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कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में मिली बड़ी राहत, भारत को दिया गया बड़ा ऑफर

पाकिस्तानी कोर्ट ने कुलभूषण जाधव को बड़ी राहत दी है, साथ ही भारत को भी कोर्ट की तरफ से ऑफर दिया गया है।

इस्लामाबाद, अक्टूबर 06: पाकिस्तान की जेल में बंद और मौत की सजा पाने वाले कुलभूषण जाधव को अदालत से बड़ी राहत दी गई है। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सजा दी थी, जिसके खिलाफ भारत अंतर्राष्ट्रीय अदालत में गया था, जहां पाकिस्तान के खिलाफ फैसला सुनाया गया था और अब पाकिस्तानी कोर्ट से भी कुलभूषण जाधव को राहत मिली है।

कुलभूषण जाधव को राहत

कुलभूषण जाधव को राहत

मंगलवार को पाकिस्तान के एक हाईकोर्ट ने कुलभूषण जाधव की मिली सजा की समीक्षा के लिए एक वकील नियुक्त करने के लिए भारत सरकार को और समय देने की अनुमति दे दी है। 51 साल के कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी थे, जिन्हें पाकिस्तान ने 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अफगानिस्तान से पकड़ लिया था और उन्हें पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में कांसुलर एक्सेस से इनकार करने के लिए संपर्क किया था और भारत ने जाधव को दी गई मौत की सजा को चुनौती दी थी, जिसपर भारत के पक्ष में फैसला आया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हेग स्थित ICJ ने जुलाई 2019 में एक फैसला सुनाया था, जिसमें पाकिस्तान से कहा गया था, कि वह जाधव को भारत का कांसुलर एक्सेस दे और उसकी सजा की समीक्षा भी सुनिश्चित करे।

पाकिस्तानी कोर्ट ने क्या कहा?

पाकिस्तानी कोर्ट ने क्या कहा?

मंगलवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह, न्यायमूर्ति आमेर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब शामिल थे, उन्होंने जाधव के लिए एक वकील नामित करने के संबंध में कानून मंत्रालय द्वारा मामले की सुनवाई की। पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान ने अदालत को याद दिलाया कि, कोर्ट ने 5 मई को एक आदेश पारित किया था जिसमें अधिकारियों से वकील की नियुक्ति के लिए भारत से संपर्क करने का एक और प्रयास करने को कहा गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि, भारत को इसकी जानकारी गई थी, लेकिन भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

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    भारत पर अनर्गल आरोप

    भारत पर अनर्गल आरोप

    पाकिस्तानी वकील ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में भारत के खिलाफ कई अनर्गल आरोप भी लगाए हैं। खान ने अदालत में बताया कि, भारत एक अलग कमरे में जाधव को कांसुलर एक्सेस चाहता है, लेकिन अधिकारी उसे भारतीय प्रतिनिधियों के साथ अकेले छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा, "वे उससे सिर्फ हाथ मिलाने से भी उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।" उन्होंने दावा किया कि, पाकिस्तान आईसीजे की समीक्षा और पुनर्विचार के फैसले के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रयास कर रहा था, लेकिन भारत बाधा उत्पन्न कर रहा था। खान ने कहा कि, भारत की मनमानी के चलते सरकार ने वकील की नियुक्ति के लिए अदालत से अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, 'भारत बाहर से वकील नियुक्त करना चाहता है लेकिन हमारा कानून इसकी इजाजत नहीं देता और भारत भी अपने क्षेत्र में ऐसा ही करता है।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    कोर्ट ने क्या कहा?

    इस्लामाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, मिनल्लाह ने कहा कि, पाकिस्तान ICJ के फैसले को लागू करना चाहता है। उन्होंने कहा, "क्या उन्हें एक और मौका देना बेहतर नहीं होगा ताकि वे अदालत के सामने अपनी आपत्तियां रख सकें।" जस्टिस मिनल्लाह ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान से भारत सरकार और जाधव को संदेश देने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने कहा कि, "कुलभूषण जाधव और भारत सरकार को एक और रिमाइंडर भेजें। अगर भारत को कोई आपत्ति है, तो वह उन्हें यहां बता सकता है, या पाकिस्तान में भारतीय दूतावास का कोई व्यक्ति उन्हें बता सकता है। इससे कोई समाधान निकल सकता है।" बाद में कोर्ट ने मामले की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी।

    भारत क्या चाहता है?

    भारत क्या चाहता है?

    समीक्षा के मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं हुई है, क्योंकि भारत ने एक स्थानीय वकील को नियुक्त करने से इनकार कर दिया है। भारत की तरफ से कहा गया है कि एक भारतीय वकील को पाकिस्तान की अदालत में कुलभूषण जाधव का पक्ष रखने के लिए नियुक्त करने दिया जाए, जबकि पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा है। भारत ने पाकिस्तान से जाधव के मामले की समीक्षा की सुविधा के लिए लाए गए विधेयक में "कमियों" को दूर करने के लिए कहा है। भारत ने कहा है कि, पाकिस्तान सरकार का प्रस्तावित कानून आईसीजे द्वारा अनिवार्य रूप से इस पर पुनर्विचार करने के लिए एक तंत्र नहीं बनाता है। भारत ने कहा है कि, समीक्षा और पुनर्विचार विधेयक-2020 जाधव के मामले की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार की सुविधा के लिए एक तंत्र नहीं बनाता है, जैसा कि आईसीजे के फैसले द्वारा अनिवार्य है और किसी भी देश की जिला अदालतें या राज्यस्तरीय अदालतें इस बात का फैसला करने में सक्षम साबित नहीं हो सकती हैं, क्या किसी राज्य ने अंतरराष्ट्रीय कानून में अपने दायित्वों को पूरा किया है या नहीं?

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