भारतीय जवानों के मुद्दे पर मालदीव के राष्ट्रपति से मिले किरेन रिजिजू, जानिए भारत के लिए क्यों खास है ये द्वीप?
मालदीव के नव निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने देश के पांचवे राष्ट्रपति के तौर पर शुक्रवार को शपथ लिया है। उनके शपथ ग्रहण के दौरान भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद थे।
इस बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने औपचारिक रूप से भारत सरकार से द्वीप राष्ट्र से अपनी सैन्य उपस्थिति वापस लेने का अनुरोध किया है। राष्ट्रपति के अनुरोध को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा एक आधिकारिक बयान के माध्यम से सार्वजनिक किया गया है।

बयान के मुताबिक मालदीव अपने देश से दूसरे देशों की सेनाओं को वापस भेज रहा है। इसी कड़ी में भारत के सैनिक भी स्वदेश लौटेंगे। मालदीव ने शनिवार को इस आशय की घोषणा की। नव-शपथ ग्रहण करने वाले राष्ट्रपति द्वारा की गई घोषणा में कहा गया कि मालदीव को उम्मीद है कि भारत लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान करेगा।
शपथ ग्रहण के एक दिन बाद, मालदीव के राष्ट्रपति ने आधिकारिक घोषणा में कहा कि रडार और निगरानी विमान तैनात करने के लिए तैनात भारत के सैनिकों को वापस भेजा जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव के राष्ट्रपति ने मुइज्जू ने औपचारिक रूप से यह अनुरोध तब किया जब उन्होंने दिन में राष्ट्रपति कार्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की। रिजिजू भारत सरकार में पृथ्वी विज्ञान मंत्री हैं। मंत्री से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुइज्जू ने इमरजेंसी मेडिकल इवैक्यूएशन में इस्तेमाल हुए दो हेलीकॉप्टरों की भूमिका को स्वीकार किया है।
इसके अलावा दोनों नेताओं ने भारत के सहयोग से मालदीव में चल रही कई परियोजनाओं की समीक्षा भी की। इस बीच, मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर मालदीव के साथ देश के संबंधों को मजबूत किए जाने की बात कही है। मंत्री ने कहा कि उन्हें मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा बुलाए जाने का सौभाग्य मिला।
आपको बता दें कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, जिन्हें चीन समर्थक के रूप में देखा जाता है, उन्होंने भारतीय सैन्य कर्मियों को बेदखल करने और भारत के साथ व्यापार को संतुलित करने के वादे पर चुनावी अभियान चलाया था और चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई है। जबकि, उन्होंने जिस राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को चुनाव में हराया, वो भारत समर्थक थे।
हालांकि मालदीव में भारतीय सैनिकों की संख्या सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वहां 70 से 75 सैनिक हैं।












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