कभी ISIS, कभी पाकिस्तान, तो कभी खालिस्तान... निशाने पर हैं लंदन के मेयर सादिक खान, जानिए क्यों?
लंदन में भारतीय उच्चायोग ने खालिस्तान समर्थकों के एक समूह द्वारा 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारों के साथ भारतीय ध्वज को उतारने के एक दिन बाद एक विशाल तिरंगे के साथ करारा जवाब दिया है।

Khalistan London Mayor Sadiq Khan: लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हुए हमले के बाद भारत सरकार काफी सख्त है और माना जा रहा है, कि इस घटना के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच के संबंध में तनाव आ सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है, लेकिन एक सवाल ये भी उठ रहे हैं, कि आखिर लंदन, भारत विरोधियों का अड्डा क्यों बनता जा रहा है? आखिर लंदन में भारत विरोधी रैलियों और कार्यक्रमों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगता है? आखिर लंदन में भारत विरोधी, भारतीय दूतावासों को इतनी आसानी से कैसे निशाना बना लेते हैं और सबसे बड़ा सवाल ये, कि ब्रिटेन के लोगों में भारत के खिलाफ जहर कौन भर रहा है। इन सवालों के बीच लंदन के मेयर सादिक खान को लेकर भी सोशल मीडिया पर गंभीर सवाल पूछे जा रहे हैं और कई ट्वीटर यूजर, सादिक खान को इस्तीफा देने के लिए भी कह रहे हैं।
क्यों निशाने पर हैं सादिक खान?
लंदन में रहने वाले लोगों का कहना है, कि सादिक खान के मेयर बनने के बाद लंदन में भारत विरोधी ताकतों को और बल मिला है और लंदन पुलिस, जिसकी कमान लंदन के मेयर सादिक खान के हाथ में है, वो भारत विरोधी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करने में उदासीन रहे हैं। सिर्फ भारत विरोधियों के ही खिलाफ कार्रवाई करने में नहीं, बल्कि द गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस नस्लवाद, लिंगवाद और होमोफोबिया से त्रस्त है, और कई आधिकारिक समीक्षाओं के बावजूद इसे बदलने में विफल रही है। लंदन में लुईस केसी कमेटी ने आधिकारिक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें ब्रिटेन के सबसे बड़े पुलिस बल की निंदा की गई है। इसके अलावा, लंदन में दिवाली से ठीक पहले रैलियां निकाली जाती हैं, एक के बाद एक खालिस्तानी आंदोलन होते हैं, लेकिन लंदन के मेयर भारत विरोधी कार्यक्रमों की बस निंदा करके रह जाते हैं, उन्हें रोकते नहीं हैं। इससे पहले लंदन में साल 2019 में भी दिवाली से ठीक पहले भारत विरोधी रैली निकाली गई थी, जिसका लंदन के मेयर ने सिर्फ निंदा की थी।

सिर्फ निंदा ही क्यों करते हैं सादिक खान?
साल 2019 में जब पाकिस्तान समर्थक और कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन, लंदन में भारत विरोधी मार्च निकाला था, तो सादिक खान ने रैली की निंदा की थी। आपको बता दें, कि लंदन में साल 2019 में करीब 5 हजार कट्टरपंथी पाकिस्तानी समर्थकों ने कश्मीर को लेकर, दिवाली से ठीक पहले भारत विरोधी रैली निकाली थी, जिसकी सादिक खान ने निंदा की थी, लेकिन उसे रोकने की कोशिश नहीं की गई थी। लेकिन, इस बार भारतीय उच्चायोग पर हमला किया गया है, लिहाजा लंदन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस बार भी सादिक खान ने भारतीय उच्चायोग पर हमले को लेकर दो लाइन की एक निंदा अपने ट्वीटर अकाउंट के जरिए की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, कि "मैं भारतीय उच्चायोग में हुई हिंसक अव्यवस्था और तोड़फोड़ की निंदा करता हूं। इस तरह के व्यवहार के लिए हमारे शहर में कोई जगह नहीं है। लंदन पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है।" वहीं, REACH 🇮🇳 (UK) Chapter नाम के एक वेरिफाइड ट्वीटर अकाउंट के जरिए ट्वीट कर सादिख खान से इस्तीफा मांगा गया है। ट्वीट किया गया है, कि "आतंकवादियों द्वारा दिनदहाड़े की गई आज की बर्बरता एक बार फिर दिखाती है, कि लंदन के मेयर और उनकी संस्था जानबूझकर भारत विरोधी आतंकवादियों को लंदन में अपनी बात रखने दे रही है। हम नहीं चाहते, कि लंदन आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह बने। सादिक खान को इस्तीफा देना चाहिए।"
ISIS से संबंध होने के लग चुके हैं आरोप
आपको बता दें, कि लंदन के मेयर सादिक खान पर कुछ खतरनाक आतंकी संगठनों से भी संबंध होने के आरोप लग चुके हैं। साल 2017 आई न्यूज पंच नाम की वेबसाइट की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि तथाकथित उदारवादी मुस्लिम नेता सादिक खान के आईएसआईएस, अलकायदा और हमास से संबंधित संगठनों से संबंध है, लेकिन ब्रिटेन की लिबरल मीडिया इन रिपोर्ट्स को नहीं छापती है। साल 2016 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरूम ने भी दावा किया था, कि सादिख खान के उन संगठनों के साथ संबंध हैं, जो कई वैश्विक आतंकी संगठनों से जु़ड़े हुए हैं। डेविड कैमरून ने कहा था, कि एक जांच से पता चला है, कि "सादिक खान के संबंध न केवल आईएसआईएस से जुड़े संगठनों से हैं, बल्कि हमास, अल-नुसरा, अल-कायदा और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे समूहों से भी हैं"।

Recommended Video

'आतंकवाद के साथ रहना सीखना चाहिए'
आपको बता दें, कि साजिक खान के मेयर कार्यकाल के दौरान लंदन में आतंकी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, और कई बार ऐसे संकेत मिले, कि आतंकवादी समूह लंदन शहर पर एक बड़ा हमला करना चाहते हैं। लेकिन, आतंक का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सादिक खान ने लंदनवासियों के साथ-साथ यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के अन्य हिस्सों में नागरिकों को यह बताने के लिए अपने मंच का इस्तेमाल करते रहे, कि "पश्चिम को दैनिक जीवन के हिस्से के रूप में आतंकवाद के साथ रहना सीखना चाहिए।" आपको बता दें, कि इससे पहले साल 2004 में सादिक खान ने कतर स्थित मिस्र के मौलवी शेख यूसुफ अल-करदावी के उस बयान का बचाव किया था, जिसमें उन्होंने आत्मघाती हमलों को जायज ठहराया था। सादिक खान ने उस बयान का भी समर्थन किया था, जिसमें मौलवी ने इजराइल के खिलाफ फ़िलिस्तीनी आत्मघाती हमले उचित ठहराया था। इसके साथ ही, सादिक खान नियमित रूप से टुटिंग इस्लामिक सेंटर (टीआईसी) में भी जाते रहे हैं, जिसे सुलेमान गनी द्वारा चलाया जाता था। गनी सजायाफ्ता अल कायदा ऑपरेटिव आफिया सिद्दीकी का मुखर समर्थक है, साथ ही पूर्व ग्वांतानामो बे बंदी शकर आमेर का समर्थक भी है। सादिक खान ने 2004 और 2013 के बीच कम से कम नौ बार विवादास्पद इमाम के साथ एक मंच साझा किया है।












Click it and Unblock the Notifications