भारत का 'प्रोजेक्ट मालदीव' कैसे हो गया फेल? मोहम्मद सोलिह को जिताने सरकार ने झोंक रखी थी ताकत
Maldives President Election News: मालदीव में मौजूदा इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के खिलाफ राजधानी माले के मेयर मोहम्मद मुइज्जू ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है, जिसे हिंद महासागर द्वीपसमूह के नवजात लोकतंत्र के साथ-साथ, भारत और चीन के बीच चल रहे प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखा गया था।
45 साल के मोहम्मद मुइज्जू, उस पार्टी का नेतृत्व करते हैं, जिसने चीनी ऋणों का स्वागत किया था और जो मालदीव में 'इंडिया ऑउट' कैंपेन चला रहा था।
मालदीव के चुनाव आयोग ने कहा है, कि मौजूदा मुकाबले में मुइज्जू ने 54.06 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जिसके बाद निवर्तमान इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने आधी रात से कुछ देर पहले अपनी हार स्वीकार कर ली। इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने अपनी हार स्वीकार करते हुए मोहम्मद मुइज्जू को जीत की बधाई दी और उन्होंने देश को लोगों को लोकतांत्रिक चुनाव के लिए बधाई दी।
61 साल के मोहम्मद सोलिह, 17 नवंबर तक राष्ट्रपति बने रहेंगे।

क्यों हारे राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह?
45 साल के मोहम्मद मुइज्जू, 8 सितंबर को पहले दौर के मतदान के दौरान आश्चर्यजनक रूप से सबसे आगे उभरे थे और उन्हें लगभग 46 प्रतिशत मत मिले थे।
वहीं, मोहम्मद सोलिह के हारने के पीछे की सबसे बड़ी वजह पार्टी के अंदर पड़ी फूट थी और चुनाव से पहले पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नसीद ने सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) को तोड़ते हुए अपनी नई पार्टी बना ली थी। पहले दौर के मतदान में सोलिह को 39 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि पार्टी से बगावत करने वाले मोहम्मद नसीद को 7 प्रतिशत वोट मिले थे।
दिलचस्प ये था, कि सोलिह, मोहम्मद मुइज्जू से 7 प्रतिशत वोट से ही पीछे रहे थे।
मोहम्मद मुइज्जू की ये जीत, हिंद महासागर में भारत और चीन के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा पर काफी अहम प्रभाव डालने वाला है, क्योंकि अब मालदीव में अगले पांच सालों में चीन का वर्चस्व होगा और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन इस मौके को छोड़ने वाला नहीं है।
एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेंसी ने मुइज्जू की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव के एक शीर्ष अधिकारी मोहम्मद शरीफ के हवाले से कहा, कि "हमारे सभी पड़ोसियों और द्विपक्षीय साझेदारों से हमारी स्वतंत्रता और संप्रभुता का पूरी तरह से सम्मान करने का आह्वान हम करते हैं।"
उनका ये निशाना भारत की तरफ था, क्योंकि मोहम्मद सोलिह की सरकार के दौरान भारतीय वायुसेना का एक विमान और कई भारतीय सैनिक मालदीव में रहते थे, जिसके खिलाफ ही मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी ने देश में 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया था।
हालांकि, भारत ने मोहम्मद सोलिह को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई।

सोलिह को जिताने के लिए भारत ने क्या-क्या किया?
मालदीव हाल के वर्षों में हिंद महासागर की भू-राजनीति में विवाद का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। यही कारण है, कि पर्यवेक्षकों ने इस चुनाव की व्याख्या चीन और भारत के बीच प्रभाव के लिए संघर्ष के रूप में की थी।
खासकर तब से, जब निवर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, चीन के पिट्ठू बने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम के खिलाफ भारत समर्थक राजनीति करने लगे थे।
मालदीव में सितंबर 2018 में हुए पिछले राष्ट्रपति चुनाव को व्यापक रूप से भारत की जीत और चीन की हार के रूप में देखा गया था। अब्दुल्ला यामीन, अब्दुल गयूम के नेतृत्व वाले पिछले प्रशासन के दौरान, मालदीव चीन के बेल्ट और रोड इनिशिएटिव में शामिल हो गया था, जो भारत के लिए बहुत बड़ा झटका था।
इसके अलावा, 2018 से पहले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन, चीन-मालदीव मैत्री पुल जैसी बड़े पैमाने की परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे थे। वहीं, उन्होंने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर भी कर लिया था, लेकिन उसी वक्त इलेक्शन आ गया और अब्दुल्ला यामीन की सरकार चुनाव हार गई थी।
पिछले कई महीनों से भारत लगातार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की मदद कर रहा था और उनकी सरकार के साथ आर्थिक परियोजनाओं पर भारत ने कई समझौते साइन किए थे, ताकि वो देश में विकास योजनाओं को लांच कर सके, और चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत मिल सके।

इसी साल जुलाई महीने में भारत ने मालदीव के साथ उच्च प्रभाव वाले सामुदायिक विकास परियोजना योजना के दूसरे चरण के तहत 9 नए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे।
उस वक्त भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट करते हुए कहा था, कि "मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के साथ आज एक गर्मजोशी भरी और सार्थक बैठक हुई है। हमारी विकास साझेदारी में निरंतर प्रगति के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित हुआ। यह हमारे पड़ोसी के आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में सीधे योगदान दे रहा है। हमने हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि पर दृष्टिकोण साझा किए और हमारा सहयोग उन लक्ष्यों को कैसे आगे बढ़ाता है। नेबरहुड फर्स्ट और SAGAR दृष्टिकोण के लिए एक अच्छा दिन रहा।"
इसके अलावा, भारत और मालदीव के बीच वॉली कोर्ट के डेवलपमेंट, मानसिक स्वास्थ्य इकाई, स्कूल डिजिटलीकरण परियोजना, अस्पतालों और स्कूलों को अपग्रेड करने और संस्कृति के संरक्षण पर विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
उस वक्त मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा था, कि "एक बार ये कार्यक्रम पूरा होने पर, भारतीय अनुदान सहायता के तहत आर.अनगोफारू अस्पताल में नई मानसिक स्वास्थ्य इकाई, व्यक्तियों के लिए मनोसामाजिक वातावरण सुनिश्चित करेगी और बेहतर सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए हमारी प्रगति में सहायता करेगी।"
हालांकि, पार्टी में पड़ी फूट की वजह से मोहम्मद सोलिह चुनावी जीत हासिल करने में नाकाम रहे।
वहीं, मोहम्मद मुइज्जू की जीत का मतलब ये है, कि चीन एक बार फिर से मालदीव में एक्टिव हो जाएगा और संभावना इस बात को लेकर है, कि जो भी भारतीय प्रोजेक्ट हैं, उन्हें कैंसिल किया जा सकता है।












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