नासा का मंगल पर रहने वाला घर एकदम तैयार, ये महिला बिताएगी उसमें एक साल
नासा ने एक घर तैयार किया है, जो मंगल ग्रह के हालात पर आधारित है। उसमें चार शोधकर्ता एक साल तक रहेंगे।
मंगल ग्रह पर जीवन की खोज जारी है। इस बीच वहां पर इंसानों को बसाने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। अगर सब कुछ सही रहा तो 2030 तक वहां पर इंसानों को भेजा जाएगा। वहां पर वो कैसे सर्वाइव करेंगे, इसको लेकर ट्रायल शुरू होने जा रहा।

नासा ने अभी चार लोगों को इस प्रोजेक्ट के लिए चुना है, जिसमें कनाडाई जीवविज्ञानी केली हेस्टन भी हैं। वो जल्द ही उस घर में रहने जा रहीं, जिसको मंगल ग्रह के हालात जैसा बनाया गया है। वो वहां पर ट्रेनिंग लेंगी और करीब एक साल तक उसमें रहेंगी। इस दौरान वो ना बाहर आ पाएंगी और ना ही कोई उस घर में जाएगा।
जानकारी के मुताबिक ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में इस घर को तैयार किया गया है। जिसमें चार लोगों के रहने की व्यवस्था है। जून के अंत में चारों शोधकर्ता उसके अंदर जाएंगे और करीब 12 महीने तक वहां रहेंगे।
घर के अंदर का माहौल एकदम मंगल की तरह है। वहां पर मिट्टी भी लाल रंग की रखी गई है। इसके अलावा अगर वो कंट्रोल सेंटर से संपर्क करते हैं, तो उनका मैसेज मिलने में 20 मिनट का समय लगेगा। इसके बाद कंट्रोल सेंटर का मैसेज उन तक पहुंचने में 20 मिनट लगेगा। वास्तव में मंगल से सिग्नल भेजने पर भी इतना वक्त लगता है।
ये घर 3डी प्रिंटेड है और 160 वर्ग मीटर में फैला है। इसका नाम मार्स ड्यून अल्फा रखा गया है। वहां पर चार बेडरूम हैं। इसके अलावा जिम, किचन, रिसर्च सेंटर बनाया गया है। इस घर को एयरलॉक द्वारा अलग किया गया। वहां पर चारों मार्स वॉक की भी प्रैक्टिस करेंगे।
इस घर में एक साल तक मंगल पर रहने, खाने, आपात स्थिति से निपटने आदि की प्रैक्टिस की जाएगी। चारों शोधकर्ता परिवार से भी दूर रहेंगे। वो सिर्फ मेल के जरिए बात कर पाएंगे। कभी-कभी वो वीडियो मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन उनकी बात लाइव नहीं होगी। उसमें 20 मिनट का अंतर रहेगा। ऐसे में उनको पूरी तरह से मार्स वाली फीलिंग आएगी।
हेस्टन ने कही ये बात
वहीं अपने अनुभव पर बात करते हुए हेस्टन ने कहा कि कभी-कभी ये झूठ लगता है, लेकिन जब मैं इसके बारे में सोचती हूं तो मुझे हंसी आती है। वो इस बारे में बहुत उत्साहित हैं और चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं।












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