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बड़ा खुलासा: आतंकियों का प्रोफेसर, सैकड़ों की भीड़... इमरान ने कराई कश्मीर पर तालिबान-हाफिज की सभा

तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया, उसके तुरंत बाद खैबर पख्तूनख्वा में हाफिज सईद के संगठन ने एक बैठक का आयोजन किया था। जिसमें इमरान खान की पार्टी के कई बड़े नेता भी पहुंचे थे...

इस्लामाबाद, अप्रैल 30: पाकिस्तान से आने वाली एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद इमरान खान भारतीय कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में भारी इजाफा करवाना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और हाफिज सईद के प्रतिबंधित संगठन के आतंकवादियों के बीच अपनी सुरक्षा में बैठक होने दी थी। इस बैठक का मकसद तालिबान की मदद से कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम देना था। आतंकवादी नेटवर्क पर आए रिपोर्ट में इस बैठक को लेकर खुलासा हुआ है। ये बैठक पिछले साल अफगानिस्तान में तालिबान के शासन स्थापित होने के बाद की गई थी।

इमरान बना रहे थे मास्टरप्लान

इमरान बना रहे थे मास्टरप्लान

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सरकार में आने के बाद इमरान खान का मकसद पहले दिन से ही कश्मीर में अशांति फैलाने की थी, लेकिन जब पिछले साल 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान का कब्जा हो गया, उसके बाद उन्होंने कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए तातिबान की मदद लेने की कोशिश की थी। तालिबान के हाथों में काबुल के जाने के बाद से विश्व के कई खुफिया संगठन लगातार तालिबान की गतिविधियों और इस्लामिक कट्टरपंथ का मुख्य अड्डा बन चुके पाकिस्तान पर नजर रख रहे हैं, जिसमें पता चला है, कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और अफगान तालिबान के बीच गठजोड़ बढ़ा है। इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान के अधिग्रहण के तुरंत बाद, पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने जम्मू और कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिश शुरू कर दी थी।

बैठक में कौन-कौन था शामिल?

बैठक में कौन-कौन था शामिल?

पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में बना हुआ है, जो इस्लामाबाद पर आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लगातार दबाव का सामना कर रहा है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने जब अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया, उसके तुरंत बाद खैबर पख्तूनख्वा में हाफिज सईद के संगठन ने एक बैठक का आयोजन किया था। जिसमें इमरान खान की पार्टी के कुछ बड़े नेता भी पहुंचे थे और आतंकी हाफिज सईद के संगठन के कुछ कुख्यात आतंकवादी भी इस बैठक में मौजूद थे। हाफिज सईद वो आतंकवादी है, जो तालिबान के विचारधारा दारुल-उलूम का सबसे जाना-माना चेहरा हैं। हक्कानिया और सैयद अली शाह गिलानी और एशिया अनारबी के एक आम रिश्तेदार भी इस बैठक में शामिल हुए थे।

इमरान की सुरक्षा में हुई थी बैठक

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक को पूरी तरह से इमरान खान का संरक्षण प्राप्त था, लिहाजा आतंकियों की पूरी जमात इस बैठक में शामिल हुई थी। इस बैठक की शुरूआत में एक नाबालिग लड़के को देखा जा रहा है, जो हाफिज सईद के नाम की शपथ ले रहा है। ये नाबालिग बच्चा इस बात की शपथ लेता है, कि जिस तरह से उसके भाई कलाश्निकोव बंदूक लेकर कश्मीर में दाखिल होने की कोशिश की थी, उसी तरह वो भी कश्मीर में जाएगा और आतंकवाद फैलाएगा। इस नाबालिग बच्चे की बातों से पता चलता है, कि उसके भाई कश्मीर में घुसपैठ करते वक्त मारे गये थे।

