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Kim Jong Un ने किया 'सुपर पावर' मिसाइल इंजन का टेस्ट, क्या सीधे अमेरिका है निशाने पर?

Kim Jong Un Missile Engine Test 2026: उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर दुनिया, विशेषकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया (KCNA) के अनुसार, रविवार, 29 मार्च को देश ने एक उच्च-क्षमता वाले ठोस-ईंधन (Solid-Fuel) इंजन का सफल ग्राउंड जेट टेस्टकिया है।

यह परीक्षण केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है बल्कि किम जोंग उन का वैश्विक शक्तियों को सीधा संदेश है कि उत्तर कोरिया अब ऐसी मिसाइलें विकसित करने के बेहद करीब है जो सीधे अमेरिकी मुख्यभूमि (Mainland US) को अपना निशाना बना सकती हैं।

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किम जोंग उन ने खुद इस परीक्षण का बारीकी से निरीक्षण किया और इसे देश की सामरिक सैन्य शक्ति के लिए अत्यधिक जरूरी बताया।

2,500 किलोटन की महाशक्ति क्यों खतरनाक है यह इंजन?

रक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे चिंताजनक बात इस नए इंजन की मारक क्षमता और तकनीक है। रिपोर्ट के मुताबिक इस नए अपग्रेड किए गए इंजन की अधिकतम क्षमता 2,500 किलोटन मापी गई है। यह पिछले सितंबर में हुए परीक्षण (1,971 किलोटन) की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली है।

इंजन के निर्माण में आधुनिक कंपोजिट कार्बन फाइबर सामग्री का उपयोग किया गया है, जो इसे हल्का और अधिक टिकाऊ बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन की शक्ति बढ़ाने का असली मकसद एक ही मिसाइल पर कई परमाणु हथियार (Multiple Warheads) तैनात करना है। इससे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देना और उसे एक साथ कई दिशाओं से निशाना बनाना आसान हो जाएगा।

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North Korea Solid fuel ICBM: सॉलिड फ्यूल का 'साइलेंट' खतरा

उत्तर कोरिया का अपनी ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तकनीक में ठोस-ईंधन का उपयोग करना रणनीतिक रूप से एक बड़ा बदलाव है। तरल ईंधन वाली मिसाइलों को लॉन्च करने से पहले घंटों की तैयारी और ईंधन भरने की जरूरत होती है जिसे उपग्रहों के जरिए पकड़ा जा सकता है।

ठोस-ईंधन वाली मिसाइलें पहले से लोड रहती हैं और इन्हें बहुत कम समय में कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। इससे दुश्मन देशों के पास 'प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक' (हमले से पहले हमला) करने का समय नहीं बचता।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया को किम की सीधी चेतावनी

यह परीक्षण किम जोंग उन के उस कड़े भाषण के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने उत्तर कोरिया को एक 'अपरिवर्तनीय' (Irreversible) परमाणु शक्ति घोषित किया था। किम ने अमेरिका पर वैश्विक आतंकवाद और आक्रामकता का आरोप लगाया और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसी ताकतों से निपटने के लिए परमाणु शक्ति ही एकमात्र विकल्प है। दक्षिण कोरिया को 'सबसे बड़ा दुश्मन' मानता है। किम ने संसद में स्पष्ट किया कि वे दक्षिण कोरिया के खिलाफ अपना कड़ा रुख जारी रखेंगे और उसे अपना स्थायी शत्रु मानते हैं।

वैश्विक सुरक्षा के लिए एक और नई चुनौती

उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब दुनिया पहले से ही रूस-यूक्रेन और मिडिल ईस्ट के भीषण संघर्षों से जूझ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किम जोंग उन के पांच साल के सैन्य विस्तार कार्यक्रम का यह हिस्सा वैश्विक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। यदि उत्तर कोरिया अपनी मल्टीपल वारहेड क्षमता को पूरी तरह विकसित कर लेता है, तो यह प्रशांत महासागर क्षेत्र (Pacific Region) में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।

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