हृदय परिवर्तन, आर्थिक तंगी या ब्लैकमेलिंग? मालदीव के 'चायना मैन' राष्ट्रपति की भारत की तारीफ के पीछे ये है सच

Maldives president Muizzu Called India Close Ally: पिछले साल नवंबर महीने में सत्ता में आने के बाद से, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपने भारत विरोधी रुख के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी घरेलू और वैश्विक स्तर पर आलोचना हो रही है। भारतीय सैनिकों को वापस भेजने से लेकर चीन की ओर झुकाव तक, मुइज्जू ने खुलकर एंटी-इंडिया कैम्पेन चलाया है।

लेकिन, मुइज़ू के एक बयान को लेकर उस वक्त एक्सपर्ट्स हैरान हो गये, जब उन्होंने नई दिल्ली को अपने देश का "सबसे करीबी सहयोगी" बताते हुए भारत से माले को कर्ज चुकाने में राहत देने का आग्रह किया है।

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मोहम्मद मुइज्जू का ये बयान चौंकाने वाला है, क्योंकि भारत के साथ एक के बाद एक समझौतों को रद्द करने के बाद भारत को लेकर उनकी तारीफ एक्सपर्ट्स के गले नहीं उतर रही है। लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि मोहम्मद मुइज्जू का वास्तव में हृदय परिवर्तन हुआ है, फिर मालवीद की आर्थिक तंगी ने उन्हें भारत की तारीफ करने के लिए मजबूर किया है, या फिर भारत से कर्ज चुकाने में राहत मांगना, मोहम्मद मुइज्जू की कोई नई चाल है?

मोहम्मद मुइज्जू का हृदय परिवर्तन?

नवंबर 2023 में पदभार संभालने के बाद पहली बार एक स्थानीय मीडिया ऑउटलेट को दिए इंटरव्यू में मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है, कि भारत मालदीव को सहायता प्रदान करने में सहायक रहा है और उसने सबसे बड़ी संख्या में मालदीव में परियोजनाओं को लागू किया है।

उन्होंने आगे कहा,कि "भारत मालदीव का सबसे करीबी सहयोगी बना रहेगा और इसके बारे में कोई सवाल ही नहीं है।"

मालदीव के राष्ट्रपति का ये बयान उस वक्त आया है, जब भारत ने अपने सैनिकों के पहले बैच को मालदीव से बुला लिया है और 10 मई तक सभी सैनिकों को मालदीव से वापस आ जाना है।

मुइज्जू ने भारत से मांगी मदद

इंटरव्यू के दौरान, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से आर्थिक संकट के समय मालदीव की मदद भी मांगी है। दरअसल, भारत ने मालदीव के विकास कार्यों को लेकर अलग अलग सरकारों को मदद दी है और उसी ऋण भुगतान को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से मदद मांगी है।

उन्होंने कहा, कि "हमें जो स्थितियां विरासत में मिली हैं, वे ऐसी हैं, कि भारत से बहुत बड़े पैमाने पर कर्ज लिया जाता है। इसलिए, हम इन ऋणों के पुनर्भुगतान ढांचे में उदारताएं तलाशने के लिए चर्चा कर रहे हैं।"

मुइज्जू ने इस तथ्य को स्वीकार किया, कि मालदीव पर भारत का बहुत बड़ा कर्ज़ है, और मालदीव फिलहाल इस स्थिति में नहीं है, कि वो भारतीय कर्ज को चुका सके।

मालदीव की मीडिया ने राष्ट्रपति मुइज्जू के हवाले से कहा है, कि इसकी वजह से वर्तमान में मालदीव की सर्वोत्तम आर्थिक क्षमताओं के अनुसार ऋण चुकाने के विकल्प तलाशने के लिए भारत सरकार के साथ चर्चा की जा रही है। इसके अलावा, मुइज्जू ने कहा है, कि मालदीव की लगातार मदद के लिए उन्होंने भारत सरकार का आभार भी जताया है।

मोहम्मद मुइज्जू ने कहा, कि "मैंने अपनी बैठक के दौरान प्रधान मंत्री मोदी को यह भी बताया, कि मेरा इरादा किसी भी चल रही परियोजना को रोकने का नहीं है। इसके बजाय, मैंने उन्हें संबंधों को मजबूत करने और उनमें तेजी लाने की इच्छा व्यक्त की।"

मालदीव पर भारत का कितना बकाया है?

पिछले साल के अंत तक मालदीव पर भारत का लगभग 400.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर बकाया था।

भारत समर्थक नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के प्रशासन के नेतृत्व वाली मालदीव की पिछली सरकार ने भारतीय निर्यात और आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक) से 1.3 मिलियन डॉलर का ऋण लिया था। इसे मिलाकर पिछले साल के अंत तक मालदीव की भारत पर बकाया राशि 6.2 अरब मालदीवियन एमवीआर हो गई है।

मोहम्मद मुइज्जू की एक और ब्लैकमेलिंग?

भारत की तारीफ करना और ऋण को लेकर मदद मांगना, क्या ये मोहम्मद मुइज्जू की एक और चाल है? ये सवाल इसलिए हैं, अगर भारत ऋण चुकाने में मोहलत देने से इनकार करता है, तो मोहम्मद मुइज्जू अपनी जनता को ये बताने की कोशिश करेंगे, कि भारत को लेकर उनकी सरकार की जो नीति है, वो सही है। और अगर भारत मोहलते देता है, तो मोहम्मद मुइज्जू की सरकार को राहत मिलेगी और वो खुलकर अपने चीनी एजेंडे को आगे लेकर जाएंगे।

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