तालिबान को दी गई थी मुबारकबाद

तालिबान को दी गई थी मुबारकबाद

इस बैठक के शुरू होने पर सबसे पहले अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले आतंकवादी संगठन तालिबान को मुबारकबाद दी गई। नाबालिग लड़के को वीडियो में कहते हुए सुना जा सकता है कि, 'आपके और मेरे नेता हाफिज मोहम्मद सईद की भविष्यवाणी सच हो गई है और मुजाहिदों ने अफगानिस्तान में संयुक्त राज्य को हराया है और अब हम कश्मीर को भारत से आजाद करवाएंगे'। स्कूल जाने वाली उम्र में नाबालिग लड़के को भारत के खिलाफ जेहाद छेड़ने की बात कहते हुए साफ सुना जा सकता है। उसने जल्द ही दो आतंकवादियों वसीम और वकास के नामों का खुलासा किया, जो कथित तौर पर पहले कार्रवाई में मारे गए थे। नाबालिग बच्चा बोलता है, कि "कृपया, अल्लाह से प्रार्थना करें कि मेरे भाइयों की कुर्बानी स्वीकार किया जाए और अब मैं अपने भाई वकास के गिरे हुए कलाश्निकोव को उठाऊंगा'। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है, कि एक नाबालिग बच्चे के दिमाग को किस तरह से आतंकवादियों ने ब्रेनवॉश कर दिया है।

सैकड़ों लोगों की दिख रही है भीड़

सैकड़ों लोगों की दिख रही है भीड़

नाबालिग लड़का जब अपना भाषण खत्म कर लेता है, उसके बाद सैयद मुजाहिद गिलानी नाम का एक शख्स मंच पर भाषण देने के लिए आता है। ये शख्स खुद को कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का पोता एशिया अंद्राबी का भतीजा बताता है, वो मंच पर आता है और फिर कश्मीर के लिए खून बहाने की बात करता है। उसने कहा कि, "मैं यहां गिलानी परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य सैयद अली गिलानी के उत्तराधिकारी के रूप में खड़ा हूं।" कुछ देर मंच से भाषण देते हुए इस शख्स ने खुद को एशिया अंद्राबी के साथ साथ जम्मू-कश्मीर में मारे गये सबी आतंकवादियों का एक सच्चा उत्तराधिकारी होने का दावा किया। इस दौरान खुद को गिलानी का पोता कहने वाले इस आतंकवादी ने कश्मीर में खून खराबे की स्थिति बनाने को जरूरी बताया और कहा कि, 'केवल आप लोग ही ऐसा कर सकते हैं। स्वतंत्रता कभी भी केवल शब्दों और कलम से प्राप्त नहीं होती है। आजादी तोपों से हासिल करनी होती है, आजादी थाली में नहीं परोसी जाती, आजादी छिननी पड़ती है'।

जिहाद का प्रोफेसर था मौजूद

जिहाद का प्रोफेसर था मौजूद

भारत के खिलाफ ये कार्यक्रम खुला चल रहा था और सैकड़ों लोगों की भीड़ को कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए उकसाया जा रहा है, लेकिन शासन प्रशासन नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही होती है। ये कार्यक्रम भारत विरोधी नारे से गुलजार था और आतंकी संगठन जमात-उद-दावा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट आतंकियों की पौध की सींचने वाले दारुल-उलूम-हक्कानिया का अकोरा खट्टक था, जो एक मौलवी है और जिसका काम आतंकियों की फसल तैयार करना है। ये मौलवी इस तरह से बच्चों का ब्रेनवॉश करता है, कि वो बच्चे अपने मां-बाप का कत्ल करने से पहले भी एक बार नहीं सोचेगा। अकोरा खट्टक को पाकिस्तान के जिहाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के तौर पर जाना जाता है। वहीं, मौलाना यूसुफ शाह ने भीड़ की ओर से भारत विरोधी नारेबाजी के बीच स्थानीय भाषा पश्तो में सभा को संबोधित किया।

तालिबान की जन्मस्थली पर कार्यक्रम

तालिबान की जन्मस्थली पर कार्यक्रम

खैबर पख्तूनख्वा में जिस जगह पर ये कार्यकम का आयोजन किया गया था, वो जगह हक्कानी नेटवर्क के सबसे खूंखार आतंकियों की जन्मस्थली है। जहां उन्हें अत्यंत हिंसक बनना सिखाया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यहां के मदरसा ने दुनिया के किसी भी स्कूल की मदरसों की तुलना में सबसे ज्यादा तालिबान नेताओं को ट्रेनिंग दिया है, जो अब अफगानिस्तान सरकार में प्रमुख पदों के साथ प्रशासन को नियंत्रित करते हैं। पूर्व छात्रों की लंबी सूची में तालिबान के शीर्ष सैन्य नेताओं में से एक सिराजुद्दीन हक्कानी और अफगानिस्तान के नए कार्यवाहक आंतरिक मंत्री, अमीर खान मुत्ताकी, विदेश मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना शाह जैसे मौलवी अफगान तालिबान के हक्कानी गुट पर महत्वपूर्ण नियंत्रण रखता है। (सभी तस्वीर फाइल)

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