मोस्ट वांटेड आतंकियों से सजी है तालिबानी सरकार, 50 लाख डॉलर के इनामी 'गृहमंत्री' को पकड़ेगा अमेरिका?
तालिबान सरकार के प्रमुख मंत्री कौन कौन हैं और क्या मोस्ट वांटेड अपराधियों को, जिनके सिर पर इनाम है, उन्हें अमेरिका पकड़ने की कोशिश करेगा।
काबुल, सितंबर 08: अफगानिस्तान में तालिबान ने अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी है और विश्व के तमाम छंटे हुए आतंकियों से तालिबान की सरकार सजी हुई है। भारत का दुश्मन नंबर वन और अमेरिका के मोस्ट वांटेड आतंकी भी तालिबान की तालिबान की सरकार की शोभा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अब अमेरिका अपने मोस्ट वांटेड आतंकी को गिरफ्तार करेगा? जिन आतंकियों की तलाश के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, जिन आतंकियों को खोजने के लिए 50 लाख डॉलर ईनाम की घोषणा की थी, क्या अमेरिका उस आतंकी को पकड़ेगा?

मोहम्मद हसन अखुंद, प्रधानमंत्री
तालिबान ने मंगलवार को प्रमुख कार्यवाहक मंत्री पदों की घोषणा कर दी है। तालिबान ने घोषणा की है कि अफगानिस्तान में नई सरकार का नेतृत्व मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद करेगा। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने मंगलवार को काबुल में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह घोषणा की। अखुंद तालिबान की शक्तिशाली फैसले लेने वाली संस्था रहबारी शूरा या नेतृत्व परिषद का लंबे समय से प्रमुख है। 1996-2001 तक तालिबान के अंतिम शासन के दौरान वह पहले विदेश मंत्री और फिर उप प्रधान मंत्री था। तालिबान नेतृत्व में कई दूसरे बड़े आतंकियों की तरह अखुंड की तालिबान की स्थापना करने वाला मुल्ला उमर से बेहद नजदीक था। अखुंद भी अफगानिस्तान के कंधार शहर में ही पैदा हुआ था, जहां मुल्ला उमर पैदा हुआ था। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध रिपोर्ट ने अखुंद को मुल्ला उमर का "करीबी सहयोगी और राजनीतिक सलाहकार" बताया था। तालिबान के एक सूत्र ने कहा कि अखुंद को ''आतंकी आंदोलन'' के भीतर खास तौर पर इसके सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा बहुत सम्मान दिया जाता है।
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अब्दुल गनी बरादर, कार्यवाहक उप प्रधान मंत्री
पहले अब्दुल गनी बरादर ही अफगानिस्तान का प्रमुख बनने वाला था, लेकिन पाकिस्तान के हस्तक्षेप के बाद बरादर को राष्ट्रपति नहीं बनाया गया। मुल्ला उमर जब तालिबान की नींव रख रहा था, उस वक्त अब्दुल गनी ने उसकी मदद की थी और दोनों ने साथ मिलकर मदरसा खोला था। अब्दुल गनी को बरादर नाम दिया गया, जिसका मतलब भाई होता है। जब तालिबान ने आखिरी बार अफगानिस्तान पर शासन किया था तब वो उप रक्षा मंत्री के रूप में काम कर रहा था। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध नोटिस में कहा गया है कि तालिबान सरकार के पतन के बाद बरादर ने गठबंधन बलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में काम किया। बरादर को 2010 में पाकिस्तान में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। 2018 में उनकी रिहाई के बाद उसने दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का नेतृत्व किया, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ शांति वार्ता में सबसे प्रमुख व्यक्तियों में से एक बन गया।

आमिर खान मुत्ताकी, कार्यवाहक विदेश मंत्री
मूल रूप से पक्तिया का रहने वाला मुत्तकी खुद को हेलमंद का रहने वाला बताता है। मुत्ताकी ने पिछली तालिबान सरकार के दौरान शिक्षा मंत्री के साथ साथ संस्कृति और सूचना मंत्री के रूप में भी काम किया था। मुत्ताकी को बाद में कतर भेज दिया गया और उसे अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दौरान तालिबान की तरफ से एक सदस्य नियुक्त किया गया और इसने जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई। तालिबान के सूत्रों के अनुसार, मुक्ताकी ना तो तालिबान का कभी कमांडर रहा है और ना ही वो तालिबान को कोई दिशानिर्देश देता था, बल्कि मुक्ताकी तालिबान के आतंकियों को अंतर्राष्ट्रीय कानून से कैसे बचा जाए, इसकी सलाह देता था।

