Lebanon Journalist: इजरायली गोलियों का शिकार बनी पत्रकार! दुनिया भर में किरकिरी के बाद IDF ने क्या सफाई दी?
Lebanon Journalist: हाल ही में लेबनान में हुए इजरायली हमलों में कई लोग मारे गए। जिनमें से एक थीं लेबनान की जानी-मानी पत्रकार अमल खलील (Amal Khalil)। बताया गया कि वह अपनी गाड़ी पर पहले हुए हमले के बाद अमल एक घर में शरण लेने पहुंची थीं लेकिन वे खुद का बचाव कर पातीं इसके पहले ही इजरायली गोलियों की शिकार हो गईं।
कई घंटों तक रिकवर नहीं हुआ शव
अल-अखबर की पत्रकार अमल खलील इस हमले में मारी गईं, जबकि उनकी सहयोगी ज़ैनब फराज गंभीर रूप से घायल हो गईं। इज़राइली गोलाबारी इतनी तेज थी कि बचाव दल कई घंटों तक खलील का शव नहीं निकाल पाए। बताया जा रहा है कि करीब 6 घंटे तक उनका शव मलबे में दबा रहा जिसे लंबी मशक्कत के बाद ढूंढा जा सका।

पीएम सलाम ने बताया 'War Crime'
प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस हमले को सीधे तौर पर युद्ध अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निशाना बनाना, राहत टीमों को रोकना और उनके पहुंचने के बाद फिर से हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत साफ तौर पर अपराध है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह सब "स्पष्ट रूप से युद्ध अपराध" हैं।
युद्धविराम के बावजूद जारी हमले
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में युद्धविराम लागू बताया जा रहा है। इसके बावजूद इज़राइल दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में सक्रिय है और वहां अपनी सेना तैनात किए हुए है। कई स्थानीय लोगों को अपने घरों में लौटने से रोका जा रहा है और खतरे के नाम पर गोलीबारी जारी है।
इज़राइल का इनकार, जांच की बात
इज़राइल रक्षा बल (IDF) ने पत्रकारों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। IDF के मुताबिक, जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां उनकी 'फॉरवर्ड डिफेंस लाइन' पार करने के बाद सैनिकों को तत्काल खतरा महसूस हुआ था। जिसके बाद फायरिंग शुरू हुई।
पहले भी हो चुके हैं कई हमले
अमल खलील की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। 28 मार्च को दक्षिणी लेबनान में एक प्रेस कार पर हमले में अली शोएब, फातिमा फतूनी और मोहम्मद फतूनी मारे गए थे। इज़राइल ने दावा किया कि शोएब हिजबुल्लाह से जुड़ा था, लेकिन इसके कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
इजरायल को घेरने की तैयारी
सलाम ने यह भी कहा कि लेबनान इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा। वहीं, लेबनान के सूचना मंत्री पॉल मोरकोस ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। उन्होंने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया।
पत्रकारों की मौत का बढ़ता आंकड़ा
समाचार एजेंसी AP के मुताबिक, अमल खलील की मौत के साथ इस साल लेबनान में मारे गए पत्रकारों की संख्या कम से कम 9 हो गई है। यह आंकड़ा मीडिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। वहीं दूसरी तरफ, हालिया झड़पों में अब तक 2,300 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें कम से कम 254 महिलाएं और 168 बच्चे शामिल हैं। यह दिखाता है कि यह संघर्ष सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी बन चुका है।
बड़े युद्ध का हिस्सा बना संघर्ष
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब इज़राइल लेबनान में सैन्य अभियान चला रहा है, जहां हिजबुल्लाह एक्टिव है। यह संघर्ष अब व्यापक अमेरिका-इज़राइल-ईरान तनाव का हिस्सा बन चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
शांति की जरूरत और जिम्मेदारी
कुल मिलाकर, पत्रकारों पर बढ़ते हमले, लगातार हिंसा और अंतरराष्ट्रीय आरोप-प्रत्यारोप ने इस पूरे मुद्दे को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में जरूरी है कि सभी पक्ष संयम बरतें और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए शांति बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
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