लेबनान में कायम हुआ अंधेरा, अस्पतालों में हाहाकार, सरकार की गलत नीति से अभूतपूर्व बिजली संकट!

लेबनान के ज्यादातर शहर अंधेरे में डूब चुके हैं और बिजली संयंत्रों के पास बिजली उत्पादन के लिए ईंधन नहीं हैं। क्या सरकार की गलत नीतियों ने देश को अंधेरे में धकेला?

बैरूत, अक्टूबर 10: शाम होते ही लेबनान के शहर रोशनी में नहा जाया करते थे और अलग अलग रंग लेबनान की सुंदरता में चार चांद लगा देते थे, लेकिन अब लेबनान में पूरी तरह से अंधेरे का कब्जा हो चुका है। लेबनान के दो मुख्य बिजली संयंत्रों में ईंधन की सप्लाई बंद होने के बाद देश में बिजली संकट काफी ज्यादा गहरा चुका है और शाम में शहरों में सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा देखा जा रहा है। लेबनान में बिजली संयंत्र बंद हो चुके हैं और बिजली का उत्पादन ठप पड़ चुका है।

गंभीर ऊर्जा संकट से जूझता लेबनान

गंभीर ऊर्जा संकट से जूझता लेबनान

लेबनान बेहद गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, जो ईंधन के आयात पर निर्भरता के कारण और भी बदतर हो गया है। अनियमित बिजली आपूर्ति ने अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं को संकट की स्थिति में डाल दिया है। लेबनान बिजली के लिए काफी हद तक प्राइवेट कंपनियों पर निर्भर है और सरकारी कंपनियां काफी कम बिजली उत्पादन करती हैं, लेकिन प्राइवेट कंपनियां भी बिजली उत्पादन करने में असमर्थ हैं और देश के कुछ ही हिस्सों में फिलहाल बिजली की सप्लाई की जा रही है, जबकि ज्यादातर हिस्सों में बिजली की सप्लाई बंद हो गई है।

संकट में कैसे फंसा लेबनान ?

संकट में कैसे फंसा लेबनान ?

दरअसल, लेबनान में ज्यादातर बिजली संयंत्र पुराने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ डीजल और ईंधन से संचालित होने वाले हैं और इस वक्त लेबनान भारी ईंधन की कमी से जूझ रहा है, जिसने बिजली संकट को और ज्यादा बढ़ा दिया है। हालांकि, लेबनान अचानक बिजली संकट में नहीं फंसा हैं। लेबनान में पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से अलग अलग इलाकों में 3 घंटे से 6 घंटों तक के लिए बिजली काटी जाती थी, लेकिन अब पूरे क्षेत्र में एक दिन में दो घंटे से अधिक बिजली नहीं दी जा रही है। शनिवार को, राज्य बिजली कंपनी ने कहा कि देश के दक्षिण में ज़हरानी बिजली संयंत्र को ईंधन की कमी के कारण बंद करने के लिए मजबूर बोना पड़ा है और उत्तर में मुख्य संयंत्र गुरुवार को बंद कर दिया गया था।

इराक से डीजल खरीदने पर बात

इराक से डीजल खरीदने पर बात

इलेक्ट्रीसाइट डी लिबन ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 270 मेगावाट की ही बिजली सप्लाई हो रही है, जिसकी वजह से बिजली ग्रिड तक बिजली नहीं भेजी जा रही है। इलेक्ट्रीसाइट डी लिबन ने कहा कि, देश के दोनों बिजली संयंत्रों में फौरन ईंधन सप्लाई करने के विकल्पों पर विचार किए जा रहे है। वहीं, इसने कहा कि, अगले सप्ताह तक इराक से ईंधन की नई खेप आने की उम्मीद है। असल में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि लेबनान की सरकार ने बिजली कंपनियों को कर्ज के पैसे वापस किए ही नहीं हैं, जिसकी वजह से देश की बिजली कंपनियों को केन्द्रीय बैंक से मिलने वाले कर्ज पर निर्भर रहना पड़ रहा है और वो बिजली संयंत्र चलाने के लिए ईंधन ही नहीं खरीद पा रहे हैं।

देश की अर्थव्यवस्था भी खराब

देश की अर्थव्यवस्था भी खराब

असल में लेबनान की दिक्कतों को समझें तो देश की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है और देश की तीन हिस्से से ज्यादा की आबादी गरीबी रेखा से नीचे निवास करती है। वहीं, पिछले सरकार ने ईंधन और डीजल के दामों में इजाफा कर दिया था और देश के लोगों को दी जाने वाली सब्सिडी में भी कटौती कर दी थी, जिससे बिजली संयंत्रों में उत्पादन में आने वाला खर्च भी बढ़ गया, दूसरी तरफ लोगों ने बिजली कनेक्शन कटवाना शुरू कर दिया, क्योंकि उनके पास बिजली बिल देने के लिए पैसे नहीं थे। जिससे बिजली कंपनियों के पास पैसों की किल्लत शुरू हो गई। लेबनान में बेरोजगारी भी काफी चरम पर है, लिबाजा लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है, ऐसे में लेबनान का ऊर्जा सेक्टर ढह गया है।

सरकारी खजाने को भारी नुकसान

सरकारी खजाने को भारी नुकसान

सरकार ने देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें सरकारी खजाने को भरने के लिए बढ़ाया था, लेकिन इसका असर उल्टा पड़ा गया। लेबनान की ज्यादातर बेरोजगार जनता के पास खर्च करने के लिए पैसे ही नहीं थे, लिहाजा बिजली कंपनियों का बिल भी सरकार के नाम पर आने लगा और सरकारी खजाने पर इतना ज्यादा प्रेशर बना, जिसे सरकार के लिए भी उठाना काफी मुश्किल था। लेबनान में बिजली कंपनी को सालाना 1.5 अरब डॉलर तक का घाटा हुआ है, और पिछले दशकों में राज्य को 40 अरब डॉलर से अधिक की लागत आई है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख मांग रही है। संकट को कम करने में मदद के लिए लेबनान को सीरिया के रास्ते ईरान से ईंधन शिपमेंट प्राप्त हुआ है। इराक ने सरकार के साथ एक अदला-बदली का सौदा भी किया है जिसने लेबनान की राज्य बिजली कंपनी को दिनों तक चालू रहने में मदद की है।

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