Kenya Finance Bill: केन्या का फाइनेंस बिल क्या है? जिससे देश में बने गृहयुद्ध के हालात, संसद में लगाई आग
Kenya Finance Bill: मंगलवार को केन्या की संसद में घुसने की कोशिश करने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज के बाद गोलीबारी शुरू कर कर दी, जिसमें 13 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हो गये हैं। देश में सरकार के फाइनेंस बिल के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में केन्या मेडिकल एसोसिएशन के प्रमुख के हवाले से कहा गया है, कि मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं, जिनमें से 12 नैरोबी में मारे गए। उन्होंने कहा, कि नैरोबी के दो सार्वजनिक अस्पताल घायलों से भर गए हैं, वहीं सांसदों ने एंबुलेंस से संसद से भागना शुरू कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कई एंबुलेंस पर भी हमला कर दिया।

केन्या में हालात ऑउट ऑफ कंट्रोल
केन्या के रक्षा मंत्री अदन डुएल ने मंगलवार को घोषणा की है, कि सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस की सहायता के लिए सेना को तैनात किया है। अदन बेरे डुएल ने एक बयान में कहा, "केन्या भर में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण सिक्योरिटी इमरजेंसी के जवाब में" पुलिस की सहायता के लिए सेना को तैनात किया गया है, क्योंकि प्रदर्शन की वजह से "महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विनाश और कानून व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है।"
हजारों-हजार प्रदर्शनकारी नये फाइनेंस बिल के खिलाफ देश की संसद में घुस आए और देश के सांसद जिस हिस्से में टैक्स वृद्धि के लिए नया बिल पास कर रहे थे, उस हिस्से में आग लगा दी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी, कि सांसद देश पर नए टैक्स लगाने वाले बिल के खिलाफ मतदान करें, जो पूर्वी अफ्रीका का आर्थिक केंद्र है, जहां जीवन की उच्च लागत को लेकर वर्षों से निराशा पसरा हुआ है। केन्या मानवाधिकार आयोग ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले अधिकारियों का एक वीडियो शेयर किया है और कहा है, कि उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
केन्या भीषण चीनी कर्ज और महंगाई से जूझ रहा है, जिसकी वजह से देश के आर्थिक हालात खराब हो गये हैं और राजस्व जुटाने के लिए सरकार ने टैक्स बढ़ाने के लिए संसद में बिल पास करने की कोशिश की थी, जिससे लोग भड़क गये, क्योंकि वो पहले से ही भारी-भरकम टैक्स चुका रहे थे।

केन्या की राजनीतिक स्थिति कैसी हो गई है?
केन्या के सैकड़ों पुलिस अधिकारी, जिन पर मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं ने लंबे समय से लोगों से क्रूर व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं, वो मंगलवार को हैती पहुंचे, ताकि देश को अपने कब्जे में रखने वाले शक्तिशाली गिरोहों के खिलाफ यूनाइटेड नेशंस समर्थित मल्टीनेशनल फोर्स का नेतृत्व किया जा सके।
हालांकि, इस फोर्स की तैनाती को केन्या में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के आशीर्वाद से सरकार चला रहे राष्ट्रपति विलियम रुटो की सरकार ने अमेरिका के ही आदेश पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।
नये फाइनेंस बिल पर क्यों मचा घमासान?
केन्या में फाइनेंस बिल, आम तौर पर जुलाई से जून तक चलने वाले वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले संसद में पेश किया जाता है, जिसमें सरकार की राजकोषीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है। 2024/25 के विधेयक में, केन्याई सरकार का लक्ष्य बजट घाटे और राज्य उधारी को कम करने के लिए अतिरिक्त टैक्स के जरिए 2.7 अरब डॉलर और जुटाना है।
केन्या का सार्वजनिक ऋण, उसकी कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 68% है और वर्ल्ड बैंक और IMF ने केन्याई सरकार को सलाह दी है, कि सार्वजनिक ऋण को 55 प्रतिशत तक लाया जाए।
केन्या लगातार अपने बाजार में पूंजी प्रवाह लाना चाहता है, लेकन वित्तीय बाजारों से उसे बेरूखी का सामना करना पड़ रहा है, लिहाजा देश तरलता की चुनौती से जूझ रहा है और वित्तीय संकट से बचने के लिए केन्याई सरकार ने अब IMF का रूख किया है और IMF ने ऋण जारी करने के लिए सरकार के सामने कई शर्तें रखी हैं और सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए कहा है। और इसीलिए सरकार ने भारी-भरकम टैक्स लगाने के लिए बिल तैयार किया था, जिससे देश में गुस्सा फूट पड़ा है।
प्रदर्शनकारी चाहते हैं, कि सरकार प्लान्ड टैक्स में वृद्धि ना करे और उनका तर्क है, कि इससे अर्थव्यवस्था में रुकावट आएगी और केन्याई लोगों के लिए जीवनयापन की लागत काफी बढ़ जाएगी, जो पहले से ही दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्लान्ड टैक्स को आप वेतन पाने वाले कर्मचारियों पर लगने वाला टैक्स मान सकते हैं और इसमें कई तरह के और भी टैक्स शामिल होते हैं।
केन्या में कहां कहां हो रहे हैं प्रदर्शन?
केन्या में प्रदर्शन की शुरूआत तटीय शहर मोम्बासा से शुरू हुई और फिर ये पूरे देश में फैल गया। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, किसुमू और पूर्वी केन्या के गरिसा में भी प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां पुलिस ने सोमालिया के किसमायु बंदरगाह की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को ब्लॉक कर दिया है।
राजधानी नैरोबी में भीषण प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग राष्ट्रपति रूटो के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लोग नारे लगा रहे हैं, कि 'रूटो के बिना भी देश चल सकता है', 'रूटो के बिना भी सब संभव है।'
हिंसक प्रदर्शन के बीच प्रदर्शनकारी तेज आवाजों में लाउडस्पीकर बजा रहे हैं और लोगों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं, जिससे स्थिति बिगड़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग अब सिर्फ फाइनेंस बिल की वापसी ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के इस्तीफे की हो गई है।
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