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Adani-Hindenburg: चीन के इशारे पर हिंडनबर्ग की अडानी को डूबोने वाली रिपोर्ट? मास्टरमाइंड अनला चेंग की साजिश?

Adani-Hindenburg News: दुनिया के पांच सबसे अमीर कारोबारियों की लिस्ट में शामिल होने वाले गौतम अडानी की कंपनी अडानी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में किसी बम धमाके जैसा असर किया, जिसकी गूंज अभी भी सुनाई दे रही है।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने ना सिर्फ अडानी ग्रुप के 100 अरब डॉलर को पानी में मिला दिया, बल्कि अडानी ग्रुप की इज्जत पर भी हमला किया था, लेकिन अब हिंडनबर्ग की रिपोर्ट गंभीर सवालों के घेरे में है और दावा किया गया है, कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

Adani-Hindenburg News

सुप्रीम कोर्ट में हिंडनबर्ग पर गंभीर आरोप

वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने हिंडनबर्ग मामले में चीनी कनेक्शन होने का आरोप लगाया है और उसपर 'स्मोकिंग गन' का लेबल लगाया है, जिसकी वजह से अडानी के शेयर्स में विनाशकारी गिरावट दर्ज की गई थी। सेबी ने इस हफ्ते खुलासा किया था, कि किंगडन कैपिटल मैनेजमेंट एलएलसी, एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ने हिंडनबर्ग को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाने में मदद की थी।

ये काफी सनसनीखेज आरोप हैं, क्योंकि अगर ये सच है, तो इस साजिश ने ना सिर्फ अडानी समूह को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भारत की बढ़ती साख पर चोट किया है। ये आरोप इस बात के भी संकेत देते हैं, विकसित हो रहे भारत के खिलाफ कई ऐसे इंटरनेशनल प्लेयर्स हैं, जो भारत की तरक्की के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबे पोस्ट में जेठमलानी ने आरोप लगाए हैं, कि किंगडन कैपिटल मैनेजमेंट LLC चलाने वाले मार्क किंगडन ने अडानी ग्रुप की रिपोर्ट बनाने के लिए हिंडनबर्ग को काम पर रखा था। जेठमलानी की "स्मोकिंग गन" मार्क किंगडन की पत्नी अनला चेंग हैं, जो किंगडन मास्टर फंड में महत्वपूर्ण शेयरों वाली एक चीनी-अमेरिकी नागरिक हैं।

अनला चेंग अमेरिका की नागरिकता के साथ वॉशिंगटन में चीनी सरकार के लिए एक कुख्यात लॉबिस्ट हैं और ये भारत विरोधी उस गैंग का हिस्सा है, जिसमें जॉर्ज सोरोस जैसे शख्स हैं, जिन्होंने पिछले दिनों भारत में हुए चुनाव को प्रभावित करने के इरादे से दुनियाभर के अखबारों में भारतीय लोकतंत्र को मलीन करने वाले लेख लिखवाए थे।

जेठमलानी ने लिखा, "वह #SupChina की सीईओ थी, जो एक चीन समर्थक मीडिया की मुखैटा थी, जो एक व्हिसलब्लोअर द्वारा अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष चीन के लिए समाचार तोड़फोड़ का आरोप लगाने के बाद द चाइना प्रोजेक्ट बन गई।"

जेठमलानी ने सुझाव दिया, कि चेंग और किंगडन ने जो किया है, उसका मकसद अडानी समूह द्वारा दुनिया भर में चीनी हितों को ब्लॉक करने के कारण हुई है, जिसमें इजरायल के हाइफा बंदरगाह और श्रीलंका के जाफना के पास कोयला परियोजनाओं के लिए चीनी कंपनियों को पछाड़ना भी शामिल है।

आपको बता दें, कि इजराइल के हाइफा बंदरगाह और रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण श्रीलंका के जाफना के पास कोयला परियोजना का कॉन्ट्रैक्ट अडानी ने जीता है और इन दोनों प्रोडेक्ट्स का हाथ से निकलना चीन को बौखला रहा है।

जेठमलानी ने दावा किया, "अडानी समूह के साथ उनका स्पष्ट झगड़ा है।"

जेठमलानी ने मुख्य तौर पर तीन सवाल उठाए हैं।

1- किंगडन को KMIL से किसने पहचान कराई, KMIL ने किंगडन पर क्या लगाया, और क्या इसने प्रमुख के रूप में शॉर्ट सेल में भाग लिया?"

