नेपाली प्रधानमंत्री ओली की कुर्सी जाना तय, संसद में विश्वासमत हारने के बाद बुलाई कैबिनेट मीटिंग

काठमांडू, 10 मई: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पहले तो चीन का साथ देने के लिए उन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ा, तो वहीं दूसरी ओर सोमवार को वो संसद में विश्वासमत साबित करने में नाकामयाब रहे। कुछ दिनों पहले पीएम ओली और उनके फैसलों से नाराज होकर पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' नीत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) ने समर्थन वापस ले लिया था। जिस वजह से ओली सरकार अल्पमत में आ गई थी। वहीं विश्वासमत हारने के कुछ ही देर बाद ओली ने अपने कैबिनेट के साथ बैठक की।

ओली

नेपाली मीडिया के मुताबिक संसद के निचले सदन में ओली सरकार को बहुमत साबित करना था। इसके लिए सोमवार को बकायदा वोटिंग हुई। 275 सदस्यों वाली नेपाली प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत के लिए 136 वोटों की जरूरत होती है, लेकिन कई सांसद कार्यवाही से गैरहाजिर रहे। जिस वजह से कुछ 232 सांसदों ने ही वोट डाले। इसमें 93 सांसदों ने ओली सरकार का समर्थन किया, जबकि 124 वोट उनके विरोध में थे। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ओली राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा देंगे।

6 महीने से जारी है राजनातिक संकट
आपको बता दें कि नेपाल में तब से सियासी संकट है, जब पिछले साल 20 दिसंबर को राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद को भंग करके इस साल 30 अप्रैल और 10 मई को चुनाव करवाने की घोषणा की थी। नेपाल में यह सियासी संकट सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के ओली और प्रचंड गुटों में आपसी विवाद की वजह से शुरू हुआ है। महीनेभर पहले ओली ने प्रचंड को खुली चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर प्रचंड में हिम्मत है तो उन्हें पद से हटाकर दिखाएं।

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