सऊदी क्राउन प्रिंस का 'राइट हैंड' गिरफ्तार, जमाल खशोगी हत्याकांड में नप जाएंगे मोहम्मद बिन सलमान?
फ्रांस की पुलिस ने जिस संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, उसका नाम खालिद एध अल-ओताबी है और उसकी पहचान सऊदी रॉयल गार्ड के पूर्व सदस्य के रूप में की गई है, जो सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए काम करता था।
पेरिस/रियाद/अंकारा, दिसंबर 08: सऊदी अरब के रहने वाले अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' के प्रख्यात पत्रकार जमाल खशोगी हत्याकांड का मुख्य संदिग्ध फ्रांस की राजधानी पेरिस से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार संदिग्ध उस 'हिट स्क्वायड' का सदस्य है, जिसपर अमेरिका और ब्रिटेन प्रतिबंध लगा चुका है और जो सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के 'राइट हैंड' माना जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि, क्या पत्रकार जमाल खशोगी हत्याकांड में सऊदी क्राउन प्रिंस की गर्दन भी नप सकती है?

पेरिस में 'राइट हैंड' गिरफ्तार
फ्रांस की पुलिस ने जिस संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, उसका नाम खालिद एध अल-ओताबी है और उसकी पहचान सऊदी रॉयल गार्ड के पूर्व सदस्य के रूप में की गई है। खालिद एध अल-ओताबी कितना बड़ा 'वांटेड' है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, अमेरिका और ब्रिटेन ने इसे प्रतिबंधित लिस्ट में रखा हुआ है और तुर्की का दावा है कि, खालिद एध अल-ओताबी ही वो मुख्य आरोपी है, जिसने पत्रकार जमाल खशोगी को मौत के घाट उतारा था और इस हत्याकांड की सुपारी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दी थी। फ्रांस पुलिस ने राजधानी पेरिस में रियाद के लिए फ्लाइट पकड़ते वक्त खालिद एध अल-ओताबी को तुर्की की वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया है। तुर्की ने ये वारंट जमाल खशोगी की हत्याकांड के एक साल बाद साल 2019 में जारी किया था।

कौन थे पत्रकार जमाल खशोगी?
पत्रकार जमाल खशोगी अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट के लिए मासिक कॉलम लिखा करते थे। उनके कॉलम को सऊदी राजपरिवार के खिलाफ माना जाता था। अपने कॉलम में पत्रकार जमाल खशोगी सऊदी सरकारी की नीतियों की जमकर आलोचना किया करते थे और माना जाता है कि क्राउन प्रिंस सलमान की आंखों में पत्रकार जमाल खशोगी खटकने लगे थे लेकिन पत्रकार जमाल अपनी पत्रकारिता से समझौता करने से मना कर दिया था और बाद में पत्रकार जमाल खशोगी ने सऊदी किंगडम के प्रेशर में आकर सऊदी अरब छोड़ दिया और अमेरिका में शिफ्ट हो गये।

पत्रकार जमाल ने सऊदी छोड़ा
जून 2017- साल 2017 जून में पत्रकार जमाल खशोगी ने सऊदी अरब को छोड़ दिया और वो हमेशा के लिए अमेरिका शिफ्ट हो गये। जहां उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के लिए मासिक कॉलम लिखना शुरू कर दिया। माना जाता है कि सऊदी अरब शाही परिवार और सऊदी अरब सरकार की नीतियों के खिलाफ अगर किसी ने लिखा तो वो सिर्फ पत्रकार जमाल खशोगी थे। उनके अलावा सऊदी अरब के किसी भी पत्रकार ने एक शब्द भी शाही परिवार के खिलाफ नहीं लिखा है। सऊदी अरब में महिलाओं की आजादी से लेकर कई कट्टरपंथी कानून के खिलाफ पत्रकार जमाल खशोगी ने कई आर्टिकल लिखे थे जिसमें कानून में तब्दीली लाने की मांग की गई थी।

