F-35, F-22 बनाने वाले आ रहे हैं भारत! C-130J सुपर हरक्यूलिस की फैक्ट्री लगाने पर बात, मेक इन इंडिया की उड़ान
Lockheed to setup C-130J Super Hercules Assembly Line in India: भारतीय वायु सेना (IAF) को मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की आपूर्ति करने के सौदे को हासिल करने के लिए कई दिग्गज मैदान में उतर रहे हैं, जिनमें से एक दुनिया की सबसे बड़ी हथियार बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन है।
लॉकहीड मार्टिन वही कंपनी है, जिसने अमेरिका के लिए पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 और F-22 का निर्माण किया है और अब ये अमेरिकी रक्षा दिग्गज, मेक इन इंडिया के तहत भारत में विशेष ऑपरेशन विमान C-130 J सुपर हरक्यूलिस के लिए असेंबली लाइन स्थापित करने पर विचार कर रहा है।

भारत को चाहिए परिवहन एयरक्राफ्ट
दरअसल, इंडियन एयरफोर्स (IAF) अपने एडवांस रूसी An-32 परिवहन विमान बेड़े को बदलने की योजना बना रही है। IAF लगभग 100 विमानों का संचालन करता है, जो 2031-32 में 44 साल की सेवा पूरी कर लेंगे और उसके बाद उन्हें बारी बारी से रिटायर करने की योजना बनाई गई है।
इंडियन एयरफोर्स ने शुरू में रूस के साथ एक संयुक्त विकास परियोजना के तहत MTA खरीदने की योजना बनाई थी। और दोनों देशों ने 2012 में विमान के सह-विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस सौदे के तहत भारत को ऐसे 45 विमान खरीदने थे और रूस करीब 100 विमान खरीदता। लेकिन 2016 में दोनों देशों के बीच विमान के इंजन और डिजाइन के बारे में सहमति नहीं बनने के बाद यह सौदा नाकाम हो गया।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि इस रेस में शामिल अन्य कंपनियों में ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी शामिल है, जिसने फरवरी में भारतीय कंपनी महिंद्रा के साथ मिलकर भारत में C-390 मिलेनियम मल्टी-मिशन एयरक्राफ्ट का निर्माण करने की योजना पेश की थी। वहीं, यूरोपियन एयरबस डिफेंस एंड स्पेस, अपने A-400 M एयरक्राफ्ट के साथ इस होड़ में शामिल है।
लॉकहीड मार्टिन को इस रेस में बढ़त हासिल है, क्योंकि C-130J पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है। IAF सामरिक एयरलिफ्टिंग के लिए 12 सुपर हरक्यूलिस का संचालन करता है। 1999 में पेश किए गए लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस में चार टर्बोप्रॉप इंजन हैं, और इसका इस्तेमाल ज्यादातर सैन्य परिवहन विमान के रूप में किया जाता है। लॉकहीड मार्टिन के C-130 हरक्यूलिस को C-130J के साथ पूरी तरह से अपग्रेड किया गया है और इसमें नए इंजन, फ़्लाइंग डेक और अन्य उपकरण शामिल किए गये हैं।
भारत में लॉकहीड मार्टिन का असेंबली लाइन
हिंदुस्तान टाइम्स ने लॉकहीड मार्टिन के बिजनेस डेवलपमेंट (एयर मोबिलिटी और मैरीटाइम मिशन) के उपाध्यक्ष एंथनी जी फ्रेज़ के हवाले से कहा, कि अमेरिकी फर्म भारत में सी-130 जे के लिए असेंबली लाइन स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। फ्रेज ने कहा, कि "MTA कंपीटिशन हमें इंडियन एयरफोर्स की सामरिक एयरलिफ्ट आवश्यकताओं को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। हम भारत में C-130J के लिए असेंबली लाइन स्थापित करने के विकल्प तलाश रहे हैं।"
