ब्रिटेन में नए भर्ती हो रहे डॉक्टरों में सबसे अधिक भारतीय, नर्स की आधी सीटों पर भी कब्जा, विशेषज्ञों ने चेताया
ब्रिटेन में भर्ती हो रहे नए विदेशी डॉक्टर और नर्सों में सबसे अधिक हिस्सेदारी भारतीयों की है। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कुशल कार्य वीजा पर अधिकांश स्वास्थ्य सेवा देने वाले कर्मचारी गैर यूरोपीय देशो से आए हैं, जिसमें भारत से आए लोगों की संख्या सबसे अधिक है।
यह रिपोर्ट ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी द्वारा बनाई गई है। इसमें कहा गया है कि देश की वीजा नीति 2022-23 में अभूतपूर्व संख्या में विदेशी श्रमिकों को स्वास्थ्य और देखभाल के काम में लाएगी।

इस रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में नए भर्ती किए गए विदेशी डॉक्टरों में से 20 फीसदी भारत से संबंध रखते हैं वहीं, नर्स की संख्या 46 फीसदी है। इस लिस्ट में भारत के बाद क्रमशः नाइजीरिया, पाकिस्तान और फिलीपींस का नंबर आता है। हैरानी की बात ये है कि इसमें सिर्फ 1 फीसदी डॉक्टर यूरोपीय संघ के देशों से हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2022 में प्रवजन प्रमाणपत्र (COS) का उपयोग करने वाले श्रमिकों के लिए नागरिकता के शीर्ष देशों में से एक था। इसके बाद जिम्बाब्वे और नाइजीरिया का स्थान था।
ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) के अनुसार, ब्रिटेन के स्वास्थ्य और सामाजिक कार्य क्षेत्र में रिक्तियां जुलाई और सितंबर 2022 में 217,000 तक पहुंच गईं। हालांकि 2022 के अंत और 2023 की शुरुआत में इसमें कुछ हद तक गिरावट आई।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तक वर्ष में 57,700 देखभाल श्रमिकों को कुशल कार्य वीजा प्राप्त हुआ। पिछले साल इस क्षेत्र के लिए लगभग 58,000 वीजा जारी किए गए थे।
यह अध्ययन रोजगार समूह रीवेज द्वारा शुरू किया गया था। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी कि ब्रिटेन में विदेशी चिकित्सकों पर बहुत अधिक निर्भर होने के भी जोखिम हो सकते हैं।
द गार्जियन में माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी के निदेशक डॉ मेडेलीन सिम्पसन के हवाले से कहा गया है, "डॉक्टरों और नर्सों की अंतरराष्ट्रीय भर्ती से बहुत फायदा हुआ है। लेकिन विदेशी भर्तियों पर इतना अधिक निर्भर रहना जोखिम भी लाता है।"
डॉ. सिम्पसन ने कहा कि अस्थायी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी शोषण के प्रति संवेदनशील होते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी भर्तियों में तेजी से वृद्धि की वजह से स्थानीय डॉक्टरों के लिए समस्या पैदा हो सकती है।
आपको बता दें कि ब्रिटेन में सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में लंबे वक्त से वेतन बढ़ाने को लेकर कर्मचारी हड़ताल पर हैं। एनएचएस में 1.15 लाख भारतीय डॉक्टर हैं, जिनमें से ज्यादातर हड़ताल में शामिल नहीं हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के गांवों और पिछड़े इलाकों में ब्रिटिश डॉक्टर काम करने नहीं जाते हैं। ऐसे में बस्तियों में भारतीय डॉक्टर ही जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि भारतीय डॉक्टरों के काम करने से स्थानियों में नाराजगी का भाव रहता है।
एनएचएस की भीतरी पड़ताल में सामने आया है कि भारत में प्रशिक्षित डॉक्टर भेदभाव का शिकार हैं। हाल में ही जनरल मेडिकल काउंसिल ने एक स्टडी में पाया कि भारतीय डॉक्टर के कामकाज के आकलन की पांच गुना अधिक संभावना होती है। किसी भारतीय डॉक्टर की शिकायत पर जांच की संभावना बढ़ जाती है।












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