2- क्या हिंडनबर्ग की मदद करने वाले सभी भारतीय व्यक्तियों और संस्थाओं को शॉर्ट-सेलिंग योजना के बारे में पता था और इससे लाभ हुआ?" जेठमलानी ने राजनीतिक हस्तियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि विपक्ष इसमें शामिल हो सकता है।

3- क्या इन लोगों और संस्थाओं को चीनी लिंक के बारे में पता था?

सेबी ने हिंडनबर्ग रिसर्च LLC को दिए गए नोटिस में संगठन पर अडानी के शेयर की कीमतों में घबराहट पैदा करने के लिए गलत बयानी और सलेक्टेड खुलासे करने का आरोप लगाया। हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट जारी होने से पहले किंगडन को इसके बारे में सूचित करने से इनकार किया है और दावा किया है, कि किंगडन ने उनके साथ ट्रेडिंग संबंधी जानकारी साझा नहीं की। यह दावा किया गया, कि कोटक महिंद्रा समूह ने अपने निवेशक साझेदार द्वारा अडानी के शेयरों को शॉर्ट करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऑफशोर फंड ढांचे का निर्माण और देखरेख की।

हालांकि, कोटक महिंद्रा बैंक ने इस दावे को खारिज कर दिया।

कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, कि "हिंडनबर्ग कभी भी फर्म का ग्राहक नहीं रहा है और न ही वह कभी फंड में निवेशक रहा है। फंड को कभी पता नहीं चला, कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक का भागीदार है। केएमआईएल को फंड के निवेशक से यह पुष्टि और घोषणा भी मिली है, कि उसके निवेश किसी अन्य व्यक्ति की ओर से नहीं, बल्कि एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में किए गए थे।"

दो प्रोजेक्ट्स छिनने से क्यों बौखलाया चीन?

चीन ने साल 2022 के अंत तक द्वीप राष्ट्र श्रीलंका में करीब 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था, जो इसका सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक है। अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से श्रीलंका के कम उपयोग किए जाने वाले दक्षिणी हंबनटोटा बंदरगाह की आलोचना की है, और इसे अस्थिर और चीन की "ऋण-जाल कूटनीति" का हिस्सा बताया है।

इसके अलावा, पिछले साल श्रीलंका में गौतम अडानी के बंदरगाह प्रोजेक्ट में अमेरिका ने भारी- भरकम निवेश करने की घोषणा की थी, और उसे भी चीन के लिए बड़ा झटका माना गया। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अरबपति गौतम अडानी द्वारा विकसित किए जा रहे श्रीलंका की राजधानी में एक बंदरगाह टर्मिनल के लिए अमेरिका 553 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों के नजदीक होने की वजह से, कोलंबो का बंदरगाह हिंद महासागर में सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। सभी कंटेनर जहाजों में से लगभग आधे, इसके जल क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। लिहाजा, श्रीलंका के बंदरगाहों की महत्ता काफी ज्यादा बढ़ जाती है और इसीलिए, भारत के लिए ये क्षेत्र और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

जॉर्ज सोरोस का एंटी-इंडिया एजेंडा समझिए

ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग (OCCRP) को फंड करने वाले हंगरी मूल के अमेरिकी कारोबारी और हेज फंड मैनेजर जॉर्ज सोरोस, गौतम अडानी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों के खिलाफ हाथ धोकर पीछे पड़े रहे हैं। जॉर्ज सोरोस के इशारे पर काम करने वाली संस्था OCCRP ने पिछले साल जनवरी में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद, फिर से प्रधानमंत्री मोदी को अहमदाबाद स्थित व्यवसाई गौतम अडानी के करीबी सहयोगी के रूप में कनेक्ट किया था।