लॉकहीड मार्टिन के पास पहले से ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ एक ज्वाइंट वेंचर है, जो C-130J के लिए एम्पेनेज (टेल असेंबली) का वैश्विक स्रोत है। यह देखना अभी बाकी है, कि लॉकहीड मार्टिन फिर से भारतीय वायुसेना से कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय फर्म का उपयोग करेगा या नहीं।
इसके अलावा एयरबस ने पहले ही IAF को C-295 परिवहन विमान की आपूर्ति के लिए TASL के साथ साझेदारी की है।
भारतीय वायुसेना, भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत 40 से 80 विमानों को शामिल करने की सोच रही है। नए परिवहन विमानों में 18 से 30 टन कार्गो-ले जाने की क्षमता होने की उम्मीद है।
MTA के लिए जो रिक्वेस्ट ऑफ इन्फॉर्मेशन है, उसके मुताबिक IAF ने विदेशी विक्रेताओं से 40, 60 और 80 विमानों के बैच के लिए विमान और संबंधित उपकरणों की लागत का एक सामान्य अनुमान देने के लिए कहा है। सी-390, 26 टन का पेलोड ले जा सकता है, जबकि सी-130जे 20 टन और ए-400 एम 37 टन का पेलोड ले जा सकता है।
भारतीय वायुसेना ने ओईएम से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्वदेशीकरण को बढ़ाने के तरीकों और भारत में डिजाइन, एकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं सहित एक मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने, प्रणालियों, उप-प्रणालियों, घटकों और पुर्जों का स्वदेशी विनिर्माण करने की क्षमता और भारत को उपकरणों के विनिर्माण और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) के लिए एक क्षेत्रीय या वैश्विक केंद्र बनाने के बारे में जानकारी देने को कहा है।
चीन के साथ लंबे समय से चल रहे गतिरोध ने सैन्य परिवहन विमानों की जरूरत को उजागर किया है। 2020 में गलवान संघर्ष के बाद, भारत ने लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर 68,000 से ज्यादा सैनिकों, करीब 90 टैंकों और 300 से ज्यादा पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों को ले जाने के लिए C-17 और C-130J के अपने परिवहन बेड़े को तैनात किया।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बनेगी बात?
लॉकहीड मार्टिन का यह बयान एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी और महिंद्रा के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद आया है।
C-390 मिलेनियम एक मल्टी-मिशन, ट्विन-इंजन, जेट-संचालित, सामरिक परिवहन विमान है। यह बाजार में सबसे आधुनिक सैन्य परिवहन विमान है, जो अन्य मध्यम आकार के सैन्य परिवहन विमानों की तुलना में ज्यादा पेलोड (26 टन) ले जा सकता है, और 870 किमी/घंटा (470 नॉट) की गति से उड़ान भर सकता है।
यह 2019 में ब्राज़ीलियाई वायु सेना में शामिल हुआ। तब से, इसे ब्राज़ीलियाई वायु सेना, पुर्तगाली वायु सेना, हंगेरियन वायु सेना, ऑस्ट्रियाई वायु सेना, चेक गणराज्य वायु सेना और रॉयल नीदरलैंड वायु सेना में शामिल किया गया है। दक्षिण कोरिया ने दिसंबर 2023 में इसे चुना था।
2020 में, रॉयल नीदरलैंड वायु सेना ने C-130 J के बजाय C-390 मिलेनियम को चुना। अपनी गति और भार ले जाने की क्षमता की वजह से ब्राज़ीलियाई विमान तेजी से मिशन को पूरा कर सकता है।
जबकि, C-130J सिर्फ 248 kt की गति से ही उड़ान भर सकता है। हालांकि, KC-390 470 kt की मैक्सिकम स्पीड तक पहुंच सकता है और इसकी ऑपरेशनल सीमा 36,000 फीट है, जबकि C-130J की सीमा 28,000 फीट है। C-130J की सीमा 2,100 मील है, जबकि KC-390 की सीमा थोड़ी कम (1,750 मील) है।












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