मुल्ला याकूब, कार्यवाहक रक्षा मंत्री
मुल्ला याकूब, तालिबान की नींव रखने वाले मुल्ला उमर का बेटा है और पार्टी में इसकी एक 'राजकुमार' की छवि है। 2015 में मूल्ला उमर ने अपने पिता का उत्तराधिकारी बनने की मांग की थी, जिसे तालिबान के नेताओं ने ठुकरा दिया था और उसकी जगह मुल्ला अख्तर मंसूर को प्रमुख नियुक्त किया गया था। जिससे गुस्सा होकर वो तालिबान की काउंसिल मीटिंग से बाहर चला गया था। ऐसा बताया जाता है कि मुल्ला याकूब को लेकर तालिबान के नीचले तबके में काफी ज्यादा सहानुभूति है, लिहाजा जब वो तालिबान से बाहर चला गया था तो तालिबान के नेताओं को फूट की आशंका दिखने लगी थी, जिसके बाद उसे फिर से मनाकर वापस लाया गया। मुल्ला याकूब हमेशा गुप्त रहता है। माना जाता है कि उसके पिता वजह से तालिबान का एक बड़ा तबका उसका सबसे बड़ा बफादार है। पिछले साल उसे तालिबान मिलिट्री कमीशन का प्रमुख बनाया गया था और माना जाता है कि तालिबान के हर एक मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देने की जिम्मेदारी मुल्ला याकूब की ही होती है।

सिराजुद्दीन हक्कानी, कार्यवाहक आंतरिक मंत्री
प्रभावशाली हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख, भारत के खिलाफ नफरत से फरा...सिराजुद्दीन हक्कानी 2018 में अपने पिता जलालुद्दीन हक्कानी की मौत के बाद अपने संगठन का प्रमुख बन गया। शुरूआती वक्त में ही संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे कई बड़े हमलों का जिम्मेदार ठहरा दिया था। ये पाकिस्तान द्वारा बनाए गये सबसे बड़े आतंकियों में से एक है, जिसके ऊपर 50 लाख डॉलर का इनाम है और ये छंटा हुआ आथंकवादी है। हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के बीच क्या फर्क है, सिराजुद्दीन हक्कानी की वजह से उस फर्क पर बहस होती है। अमेरिका जहां तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को अलग अलग बताता है। माना जाता है कि सिराजुद्दीन हक्कानी ने तालिबान के उपर भी काफी ज्यादा प्रभाव बना लिया है, इसीलिए पाकिस्तान ने सरकार गठन के दौरान बात नहीं मानने पर पूरे तालिबान को ही तोड़ने की धमकी दे दी थी और तालिबान को पाकिस्तान की बात मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। सिराजुद्दीन हक्कानी के लिए नियम-कानून कोई मायने नहीं रखता है और उसनेअफगानिस्तान- पाकिस्तान सीमा पर काफी अराजक स्थिति पैदा कर रखी है और नशे की कारोबार का जन्मदाता इसे ही माना जाता है।

जबीहुल्लाह मुजाहिद, कार्यवाहक उप सूचना मंत्री
तालिबान के लंबे समय के प्रवक्ता, मुजाहिद एक दशक से अधिक समय से तालिबान की गतिविधियों की जानकारी के लिए प्रमुख माध्यम रहा है। तालिबान जितने भी बम धमाके करता आया है, जबीहुल्लाह ही ट्वीट के दरिए दुनिया को उसकी जानकारी देता था और वारदात की जिम्मेदारी लेता था। पहले जबीहुल्लाह की एक भी फोटो उपलब्ध नहीं थी और पहली बार वो दुनिया के सामने तब दिखा, जब काबुल पर तालिबान का कब्जा हो गया और जब उसने उसके बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।












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