और जॉर्ज सोरोस का मकसद सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी की सरकार को बदनाम करना था, ताकि भारत में एक मजबूत सरकार को नुकसान पहुंचाया जा सके।

हंगरी में जन्मे 93 वर्षीय जॉर्ज सोरोस को 16 सितंबर 1992 को 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' को तोड़ने वाला व्यक्ति' कहा जाता है, और इस घटना को 'ब्लैक बुधवार' भी कहा जाता है, जिससे ब्रिटिश सरकार को यूरोपीय एक्सचेंज रेट मैकेनिज्म से स्टर्लिंग को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

जॉर्ज सोरोस के गिरोह में सैकड़ों वामपंथी पत्रकार, कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो अलग अलग देशों के नेताओं और अलग अलग देशों की लोकतांत्रित व्यवस्था के खिलाफ मुहिम चलाते रहते हैं। जॉर्ज सोरोस के निशाने पर भारत आज से नहीं, बल्कि सालों से रहा है।

पिछले साल को OCCRP की रिपोर्ट के बाद, हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्वीटर) हैंडल से ट्वीट किया था, कि "आखिरकार, लूप बंद हो गया है। फाइनेंशियल टाइम्स और OCCRP की रिपोर्ट है, कि कई अडानी शेयरों में कम से कम 13% फ्री फ्लोट वाले ऑफशोर फंड को गुप्त रूप से नियंत्रित किया गया था। विनोद अडानी के सहयोगियों द्वारा, रिश्ते को छुपाया जा रहा है"।

OCCRP ने अपनी जांच के नतीजे दो विदेशी प्रकाशनों - द गार्जियन और फाइनेंशियल टाइम्स के साथ शेयर किए थे, जहां रिपोर्ट में दावा किया गया था, कि अडानी समूह में गुप्त रूप से निवेश करने वाले दो लोगों के, अदानी परिवार से करीबी संबंध हैं। रिपोर्ट में कई टैक्स हेवन्स की फाइलों, बैंक रिकॉर्ड और इंटरनल अदानी समूह के ईमेल का हवाला देते हुए आरोप लगाए गये थे।

हालांकि, अडानी समूह ने उसी वक्त इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और इसे OCCRP द्वारा अडानी परिवार के साझेदारों पर लगाए गए "पुनर्नवीनीकरण आरोप" बताया है। अडानी समूह ने इन समाचार रिपोर्टों के समय पर सवाल उठाया था और उन्हें संदिग्ध, शरारती और दुर्भावनापूर्ण बताया।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट बड़ी साजिश का हिस्सा?

हिंडनबर्ग की जो रिपोर्ट अडानी ग्रुप के खिलाफ आई थी, उनमें भी इन्हीं तरह के आरोप अडानी समूह के खिलाफ लगाए गये थे और पिछले साल सितंबर में OCCRP ने जो रिपोर्ट जारी की थी, उसमें भी पुराने ही आरोप थे, बस पैकेजिंग नई की गई थी।

जाहिर तौर पर सितंबर में पब्लिश की गई रिपोर्ट भारत में होने वाले चुनाव से ठीक पहले किए गये थे और इनकार नहीं किया जा सकता, कि रिपोर्ट का मकसद नरेन्द्र मोदी की मजबूत सरकार को कमजोर करना था।

वहीं, OCCRP की ये रिपोर्ट उस वक्त आई थी, जब अडानी एंटरप्राइजेज के एफपीओ आने वाले थे। साथ ही साथ, OCCRP रिपोर्ट और हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चल रही है।

यानि, मकसद साफ था, अडानी ग्रुप को तहस-नहस करना, क्योंकि अडानी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडानी 2022 में दुनिया के तीसरे सबसे अमीर कारोबारी बन गये थे और एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने वाले जॉर्ज सोरोस और इनके जैसे लोगों को ये बातें रास कैसे आती!

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