक्चरर अजीम जहीर ने बीबीसी की एक रिपोर्ट में इस यात्रा को मालदीव के लिए भारत पर अपनी निर्भरता के बारे में अहसास का एक महत्वपूर्ण बिंदु बताया। जहीर ने कहा, "राष्ट्रपति मुइज्जू की यात्रा कई मायनों में एक बदलाव है।" उन्होंने कहा, कि "सबसे खास बात यह है, कि यह यात्रा इस बात का अहसास कराती है, कि मालदीव भारत पर कितना निर्भर है, एक ऐसी निर्भरता जिसे कोई भी अन्य देश आसानी से पूरा नहीं कर पाएगा।" यह स्वीकारोक्ति मालदीव के लिए भारत के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है, खासकर आर्थिक संकट के समय में।

मालदीव पर डिफॉल्ट होने का खतरा बढ़ा
मालदीव की वित्तीय समस्याओं ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान भी खींचा है। पिछले महीने मूडीज ने देश की क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाए जाने के कारण डिफॉल्ट जोखिमों को कम कर दिया था। देश का सार्वजनिक ऋण लगभग 8 अरब डॉलर तक बढ़ गया है, जिसमें चीन और भारत दोनों को दिए जाने वाले महत्वपूर्ण ऋण शामिल हैं।
मोहम्मद मुइज्जू के इस दावे के बावजूद, कि चीन ने पांच साल के लिए ऋण भुगतान को स्थगित करने पर सहमति व्यक्त की है, बीजिंग ने अभी तक मालदीव के लिए ठोस वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं की है। जिसने मोहम्मद मुइज्जू की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया है।
माना जा रहा है, कि मोहम्मद मुइज्जू चीन को लेकर थोड़े निराश हो सकते हैं और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को फिर से भरने के लिए "400 मिलियन डॉलर की मुद्रा स्वैप डील" सहित वित्तीय बेलआउट हासिल करना उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हो सकती है।
हालांकि न तो भारतीय और न ही मालदीव के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है, कि यात्रा के एजेंडे में बेलऑउट पैकेज को शामिल किया गया है या नहीं, लेकिन विशेषज्ञों और अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है, कि यह चर्चा का केंद्र बिंदु होगा। मालदीव के एक वरिष्ठ संपादक ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी को बताया है, कि "मुइज्जू की यात्रा की मुख्य प्राथमिकता अनुदान सहायता और ऋण चुकौती के पुनर्गठन के रूप में वित्तीय हेल्पलाइन को सुरक्षित करना है।" जो मालदीव की गंभीर आर्थिक चुनौतियों के समाधान की तलाश में यात्रा की महत्वपूर्ण प्रकृति की ओर इशारा करता है।












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