हाफिज सईद के 6 खास गुर्गे आतंकवादी वित्त पोषण में बरी, पाकिस्तान के चेहरे से नकाब फिर हटा
पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट ने हाफिज सईद के 6 सहयोगियों को बरी कर दिया है, जिससे पाकिस्तान के चेहरा फिर बेनकाब हो गया है।
लाहौर, नवंबर 07: एफएटीएफ के ग्रे-लिस्ट में पाकिस्तान को अब तक क्यों रखा गया है, ये लाहौर हाईकोर्ट के एक फैसले से एक बार फिर साबित हो गया है। लाहौर हाईकोर्ट ने यूनाइटेड नेशंस द्वारा नामित विश्व के सबसे खतरनाक आतंकवादी और भारत में हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार हाफिज सईद के 6 सहयोगियों को बरी कर दिया है, जबकि उन्हें निचली अदालत ने दोषी ठहराया था।

हाफिज सईद के 6 सहयोगी बरी
लाहौर उच्च न्यायालय ने शनिवार को एक निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के प्रतिबंधित जमात-उद-दावा के छह वरिष्ठ आतंकियों को एक आतंकी वित्तपोषण मामले में बरी कर दिया है। सईद के नेतृत्व वाला जमात-उद-दावा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए अग्रणी संगठन है, जो 2008 के मुंबई हमले को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठन है, जिसमें छह अमेरिकियों सहित 166 लोग मारे गए थे। आपको बता दें कि, लाहौर की आतंकवाद विरोधी अदालत ने इस साल अप्रैल में जमात-उद-दावा के इन आतंकियों को प्रो. काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद मलिक जफर इकबाल, याह्या मुजाहिद , नसरुल्ला, समीउल्लाह और उमर बहादुर और हाफिज अब्दुल रहमान मक्की को छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी।

आतंकी घटनाओं में साबित हुए थे दोषी
लाहौर की निचली अदालत ने इन सभी आरोपियों को आतंकवाद के वित्तपोषण का दोषी पाया था। वे धन इकट्ठा कर रहे थे और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को अवैध रूप से वित्तपोषण कर रहे थे। इसने आतंकवाद के वित्तपोषण के माध्यम से एकत्र किए गए धन से बनी संपत्ति को जब्त करने का भी आदेश दिया था। लेकिन, हाईकोर्ट ने सभी आतंकियों को बरी कर दिया। अदालत के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि, ''शनिवार को मुख्य न्यायाधीश मुहम्मद अमीर भट्टी और न्यायमूर्ति तारिक सलीम शेख की एलएचसी की खंडपीठ ने छह जेयूडी नेताओं के खिलाफ सीटीडी की प्राथमिकी 18 में निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोप साबित करने में नाकामयाब रहा''

पाकिस्तान का असली चेहरा आया सामने
अदालत के अधिकारी ने पीटीआई से कहा कि, खंडपीठ ने जमात-उद-दावा नेताओं की याचिका को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि "अभियोजन पक्ष के स्टार गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि कोई सबूत पेश नहीं किया गया है।" ऐसे में साफ जाहिर होता है, पाकिस्तान सरकार की तरफ से अदालत में आरोपियों के खिलाफ गवाह और सबूत पेश ही नहीं किए, लिहाजा कोर्ट को तमाम आरोपियों को बरी करना पड़ा। और इसके साथ ही ये भी साबित हो गया है कि, आतंकवाद पर पाकिस्तान दोहरा चरित्र रखता है और इमरान खान सरकार अभी भी आतंकियों को पालने का काम कर रही है।












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