चीन के नए मैप पर भारत के साथ आए 5 देश, कहा- दक्षिण चीन सागर पर बीजिंग का दावा गलत
चीन ने 28 अगस्त को अपना आधिकारिक नक्शा जारी किया था। इसमें चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चीन, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर आदि इलाकों को अपना बताया था। लेकिन इसे लेकर अब चीन का विरोध बढ़ता जा रहा है।
भारत के बाद अब फिलीपींस, मलेशिया, ताइवान, वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी चीन द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए मानचित्र को खारिज कर दिया है। इन सभी देशों ने दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की क्षेत्रीय संप्रभुता को खारिज कर दिया है।

इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी देशों ने स्पष्ट रूप से मानचित्र पर दावों की वैधता को खारिज कर दिया। सबसे पहले भारत ने चीनी मैप को लेकर आपत्ति जताई थी तथा इसे लेकर डिप्लोमैटिक विरोध दर्ज कराया था।
मानचित्र को अस्वीकार करते हुए, मलेशियाई विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन के दावों को रत्ती भर भी मान्यता नहीं देता। मलेशिया ने कहा कि उसने इस मुद्दे पर राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।
वियतनाम ने भी चीन के दावों पर असहमति जताई है। वियतनाम के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फाम थू हैंग ने एक बयान में कहा कि उनका राष्ट्र दक्षिण चीन सागर में चीन के सभी दावों का दृढ़ता से विरोध करता है। फिलीपींस ने कहा- चीन को जिम्मेदारी से फैसले लेते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए।
हालांकि मैप पर बेफिक्र दिखने की कोशिश में, चीन ने मैप के प्रकाशन को एक सामान्य प्रक्रिया करार दिया और कहा कि यह मैप चीन की संप्रुभता और अखंडता को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। चीन ने दावा किया यह हिस्सा कानूनन उसका है। चीन ने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इसे समझेंगे और समझदारी के साथ इस पर अपना स्टैंड लेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दक्षिण चीन सागर पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है। चीन के सक्षम अधिकारी नियमित रूप से हर साल विभिन्न प्रकार के मानक मानचित्र प्रकाशित करते हैं, जिसका उद्देश्य समाज के सभी क्षेत्रों के लिए मानक मानचित्र उपलब्ध कराना और मानचित्रों के मानकीकृत उपयोग के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना है।












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