तुर्की की लड़की से प्यार
मई 2018- मई 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की मुलाकात तुर्की की रहने वाली 36 साल की पीएचडी स्टूडेंट हैटिस केंगिज से हुई और दोनों ने प्यार के बाद शादी करने का फैसला कर लिया। 28 सितंबर 2018 को पत्रकार जमाल खशोगी तुर्की स्थिति सऊदी अरब दूतावास पहुंचे थे जहां उन्हें पर्सनल डॉक्यूमेंट लेना था। पत्रकार जमाल खशोगी को अपनी पहली पत्नी से तलाक से जुड़े कागजात लेना था ताकि वो हैटिस केंगिज से शादी कर सकें।

सऊदी दूतावास में जमाल की हत्या
2 अक्टूबर 2018- 2 अक्टूबर 2018 को पत्रकार जमाल खशोगी फिर से सऊदी दूतावास पहुंचे जहां सिक्योरिटी कैमरे में उन्हें दूतावास बिल्डिंग में जाते हुए देखा गया। वहीं उनकी मंगेतर हैटिस केंगिज काउंसलेट के बाहर उनका इंतजार कर रही थीं। मंगेतर हैटिस केंगिज को पत्रकार जमाल ने कहा था कि अगर उन्हें कुछ भी गड़बड़ लगे तो वो फौरन Yasin Aktay नाम के शख्स को फोन कर ले जो तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इर्दुगन के बेहद करीबी हैं। तीन घंटे तक हैटिस केंगिज तुर्की में सऊदी दूतावास के बाहर पत्रकार जमाल खशोगी का इंतजार करती रहीं और जब वो बाहर नहीं निकले तो फिर वो खुद दूतावास में गईं, जहां उन्हें बताया गया कि जमाल खशोगी काफी पहले ही दूतावास के पिछले दरवाजे से बाहर जा चुके हैं। बाद में पता चला था कि, जमाल खशोगी की हत्या कर दी गई है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट, जिसे इस साल फरवरी में जारी किया गया है, उसमें कहा गया है कि, सऊदी क्राउन प्रिंस के कहने पर ही जमाल खशोगी को मारा गया था।

कौन है पेरिस में गिरफ्तार खालिद एध अल-ओताबी?
कैलामार्ड द्वारा संकलित 2019 की रिपोर्ट में कहा गया है कि, अल-ओताबी खशोगी की हत्या में शामिल 15-सदस्यीय सऊदी टीम का सदस्य था और जब पत्रकार खशोगी अपनी मंगेतर से शादी करने की इजाजती दस्तावेज प्राप्त करने के लिए वाणिज्य दूतावास गया था, उस वक्त उसकी हत्या कर दी गई थी। उस रिपोर्ट में कहा गया है कि, अल-ओतैबी टीम के उन पांच सदस्यों में से एक था जो खुद वाणिज्य दूतावास में नहीं थे, बल्कि वो महावाणिज्यदूत के आवास में मौजूद था। ब्रिटेन के एक रिपोर्ट फाइनेंशियल सेंक्शन इंम्प्लीमेंटेशन ऑफिस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अल-ओताबी "हत्या के बाद सऊदी जनरल कॉन्सल के आवास पर सबूत छिपाने में शामिल था।" खशोगी की हत्या में शामिल लोगों में अल-ओताबी के नाम के साथ अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की रिपोर्ट है।

खालिद एध अल-ओताबी खोलेगा मुंह?
हालांकि, खालिद एध अल-ओताबी गिरफ्तार कर लिया गया है और अब ऐसी संभावना है कि, उसे तुर्की के हवाले किया जाएगा, जहां पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की गई थी और तुर्की राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को काफी उछालने में लगा रहा है, लिहाजा एक बार फिर से सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ कार्रवाई की मांग जोरों पर उठेगी। खुद जो बाइडेन ने राष्ट्रपति बनने के बाद इसी मुद्दे को लेकर अभी तक मोहम्मद बिन सलमान से बात नहीं की है, लिहाजा अब इस बात की संभावना है कि, अल-ओताबी जो भी बयान देगा, उससे विश्व की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच जाएगी, वहीं सवाल ये भी उठ रहे हैं कि, क्या पत्रकार जमाल खशोगी हत्याकांड में सऊदी क्राउन प्रिंस नपने वाले हैं?












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